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बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान में राजस्थान रहा अव्वल, मिला राष्ट्रीय पुरस्कार

श्रेष्ठ जिलों में देशभर से 25 जिलों का चयन हुआ है, जिमसें राजस्थान के दो जिले झुंझुनू और हनुमानगढ़ को पुरुस्कार मिले.

बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान में राजस्थान रहा अव्वल, मिला राष्ट्रीय पुरस्कार
झुंझुनू और हनुमानगढ़ को भी मिला पुरस्कार.

जयपुर/ आशीष चौहान: बेटी बचाओ, बेटी पढाओ में राजस्थान एक बार फिर देश में अव्वल आया है. राजस्थान को लगातार दूसरी बार श्रेष्ठ राज्यों में चुना गया है. केंद्रीय महिला बाल विकास मंत्री मेनका गांधी दिल्ली में राजस्थान को राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया. राजस्थान को इस योजना में तीन पुरस्कार मिले. पहला पुरस्कार श्रेष्ठ राज्य की श्रेणी में और दूसरा और तीसरा पुरस्कार श्रेष्ठ जिलों की श्रेणी में दिया गया. यह पुरस्कार आईसीडीएस डायरेक्टर सुषमा अरोड़ा ने ग्रहण किया.

श्रेष्ठ जिलों में देशभर से 25 जिलों का चयन हुआ है, जिमसें राजस्थान के दो जिले झुंझुनू और हनुमानगढ़ को पुरुस्कार मिले. झुंझुनू को पीसीपीएनडीटी के क्रियान्वयन के लिए और हनुमानगढ़ को सामुदायिक भागीदारी निभाने के लिए यह पुरस्कार दिया गया. यह पहला मौका नहीं है जब राजस्थान को बेटी बचाओं बेटी पढाओं में पुरस्कार मिल रहा है, बल्कि पिछले साल भी राष्ट्रीय स्तर पर राष्ट्रपति के हाथों राजस्थान को पुरस्कार मिला था.

इसी अभियान के जरिए राजस्थान में लिंगानुपात में कमी आई है. 2015 में जहां प्रति 1 हजार पुरूषों पर 929 महिलाए थी, वहीं अब बढ़कर 950 तक पहुंच गई है. इसके साथ साथ बाल विवाह जैसी कुरूतियों को भी समाज से उखाड़ फैकने का काम किया गया. 

राजस्थान का झुंझुनू जिला बेटियों के मामले में सबसे बदनाम जिलों में से एक हुआ करता था. यहां बेटियों को घर की लक्ष्मी नहीं, बल्कि परिवार पर बोझ समझा जाता था. एक वक्त ये था जब यहां लड़के और लड़कियों के लिंगानुपात में भारी अंतर था. इसलिए राजस्थान के 33 जिलों में से झुंझुनू बदनाम था. बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ मिशन से राजस्थान में नई क्रांति आई और दोनों जिलों पर लगे इस बदनामी धब्बा जड़ से उखाड़ फैका. जब बेटी बचाओं बेटी पढाओं योजना लॉन्च हुई तो झुंझुनू जिला देश में सबसे पिछडा हुआ जिला था लेकिन अब इसी जिले को देश में अव्वल पुरस्कार से नवाजा जाएगा.

2011 की जनगणना के मुताबिक झुंझुनू में 1 हजार पुरूषों पर 837 महिलाए थीं. जब बेटी बचाओ मिशन का पहला साल खत्म हुआ तो यहां इतना बदलाव हुआ कि किसी को आस नहीं थी. यहां 1000 पुरूषों पर 837 से बढ़कर महिलाओं की संख्या 903 पहुंच गई. उसके बाद अगले साल पुरूषों के अनुपात में महिलाओं की संख्या बढ़कर 952 हो गई है. वहीं पूरे राजस्थान की बात करें तो 2015 में 1 हजार पुरूषों पर महिलाओं का लिंगानुपात 929, 2016 में 938 और 2017-18 में 950 तक बढ़ गया है.

इन आकडों को देखकर तो ये साफ हो गया है कि ये जिले राष्ट्रीय पुरस्कार के हकदार है, लेकिन अब देखना यह होगा कि बाकी के जिले कैसे इन जिलो से सीख ले पाते है. क्योंकि यह योजना देश के हर जिले से लागू हो चुकी है.