राजस्थान: क्या 1 साल में आए किसानों के अच्छे दिन, पढ़ें गहलोत सरकार की पूरी रिपोर्ट

गहलोत सरकार की सबसे बड़ी चुनौती थी, 21 लाख किसानों की 10 दिन में कर्जमाफी. वहीं, वसुंधरा सरकार ने कर्जमाफी के नाम पर 8 हजार करोड़ का भार गहलोत सरकार पर छोड़कर चली गई. 

राजस्थान: क्या 1 साल में आए किसानों के अच्छे दिन, पढ़ें गहलोत सरकार की पूरी रिपोर्ट
अशोक गहलोत ने कुर्सी संभालते ही सबसे पहला काम किया किसानों की कर्जमाफी.

जयपुर: राजस्थान में सत्ता में आते गहलोत सरकार की सबसे बड़ी चुनौती थी, 21 लाख किसानों की 10 दिन में कर्जमाफी. वहीं, वसुंधरा सरकार ने कर्जमाफी के नाम पर 8 हजार करोड़ का भार गहलोत सरकार पर छोड़कर चली गई. वहीं, सियासत के इस जादूगर ने अपनी छड़ी ऐसी घुमाई कि केवल 2 दिन में कर्जमाफी का ऐलान कर दिया. इसके बाद किसानों के अच्छे दिन ही शुरूआत हो गई.

किसानों के आर्थिक उन्न्यन में सहकारिता का एक साल राजस्थान के जननायक मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के नेतृत्व वाली सरकार ने एक वर्ष के भीतर बड़े बदलाव किए. मुख्यमंत्री गहलोत ने कुर्सी संभालते ही सबसे पहला काम किया किसानों की कर्जमाफी. प्रदेश में कर्ज में डूबे 21 लाख किसानों ने कर्जमाफी की. इसके बाद ना केवल कर्ज माफ किया, बल्कि ब्याजमुक्त ऋण भी उपलब्ध करवाया. इस कडी में गहलोत सरकार ने सबसे बडा मोती पिरोया 10 लाख नए किसानों को ऋण देकर.

देश में पहली बार किसानों की ऋण माफी और ऋण वितरण भी ऑनलाइन किया गया. यानि पूरी पारदर्शिता के साथ सरकार ने पात्र और सच्चे किसानों को ऋण उपलब्ध करवाया. वहीं, पिछली सरकार में कर्जमाफी के नाम पर करोड़ो के घोटाले हुए. इसके साथ साथ मंत्री उदयलाल आंजना की पहल पर  किसान सेवा पोर्टल की  ग्राम सेवा सहकारी समितियों पर ई-मित्र केन्द्रों की शुरूआत, यूरिया एवं डीएपी का बफर स्टॉक, बायोमैट्रिक प्रणाली से समर्थन मूल्य पर आनलाइन खरीद, आनलाइन वेयरहाउस रिसिप्ट सेवा, एटीएम एवं मोबाइल वैन स्थापित करना जैसी योजनाएं लागू कर सहकारिता के किसानों को सबसे ज्यादा लाभ पहुंचाने का काम किया.

वहीं, अल्पकालीन के साथ-साथ मध्यकालीन और दीर्घकालीन कृषि ऋण भी सरकार ने माफ किए. 4 लाख बीघा भूमि रहन मुक्त 70 हजार किसानों को राहत दी गई. आर्थिक संकट से जूझ रहे ऐसे किसानों को दोहरी सौगात मिली. एक ओर उनकी ऋण माफी हुई वही दूसरी ओर बैंकों के पास रहन रखी लगभग 4 लाख बीघा जमीन रहन मुक्त कर उनके नाम पुनः दर्ज होनी शुरू हुई. 

इस योजना से अब तक 24908 किसानों की 1.60 लाख बीघा जमीन पुनः उनके नामे हो चुकी है.वहीं बायोमैट्रिक सत्यापन (आधार आधारित) से वास्तविक किसान को लाभ मिला भरपूर लाभ मिल रहा है.इस नई शुरूआत से खरीफ और रबी फसली ऋण से राज्य के 20.30 लाख से अधिक किसानों को फसली ऋण से जोड़ा जा चुका है.

प्रदेश की जनता को सरकार की ओर से ई-मित्र केन्द्रों द्वारा प्रदान की जा रही 400 से अधिक सेवायें उपलब्ध हो सके, इसके लिए महात्मा गांधी के 150वें जयन्ती पर अभियान चलाकर सभी 6500 ग्राम सेवा सहकारी समितियों को ई-मित्र केन्द्रों की सुविधा से जोड़ने की शुरूआत की गई है. जिसका नतीजा है कि लगभग 5 हजार ग्राम सेवा सहकारी समितियों पर ई-मित्र केन्द्रों की सुविधा आम लोगों को मिलने लगी है. इसके कारण ग्राम सेवा सहकारी समितियां स्वावलम्बन की ओर बढ़ने के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्र में डोर स्टेप पर राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ प्रदान कर रही हैं.

इसके अलावा समस्त प्रकार के सहकारी संस्थाओं के चुनाव के लिए पोर्टल में आवश्यक प्रावधान किये गये हैं. सहकारी संस्था को अपने चुनाव करवाने के लिए आनलाइन ही आवेदन करना होगा. पोर्टल के अंतर्गत बनाई गई विभागीय बेवसाइट के माध्यम से भी सामान्य नागरिक को सहकारी कोर्ट केस स्टेटस, आडिट रिपोर्ट, डेयरी सहकारी समिति और ग्राम सेवा सहकारी समिति का सदस्य बनने हेतु आवेदन, न्यूनतम समर्थन मूल्य पर बिक्री के लिए आवेदन, फसली ऋण प्राप्त करने हेतु आवेदन और लॉन वेवर स्टेटस की सुविधा उपलब्ध करवायी गई है.

भंडारण क्षमता में वृद्धि के लिए गोदाम निर्माण पर विशेष फोकस ग्रामीण क्षेत्र में किसानों को उनकी मांग के अनुसार कृषि आदान यथा-खाद, बीज, दवाइयां आदि उपलब्ध कराने तथा ग्रामीण क्षेत्र में किसानों की उपज के भण्डारण के लिये गोदामों का होना आवश्यक है. इसके लिये प्रदेश में सभी ग्राम सेवा सहकारी समितियों सहित क्रय-विक्रय सहकारी समितियों में गोदामों के निर्माण को सुनिश्चित किया जा रहा है. 

वर्तमान में प्रदेश की 90 प्रतिशत से अधिक ग्राम सेवा सहकारी समितियों में गोदामों का निर्माण किया जा चुका है और जिन सोसायटियों में गोदाम नहीं हैं, उनमें गोदामों का निर्माण करने के लिये प्रयास किये जा रहे हैं. प्रदेश में सहकारी क्षेत्र में अब तक 6700 मी.टन क्षमता के गोदामों का निर्माण किया जा चुका है. किसानों को कृषि आदान की उपलब्धता कराने के लिये 3 लाख मी. टन खाद का बफर स्टाक सुनिश्चित किया है, ताकि किसानों को फसल उपजाने के दौरान खाद की किल्लत का सामना नहीं करना पड़े. इसके साथ-साथ 18 हजार से ज्यादा सहकारी संस्थाओं के चुनाव की घोषणा के बाद लोकतंत्र और अधिक मजबूत करने का काम किया. कुल मिलाकर किसानों के हितों को लेकर सरकार का एक साल काफी बेमिसाल रहा.