राजस्थान: पुलिसकर्मियों के तबादलों को लेकर MLA ने अपनी ही सरकार पर उठाए सवाल

वरिष्ठ विधायक हेमाराम ने दूसरे दिन भी सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि आज कानून व्यवस्था की जिम्मेदारी पिछली सरकार की नहीं है, उन्होंने जो किया उससे तो वो विपक्ष में चली गई. 

राजस्थान: पुलिसकर्मियों के तबादलों को लेकर MLA ने अपनी ही सरकार पर उठाए सवाल
कांग्रेस विधायक ने पुलिस तबादले पर सरकार को घेरा.

जयपुर: राजस्थान विधानसभा में शुक्रवार को पुलिस और जेल की अनुदान मांगों पर चर्चा करते हुए कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक हेमाराम ने दूसरे दिन भी सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि आज कानून व्यवस्था की जिम्मेदारी पिछली सरकार की नहीं है, उन्होंने जो किया उससे तो वो विपक्ष में चली गई. आज सरकार हमारी है और इसमें हम दूसरों पर जिम्मेदारी टाल नहीं सकते. हेमाराम ने हादसों, पुलिस हिरासत में मुआवजा, पुलिस तबादले पर सरकार को घेरा.

2 अप्रैल को दर्ज हुए मुकदमें वापस लिए जाएं
हेमाराम ने दो अप्रैल को भारत बंद के दौरान एससी एसटी के लोगों पर दर्ज किए मुकदमों को वापस लेने की मांग की. उन्होंने कहा कि कोई संविधान संशोधन की आशंका थी जिस पर विरोध दर्ज कराने जनता आई थी. वह अनजान थे पुलिस ने उनके साथ दुर्व्यवहार किया. सरकारी कर्मचारियों में भय पैदा कर दिया कि तुम्हारा भी नाम है. उन लोगों को डरा कर पुलिस वालों ने लाभ लिया. विरोध दर्ज कराने आए प्रदर्शनकारियों की 4 गाड़ियां जला दी गई वह एससी एसटी के थे. उस समय के सारे मुकदमे वापस लिए जाने चाहिए. 42 मुकदमे ही क्यों वापस लिए जा सकते हैं. सारे मुकदमे वापस लिए जाने चाहिए.

पुलिस कस्टडी में मौत पर समान मुआवजे का सुझाव
हाल ही में बाड़मेर में एक दलित युवक की पुलिस हिरासत में मौत हो गई. 2 दिन तक लाश पड़ी रही. परिजनों को 25 लाख रुपए दिए गए. उन्होंने कहा इंसान की कीमत पैसे से मत तोलो. पुलिस वालों की गलती है तो मुकदमा दर्ज करो. पुलिस कस्टडी में पहले भी मौत होती रही है उनको कितना मुआवजा दिया गया. कितनों को भूखंड दिया. इन्हें 25 नहीं 50 लाख दो लेकिन यह लोग हल्ला नहीं करते तो इन्हें नौकरी मिलती क्या. दूसरी जो पुलिस कस्टडी में मौतें हुई उनका क्या होगा. ऐसा ही एक और मामला हुआ लेकिन उस मामले में आर्थिक मदद नहीं दी गई. 

बूंदी में भी अध्यक्ष के हस्तक्षेप के बाद दिया मुआवजा
आज दिन तक पुलिस की लापरवाही पर एपीओ, सस्पेंशन से ज्यादा कुछ नहीं हुआ. अभी बूंदी में एक्सीडेंट हुआ. 24 लोग मारे गए. अध्यक्ष के हस्तक्षेप के बाद 5 लाख मुआवजा दिया गया. क्या इससे पहले एक्सीडेंट नहीं हुआ. उसमें कोई मरा नहीं. क्या पहले उसे मुआवजा दिया गया. क्या एक्सीडेंट की कोई परिभाषा होती है. लेकिन आपको सत्र चलाना था. इस मामले को शांत करना था और अध्यक्ष जी ने व्यवस्था दी तब 5 लाख रुपए दिए गए. उन्होंने कहा आर्थिक सहायता समान होनी चाहिए. वरना एक्सीडेंट या पुलिस कस्टडी में मौत होने पर लोग लाशें लेकर बैठ जाएंगे. बाद में यह राजनीतिक रूप लेने लगेंगे.

गृह जिले में क्यों नहीं हो सकता पुलिसकर्मियों का तबादला
हेमाराम ने पुलिसकर्मियों के 15 साल तक गृह जिले में तबादले पर रोक को अव्ययवहारिक बताया. उन्होंने कहा पहले पुरुष के लिए 7 और महिला पुलिसकर्मी के तबादले पर 3 साल के लिए रोक थी. भाजपा ने इसे दोनों के लिए 15-15 साल कर दिया. यह सरकारों का कौनसा तर्क है. 15 साल महिला पुलिसकर्मी दूसरे जिले से आ नहीं सकती. वो गृह जिले में क्यों नहीं आ सकते. वो क्या वहां बदमाशी करते हैं. अगर वो बदमाशी करेंगे तो दूसरे जिले में भी कर सकते हैं. बदमाशी करनी होगी तो वह 15 साल बाद में भी कर सकते हैं. पुलिस में कांस्टेबल सबसे छोटा आदमी हैं, उसकी सुनवाई नहीं होती. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि इस आधार पर तो में भी गृह जिले में काम नहीं कर पाउंगा. मुझे भी मेरी विधानसभा बदलनी चाहिए. उन्होंने कहा इसमें पहले वाले 7 ओर 3 साल वाले नियम लागू करो. इसमें तो कोई वित्तीय संसाधन भी आडे नहीं आ रहे.

शिक्षकों के तबादलों पर रोक गलत
हेमाराम ने सरकार के तबादलों पर रोक नीति को गलत बताया. उन्होंने कहा कि शिक्षकों के तबादलों की बात करो तो कहते हैं अभी रोक लगी हुई है. सरकारों के लिए भी रोक मेरी समझ में नहीं आता. एक स्कूल में एक शिक्षक है, एक में दस है, यह कैसे चलेगा. सरकारों को जहां जरूरत हो तत्काल वहां शिक्षक लगाने चाहिए. ऐसी व्यवस्था हो.

मैं कोशिश करते करते थक गया
हेमाराम ने अपने विधानसभा क्षेत्र की पीड़ा बताई. कहा गुढामालानी की एक पंचायत का थाना बाड़मेर सदर के साथ कर दिया. उसका एसडीओ, अन्य कार्यालय गुढामालानी में है और थाना बाडमेर में कर दिया. सरकार को बैठे बैठे यह क्या सूझ गया. लोगों ने कहा हमारा यह क्या करवा दिया. मैं उसके लिए कोशिश करते करते थक गया. लेकिन कोई सुनवाई नहीं होती. मैं तो कह सकता हूं, अब आप जानों.

वित्तीय संसाधन हो तो थाना खोलने की मेहरबानी कर देना
हेमाराम ने अपने विधानसभा क्षेत्र में पुलिस थाना खोलने के लिए कहा कि यहां केयर्न कंपनी आई तो बाहर के लोग काफी आ गए. इसी तादाद में अपराध भी बड़े हैं. ऐसे में यहां पुलिस थाने खोलने की जरूरत है. सरकार के पास वित्तीय संसाधन हो तो थाना खोलने की मेहरबानी कर देना.