राजस्थान: छोटी काशी में ठाकुरजी को एसी-कूलर की हवा, देवस्थान में पंखे भी नदारद

हिन्दू धार्मिक मान्यता के अनुसार ठाकुरजी को बाल स्वरूप माना गया गया है. ऐसे में उनकी सेवा भी बच्चों की तरह ही की जाती है. 

राजस्थान: छोटी काशी में ठाकुरजी को एसी-कूलर की हवा, देवस्थान में पंखे भी नदारद

जयपुर: भगवान के दर पर जाने वाले हर भक्त को अपनी फरियाद पूरी होने की आस होती है लेकिन इस तपती गर्मी में भगवान और मन्दिर में भी अन्तर है. प्रदेश में अधिकांश निजी मन्दिरों में एयर कंडीशन या कूलर चल रहे हैं जबकि देवस्थान विभाग के तहत आने वाले मन्दिर तो पंखे तक को भी तरस रहे हैं. ऐसे में सूरज के टॉर्चर के बीच इन मन्दिरों में भक्तों के साथ भगवान भी पसीने से लथपथ हैं.

ठाकुर जी का दरबार सभी के लिए खुला है. राजा से लेकर रंक तक सभी भगवान से गुहार लगाते हैं कुछ न कुछ मांगते हैं. हर कोई भगवान के आगे अपना दामन फैलाकर उसे सराबोर करना चाहता है. खुशियों और समृद्धि से सराबोर होने की आस तो सभी को है लेकिन पसीने से सराबोर ठाकुर जी की तरफ किसी का ध्यान नहीं है. सरकारी मन्दिरों में पंखे नहीं होने के चलते यहां भक्त से लेकर भगवान सभी पसीने से लथपथ हैं. जबकि निज मन्दिरों में एसी चल रहे हैं और इसके चलते अब तो सरकार में महत्वपूर्ण ओहदों पर बैठे लोग भी सरकारी मन्दिर की बजाय निजी मन्दिरों की तरफ़ ही रुख कर रहे हैं.

एक ओर जहां निजी मंदिरों में विराजे ठाकुरजी एसी और कूलर की ठंडक में गर्मी से राहत महसूस कर रहे है. वहीं देवस्थान विभाग के मंदिरों में विराजे ठाकुरजी को पंखे की हवा भी नसीब नहीं हो रही है. ऐसे में गर्म हवाओं के थपेड़ों से व्याकुल हो रहे है. जेष्ठ मास में चल रहे भीषण गर्मी के दौर में हर कोई परेशान है और तो और इससे ठाकुरजी भी अछुते नहीं है. एक ओर जहां निजी मंदिरों में भक्तों की ओर से ठाकुरजी को लू से बचाने के लिए गृभगृह में एसी और कूलर लगाकर ठंडक प्रदान की जा रही हैं. ज्येष्ठ के महीने में मंदिरों में जल उत्सव मनाया जा रहा है. जहां ठाकुरजी को फव्वारे चलाकर राहत दी जा रही है. वहीं दूसरी और देवस्थान विभाग के मंदिरों में ठाकुरजी को पंखों की गर्म हवा भी नसीब नहीं है. ऐसे में ठाकुरजी पसीने में तरबतर हो रहे है.

हिन्दू धार्मिक मान्यता के अनुसार ठाकुरजी को बाल स्वरूप माना गया गया है. ऐसे में उनकी सेवा भी बच्चों की तरह ही की जाती है. पुरानी परंपराओं में लोग गर्मियों में मंदिरों में पंखा झल कर अपनी सेवाएं देते थे. यह परंपरा सनातन काल से अनवरत चली आ रही है लेकिन समय के अनुसार अब परंपराओं में भी बदलाव आया है. समय के साथ अब इस सेवा ने भी आधुनिक रूप ले लिया है. लोग अब पंखा झलने की सेवा देने की जगह एसी-कूलर लगवा कर सेवाएं दे रहे हैं. इससे भक्त भेदभाव कर रहे हैं. 

जानकारों की माने तो विभाग के कुछ मंदिरों में पंखे लगे हुए हैं. वहां पर भी ठाकुरजी को पंखें की गर्म हवा से ही संतोष करना पड़ रहा है. माणक चौक स्थित मंदिर मदन मोहनजी, बड़ी चौपड़ स्थित मंदिर श्रीचंद्रबिहारजी, छोटी चौपड़ स्थित जानकी बल्लभ मंदिर पुरानी बस्ती स्थित राधा वल्लभ मंदिर, मदन बिहारीजी, फतेहकुंज बिहारी मंदिर, बगरु वालों का रास्ता स्थित चर्तुभुजजी का मंदिर, त्रिपोलिया स्थित मंदिर श्री मेहताब बिहारीजी सहित कई मंदिरों में या तो पंखे है नहीं और यदि है भी तो खराब पड़े हैं. 

वहीं शहर के कुछ मंदिरों की गिनती समृद्ध मंदिरों में आती है. जहां ठाकुरजी के अलग ही ठाट-बाट है. इनमें पुरानी बस्ती स्थित गोपीनाथजी मंदिर, चौड़ा रास्ता स्थित राधा दामोदरजी मंदिर, पान दरीबा, सरस निकुंज के राधा सरस बिहारीजी, गोनेर स्थित लक्ष्मीजगदीश मंदिर, गलतागेट कनकबिहारी जी, खोले के हनुमानजी स्थित मंदिर श्रीसियारामजी, लक्ष्मीनारायण बाईजी का मंदिर में ठाकुरजी को एसी की सेवा दी जा रही है. उधर मोती डूंगरी गणेशजी, गोविन्ददेवजी मंदिर, चांदनी चौक स्थित प्रतापेश्वर महादेव मंदिर, त्रिपोलिया स्थित ब्रजराज बिहारीजी मंदिर, बासबदनपुरा स्थित मंदिर श्री मुरली मनोहरजी, छोटी चौपड़ स्थित सीतारामजी मंदिर जहां पर ठाकुरजी के कूलर लगे हुए है.