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राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत कांग्रेस के लिए रहे संकटमोचक और चाणक्य!

गहलोत ने बुधवार को कांग्रेस के राष्ट्रीय संगठन महासचिव पद से इस्तीफा दे दिया.

राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत कांग्रेस के लिए रहे संकटमोचक और चाणक्य!
गहलोत ने राष्ट्रीय महासचिव के तौर पर कई महत्वपूर्ण राजनीतिक प्लानिंग की. (फाइल फोटो)

मनोहर विश्नोई, नई दिल्ली: राजस्थान में सरकार बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले कांग्रेस के दिग्गज नेता ने राज्य के सीएम बनने के बाद अपनी सशक्त उपस्थिति राज्य में दर्ज करवाई. इसके साथ राष्ट्रीय संगठन महासचिव के छोटे लेकिन अति महत्वपूर्ण कार्यकाल के दौरान उन्होंने अपने राजनीतिक विरोधियों को भी चारों खाने चित्त कर दिया.

जानिए कैसा रहा राष्ट्रीय महासचिव के तौर पर गहलोत का सफर

अपने आप को नंबर दो पर स्थापित कर अब तक के राजनीतिक करियर में पार्टी में सर्वोच्च मुकाम हासिल करने के बाद अशोक गहलोत तीसरी बार राजस्थान के मुख्यमंत्री पद पर आसीन हुए. वहीं गहलोत ने बुधवार को 299 दिनों के अपने राष्ट्रीय संगठन महासचिव पद सफर से अपने आपको अलग करते हुए अपने ही हस्ताक्षर से यह पद के सी वेणुगोपाल को सौंप दिया. अशोक गहलोत का बतौर संगठन महासचिव कार्यकाल कई उपलब्धि और चुनौतियों से भरा था. गहलोत ने अब तक के सबसे बुरे दौर से गुजर रही कांग्रेस को उबारने में अहम भूमिका निभाई.

गहलोत बने रहे कांग्रेस के लिए संकटमोटक और चाणक्य 

राहुल गांधी ने अध्यक्ष पद पर ताजपोशी के बाद संगठन में परिवर्तन करते हुए संगठन महासचिव के पद पर दो बार के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को अहम जिम्मेदारी सौंपी. उसके बाद गहलोत भी अपने राजनीतिक जीवन के 40 साल के तजुर्बे के आसरे सूझबूझ, दूरदर्शिता के साथ परिक्वता का परिचय देते हुए कई मोड़ पर पार्टी के लिए संकटमोचक और चाणक्य की भूमिका में नजर आए. 

इस दौरान उन्होंने कर्नाटक में कांग्रेस गठबंधन की सरकार बनाने के मुद्दे पर भी कामयाब रहे. इससे पहले केन्द्र सरकार को महिला सुरक्षा के मुद्दे पर घेरने के लिए भी गहलोत की सलाह पर कैंडल मार्च निकालने के अलावा, आरएसएस पर मुखर रूप से हमले करना, गुजरात चुनावों में पार्टी को भाजपा के सामने मजबूती से खड़ा करने के लिए अपनी राजनीतिक अनुभवों के सहारे उन्होंने पार्टी को मजबूत किया. इसके अलावा गुजरात में राज्यसभा चुनाव के दौरान अहमद पटेल को चुनावी जीत हासिल करवाने में गहलोत ने बड़ी भूमिका निभाई.

गहलोत ने फिर से खड़ा किया सेवा दल  

कांग्रेस आलाकमान ने जनार्दन द्विवेदी की जगह अशोक गहलोत को संगठन महासचिव बनाया था. संगठन की कमान संभालते ही गहलोत ने पार्टी में कई नवाचार करते हुए अग्रिम संगठनों की सक्रियता और अहमियत बढ़ा दी. अपने कार्यकाल के दौरान कांग्रेस में लगभग निष्क्रिय हो चुके सेवादल की अहमियत बढ़ाते हुए एक बार फिर से पुराने स्वरूप में खड़ा करने की जद्दोजहद शुरू कर दी. उसी के परिणाम स्वरुप सेवादल की यूथ विंग का गठन किया गया. इसके अलावा गहलोत ने भाजपा के राष्ट्रवाद का तोड़ निकालते हुए सेवादल को प्रत्येक माह राष्ट्रीय ध्वज के ध्वजारोहण का कार्यक्रम करने के निर्देश दिए. वहीं, एनएसयूआई और युवा मोर्चे को छात्रों के हितों की बात पुरजोर तरीके से उठाने के लिए सक्रिय किया. गुटबाजी के शिकार रहे इंडियन यूथ कांग्रेस में बड़ा बदलाव करते हुए युवाओं की बेरोजगारी व यूथ से जुड़े मामलों को सड़क पर पुरजोर उठाने के लिए सक्रिय किया.

संगठन महासचिव बनने के बाद किया अहम राजनीतिक गेम प्लान

संगठन महासचिव बनने के बाद सबसे अहम राजनीतिक गेम प्लान के दौरान गहलोत ने 13 अप्रैल को यूपी के उन्‍नाव और जम्‍मू-कश्‍मीर के कठुआ में हुई रेप की वारदातों के विरोध में कांग्रेस अध्‍यक्ष राहुल गांधी के साथ आधी रात को कैंडल मार्च निकालने की प्लानिंग करवाई थी. जिसमें शामिल होने के लिए प्रियंका गांधी सहित पार्टी के तमाम सीनियर नेता आनन फानन में  इंडिया गेट पर पहुंचे हुए थे. माना जाता है कि इस प्लानिंग के बाद देश के जनमानस पर इसका सकारात्मक प्रभाव पड़ा. वहीं, दूसरे दिन के अखबारों की हेड लाइन की सुर्खियों में यह छाए रहे.

अशोक गहलोत को सीएम के तौर पर मिली तीसरी बार राजस्थान की कमान

राजस्थान में सचिन पायलट के दावे को पीछे करते हुए गहलोत को कांग्रेस आलाकमान ने तीसरी बार सीएम बनाया. इससे पहले 1998, 2008 में भी गहलोत राजस्थान के सीएम रह चुके है.

प्रियंका की सक्रिय राजनीति में एंट्री में गहलोत की रही है भूमिका

मुख्यमंत्री पद को संभालने के बाद और संगठन महासचिव पद छोड़ने से पहले प्रियंका गांधी की सक्रिय राजनीति में एंट्री में भी गहलोत की भूमिका रही है. 

वैसे राजस्थान में पिठले चुनाव के दौरान 25 लोकसभा सीटों पर बीजेपी ने जीत हासिल की थी. लेकिन अब देखने वाली बात यह होगी कि गहलोत राज्य  में दो धुरियों में बंटी पार्टी को एकसूत्र में बांधकर लोकसभा चुनावों में कितनी बड़ी सफलता दिला पाते हैं…