राजस्थान में भगवान भरोसे कोटा के 3 मेडिकल कॉलेज, नहीं है कोई लेखाकार

जानकारी के मुताबिक अकाउंटेंट की कमी से जूझ रहे अस्पतालों से ट्रेजरी में बिल समय पर नहीं भेजे जाते. जिसके चलते कई बार दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. 

राजस्थान में भगवान भरोसे कोटा के 3 मेडिकल कॉलेज, नहीं है कोई लेखाकार
एमबीएस अस्पताल में चार लेखाधिकारियों के पद स्वीकृत है.

मुकेश सोनी/कोटा: राजस्थान के कोटा मेडिकल कॉलेज से सम्बद्ध तीन बड़े अस्पतालों में लेखा विभाग में जुगाड़ के सहारे काम चल रहा है. मेडिकल कॉलेज से सम्बद्ध तीनों बड़े अस्पताल में विगत कुछ माह से अकाउंटेंट का टोटा है. हालत है कि एक ही अकाउंटेंट के भरोसे सम्भाग दो बड़े अस्पताल व एक जिला अस्पताल का कार्य सम्पादित किया जा रहा है. सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक अकाउंटेंट की कमी से जूझ रहे अस्पतालों से ट्रेजरी में बिल समय पर नहीं भेजे जाते. जिसके चलते कई बार दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. 

फिलहाल सहायक लेखाधिकारी (अराजपत्रित) सुमित श्रीवास्तव ही वरिष्ठ लेखाधिकारी (राजपत्रित) का चार्ज देख रहे है. वर्तमान में तीनों अस्पतालों में निविदाओं का समय है. अकेले एमबीएस अस्पताल में ही एक दर्जन के करीब टेंडर लगे हैं. जिनमे से अभी दो -चार ही टेंडर क्लियर हो पाए है.  जेके लोन व रामपुरा अस्पताल में लेखा विभाग जुगाड़ के सहारे चल रहा है. 

ऐसे में अकाउंटेट की कमी से जूझ रहे अस्पतालों में निविदाओं में देरी होने व भ्रष्टाचार होने की आशंका भी जताई जा रही है. मेडिकल कॉलेज  प्रशासन भी मान रहा है अकाउंटेट के पद रिक्त होने से मुश्किल आ रही है, पर जैसे तैसे काम चला रहे है.

वहीं, एमबीएस अस्पताल व जेके लोन में चार लेखाधिकारियों के पद स्वीकृत है. जिनमे केवल एमबीएस अस्पताल में ही सहायक लेखाधिकारी (अराजपत्रित) का पद भरा है. जबकि हाड़ौती के सबसे बड़े मातृ एवं शिशु (जेके लोन) अस्पताल में वरिष्ठ लेखाधिकारी व सहायक लेखाधिकारी (अराजपत्रित) के पद रिक्त है. कॉलेज प्रशासन ने कार्य व्यवस्था के तहत एक सहायक लेखाधिकारी को तीन अस्पताल का चार्ज दे रखा है. 

जबकि एमबीएस में पदस्थापित एक जूनियर अकाउंटेंट प्रतिनियुक्ति पर दूसरी जगह सेवाएं दे रहे है. ऐसे में पद रिक्त होने पर कई बार प्लेसमेंट एजेंसियो को समय पर भुगतान में देरी हो जाती है.  कई मर्तबा तो समय पर वेतन भुगतान नहीं होने से ठेका श्रमिक आंदोलन पर उतारू हो जाते है. जिस कारण मरीज व तीमारदार परेशान होते है. तीनों अस्पतालों में चार प्लेसमेंट एजेंसियां धंधा कर रही है. इन प्लसमेन्ट एजेंसियों के माध्यम से अस्पतालों में, सुरक्षा गार्ड, कम्प्यूटर ऑपरेटर, दवा काउंटर, पर्ची काउंटर, सफाईकर्मी, लेब सहित अन्य जगहों पर ठेका श्रमिक लगे है.