राजस्थान: चुनाव के कारण स्कूलों में अधूरा रह गया छात्रों के एडमिशन का अभियान

विभाग ने दाखिले के प्रथम चरण में 10 फीसदी नामांकन का लक्ष्य रखा था. लेकिन 734 प्रारम्भिक स्कूल में  848 नामांकन व 305 माद्यमिक स्कूलो में 983 नामांकन की हो पाए.

राजस्थान: चुनाव के कारण स्कूलों में अधूरा रह गया छात्रों के एडमिशन का अभियान
शिक्षा विभाग ने इस बार प्रवेश उत्सव के तहत सरकारी स्कूलों में नामांकन वृद्धि पर जोर दिया था

कोटा: प्रदेश के कोटा शहर के सरकारी स्कूलों में प्रथम चरण में नामांकन का दौर चुनावी शोर में दब गया. शिक्षकों के लोकसभा चुनाव में व्यस्त होने के कारण प्रथम चरण का प्रवेश उत्सव फीका रहा. हालत यह रहे कि विभाग 10 प्रतिशत लक्ष्य भी हासिल नहीं कर पाया.

शिक्षा विभाग ने इस बार प्रवेश उत्सव के तहत सरकारी स्कूलों में नामांकन वृद्धि पर जोर दिया था, लेकिन लोकसभा चुनाव के चलते स्कूलों में प्रवेश उत्सव का शोर दब गया. लोकसभा चुनाव में जिले के करीब दस हजार शिक्षकों की ड्यूटी लगी है. शिक्षक चुनाव में व्यस्त होने के कारण प्रथम चरण का प्रवेश उत्सव फीका रहा. विभाग ने दाखिले के प्रथम चरण में 10 फीसदी नामांकन का लक्ष्य रखा था. लेकिन 734 प्रारम्भिक स्कूल में  848 नामांकन व 305 माद्यमिक स्कूलो में 983 नामांकन की हो पाए.

वहीं बीकानेर शिक्षा निदेशालय ने स्कूलों में 25 अप्रेल से 9 मई तक नामांकन वृद्धि व अनामकित, ड्राप आउट बच्चों को विद्यालय से जोडऩे के लिए प्रवेश उत्सव अभियान की गाइड लाइन जारी की थी. इसके तहत जिले में रैलिया निकलना, अभिभावको को जागरूक करना, ढोल बजाकर जागरूक करना जैसे कार्यक्रम आयोजित किये जाने थे. दोनों विभागों में 10 हजार से अधिक शिक्षको को टीम थी. लेकिन चुनाव के चलते प्रवेश उत्सव की कोई गतिविधिया नही हो पाई.

ऐसे में तय विभाग तय लक्ष्य तक भी नहीं पहुच पाया. इतना ही नहीं इस बार पाठ्यपुस्तक छपाई में देरी होने के कारण पाठ्यपुस्तक मंडल में 50 प्रतिशत ही पुस्तकें पहुंच पाई है. प्रवेश उत्सव के खत्म होने के एक दिन पहले 8 मई से 12 मई तक पुस्तकें बांटी गई. 

साथ ही स्कूलों में प्रवेश उत्सव के तहत 3 से 18 साल तक के सभी ड्रॉप आउट बच्चों को जोडऩा है. ऐसे में विभाग द्वितीय चरण के लक्ष्य पर जुटा है. इसके तहत योजनाओं के प्रचार को भी माध्यम बनाया है. यानी सरकारी स्कूलों में बच्चों को मिल रही साइकिल, स्कूटी, लैपटॉप, वाउचर स्कीम और गार्गी जैसे पुरस्कारों के प्रचार के माध्यम से नवीन बच्चों को जोड़ा जाएगा. स्कूलों में छात्रों की सह शैक्षिक गतिविधियों को गांव के बाहर चौपाल और सार्वजनिक स्थल पर प्रदर्शित करने की योजना भी बनाई जा रही है. उम्मीद है विभाग अपने लक्ष्य में कामयाब होगा ताकि स्कूलों में नामांकन वृद्धि हो सकेगी.