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राजस्थान: ग्रामीण सहकारी समिति का बड़ा घोटाला, मरे हुए लोगों को भी दिया कर्ज

तत्कालीन सरकार ने किसानों को राहत देते हुए 50 हजार तक की कर्जमाफी की थी. जिसके तहत डूंगरपुर जिले में 65 हजार किसानों का 188 करोड़ तक का ऋण माफ किया था

राजस्थान: ग्रामीण सहकारी समिति का बड़ा घोटाला, मरे हुए लोगों को भी दिया कर्ज
ग्रामीण सहकारी समितियों के व्यवस्थापकों ने मरे हुए लोगों को भी नहीं छोड़ा

अखिलेश शर्मा/डूंगरपुर: तत्कालीन भाजपा सरकार के समय हुई किसानों की कर्जमाफी में घोटाले को लेकर डूंगरपुर जिला इन दिनों सुर्खियों में है. केन्द्रीय कॉपरेटिव बेंक व जिला प्रशासन के पास 30 से अधिक ग्रामीण सहकारी समितियों द्वारा हजारों लोगों के नाम से गलत तरीके से करोड़ो का लोन उठाकर उसे माफ करने की शिकायतें आ चुकी है. वहीं घोटालो की शिकायतों का सिलसिला लगातार जारी है. इधर मामला सामने आने के बाद राज्य सरकार ऑडिटर्स की टीम से पुरे मामले की जांच करवा रही है.

तत्कालीन सरकार ने किसानों को राहत देते हुए 50 हजार तक की कर्जमाफी की थी. जिसके तहत डूंगरपुर जिले में 65 हजार किसानों का 188 करोड़ तक का ऋण माफ़ किया था. कर्जमाफी का लाभ लेने वाले किसानों की सूचियों को सहकारिता विभाग द्वारा ऑनलाइन किया गया था. इधर सूचियों के ऑनलाइन होने से बाद ग्रामीण सहकारी समिति द्वारा किये गए घोटाले सामने आ रहे है. ग्रामीण सहकारी समितियों के व्यवस्थापकों ने कभी भी लोन नहीं लेने वाले लोगों के नाम से लोन उठाकर उसे माफ़ कर दिया. इन लोगो में सरकारी कार्मिक, एनआरआई, विद्यार्थियों के नाम शामिल है. इतना ही नहीं ग्रामीण सहकारी समितियों के व्यवस्थापकों ने मरे हुए लोगों को भी नहीं छोड़ा.

डूंगरपुर जिले में सर्वाधिक घोटाले सागवाडा उपखंड क्षेत्र की ग्रामीण सहकारी समितियों में हुआ है. सागवाड़ा उपखंड क्षेत्र की 23 ग्रामीण सहकारी समितियों के व्यवस्थापको ने हजारो लोगों के नाम से फर्जी तरीके से लोन उठाया और उसे माफ़ भी कर दिया. इन 23 ग्रामीण सहकारी समिति क्षेत्र के 2 हजार 703 लोगों का गलत तरीके से लोन माफ़ हुआ और इन लोगो ने अब केन्द्रीय कॉपरेटिव बैंक व जिला प्रशासन को शिकायत करते हुए कार्रवाई की मांग की है. इधर सागवाडा उपखंड क्षेत्र की ग्रामीण सहकारी समितियों में घोटाला सामने आने के बाद जिले की अन्य क्षेत्रो की भी सहकारी समिति क्षेत्र के लोगो ने भी घोटालो की शिकायत जिला प्रशासन से की है. 

इधर ग्रामीण सहकारी समितियों द्वारा कर्जमाफी में घोटाला सामने आने के बाद जयपुर आई टीमों ने इन ग्रामीण सहकारी समितियों के अंतर्गत आने वाली पंचायतो में कैम्प लगाकर ग्रामीणों की आपत्तिया तो ले ली लेकिन कार्रवाई के नाम पर केवल व्यवस्थापको के अधिकार छिनने के अलावा अभी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है. वही कैन्द्रीय कॉपरेटिव बैंक के बोर्ड ने बैठक करते हुए पुरानी सूचियों को निरस्त करते हुए नई सूचियां जारी करने व शिकायत वाली ग्रामीण सहकारी समितियों को जांच करवाते हुए दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने का प्रस्ताव पास करके राज्य सरकार को भेजा है. 

बहराल डूंगरपुर जिले में हुई कर्जमाफी में घोटाला सामने आने के बाद राज्य सरकार ने घोटाले की जांच के लिए आदेश तो जारी कर दिया है. वही राज्य सरकार की ओर से गठित 20 ऑडिटर्स की टीम डूंगरपुर पहुंचकर घोटाले की जांच में जुट गई है. लेकिन देखना होगा की ये जांच कब तक पूरी होती है और दोषियों के खिलाफ किस प्रकार की कार्रवाई अमल में लाई जाती है.