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राजस्थान सरकार का नए साल का तोहफा, 10 हजार संविदाकर्मियों का बढ़ाया मानदेय

सहकारी संस्थाओं में आउटसोर्सिंग के माध्यम से व्यक्तिगत अनुबंध तथा सेवा प्रदाता ऐजेन्सी से कार्य अनुबंध पर रखे जाने वाले कार्मिकों पर यह निर्णय लागू किया गया है. 

राजस्थान सरकार का नए साल का तोहफा, 10 हजार संविदाकर्मियों का बढ़ाया मानदेय
राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (फाइल फोटो)

जयपुर (संवाददाता, आशीष चौहान): सहकारी संस्थाओं में आउटसोर्सिंग के माध्यम से नियुक्त होने वाले कार्मिकों के मानदेय में 4 हजार रुपये से 8 हजार रुपये तक की बढ़ोतरी की गई है. मानदेय बढ़ने से ऐसे कार्मिकों का आर्थिक जीवन सुगम होगा.

इससे सहकारी संस्थाओं के लगभग 10 हजार कार्मिकों को लाभ मिलेगा. सहकारी संस्थाओं में आउटसोर्सिंग के माध्यम से व्यक्तिगत अनुबंध तथा सेवा प्रदाता ऐजेन्सी से कार्य अनुबंध पर रखे जाने वाले कार्मिकों पर यह निर्णय लागू किया गया है. 

सहकारिता मंत्री उदयलाल आंजना ने बताया कि अधीनस्थ सेवा संवर्ग में 8 हजार रुपये, वरिष्ठ अधिकारी एवं अधिकारी संवर्ग में 7-7 हजार रुपये, मंत्रालयिक सेवा और वाहन चालक संवर्ग में 6-6 हजार रुपये, सहायक कर्मचारी संवर्ग में 4 हजार रुपये की मानदेय की वृद्धि की गई है. जबकि नई समितियों में मल्टी टास्क व्यवस्थापक, सैल्समैन एवं वर्कर के लिए पहली बार उचित मानदेय निर्धारित किया गया है.

रजिस्ट्रार, सहकारिता डॉ. नीरज के पवन ने बताया कि वरिष्ठ अधिकारी संवर्ग  के लिए मानदेय 25 हजार से बढ़ाकर 32 हजार रुपये, अधिकारी संवर्ग के लिये 20 हजार से बढ़ाकर 27 हजार रुपये अधीनस्थ सेवा संवर्ग के लिये मानदेय 15 हजार रुपये से बढ़ाकर 23 हजार रुपये किया गया है.

डॉ. पवन ने बताया कि इसी प्रकार मंत्रालयिक कर्मचारी संवर्ग के लिए 8 हजार रुपये से बढ़ाकर 12 हजार रुपये तथा वाहन चालक के लिये मानदेय 9 हजार रुपये से बढ़ाकर 15 हजार रुपये किया गया है. रजिस्ट्रार ने बताया कि सहकारी समितियों के व्यवसाय को बढ़ाने के लिए नई सहकारी समितियों में मल्टी टास्क व्यवस्थापक का 13 हजार रुपये, मल्टी टास्क सैल्समैन-1, मल्टी टास्क सैल्समैन-गोदाम, मल्टी टास्क वर्कर-मिनी बैंक का 12 हजार रुपये तथा मल्टी टास्क सैल्समैन-2, मल्टी टास्क सैल्समैन-पीडीएस व मल्टी टास्क वर्कर का मानदेय 10 हजार रुपये निर्धारित किया है.

यदि कार्मिक और सेवायें लेने पर सर्विस टैक्स/सर्विस चार्जेज या अन्य कोई राजकीय वैधानिक खर्च होता है तो उसका भुगतान अलग से संस्था द्वारा किया जाएगा.विभाग द्वारा जारी आदेश विभाग के प्रशासनिक नियंत्रण में आने वाली सभी सहकारी संस्थाओं पर लागू होंगे.