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राजस्थान: राजनीति की भेंट चढ़ा रेलवे ओवरब्रिज, चार महीने से आवाजाही बंद

 इस पुल के शिलान्यास के कुछ ही समय बाद राजस्थान में बीजेपी की सरकार बन गई और निर्माण कार्य बीजेपी सरकार के शासनकाल में पूरा हुआ

राजस्थान: राजनीति की भेंट चढ़ा रेलवे ओवरब्रिज, चार महीने से आवाजाही बंद
पुल के निर्माण पर साढ़े 29 करोड़ से अधिक रुपए खर्च हुए थे

नरेंद्र राठौड़/चूरू: प्रदेश के चूरू जिला मुख्यालय के पास चूरू-जयपुर रोड़ पर करोड़ों की लागत से बना रेलवे ओवरब्रिज के क्षतिपूर्ति दायित्व (डिफेक्ट लायबिलिटी) खत्म होते ही अजीब स्थिति पैदा हो गई है. चार महीने से आरओबी पर यातायात बंद है. लेकिन अभी तक आरओबी के क्षतिग्रस्त होने का कोई ठोस नतीजा नहीं निकल पाया है. अधिकारियों को अब एक्सपर्ट टीम की रिपोर्ट का इंतजार है.  

अब यह पुल राजनीति का अखाड़ा बन चुका है. इस ओवर ब्रिज के निर्माण के लिए शिलान्यास कांग्रेस की पिछली सरकार में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने किया था. इस पुल के शिलान्यास के कुछ ही समय बाद राजस्थान में बीजेपी की सरकार बन गई और निर्माण कार्य बीजेपी सरकार के शासनकाल में पूरा हुआ. गौतम कंस्ट्रक्शन कंपनी ने इस पुल का निर्माण किया था. भाजपा जिला अध्यक्ष डॉ वासुदेव चावला इस पुल निर्माण में पूरी जिम्मेदारी कांग्रेस सरकार की मानते हैं और इस पुल के ठीक नहीं होने पर बड़ा आंदोलन करने की बात भी कहते हैं. 

कांग्रेस के नेता यह स्वीकार करते हैं कि इस पुल में घटिया निर्माण हुआ है. इसके लिए उस समय के अधिकारी जिम्मेदार है. गौतम कंस्ट्रक्शन कंपनी जिम्मेदार है. उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए. हालांकि अब वापस कांग्रेस की सरकार बनी है और चूरू के कांग्रेसी लोग अब वापस मुख्यमंत्री गहलोत से यह गुहार करेंगे इस पुल को शीघ्र दुरुस्त करवाया जाए. इस पुल पर भारी वाहनों के आवागमन बाधित होने से सारे वाहन अग्रसेन नगर से होकर गुजरते हैं और यहां पर अग्रसेन नगर के पास रेलवे फाटक है तो ज्यादातर समय बंद रहता है इस कारण कलेक्ट्रेट के सामने वाहनों की लंबी कतार लग जाती है.

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रियाजत खान इस पुल के घटिया निर्माण के लिए पूर्व मंत्री व वर्तमान चूरू से विधायक राजेंद्र राठौड़ को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं. रियाजत खान का कहना है कि पिछले कांग्रेस शासनकाल में इसका शिलान्यास हुआ था. उसमें यह पुल फोर लेन बनना था लेकिन भाजपा सरकार बनते ही राजेंद्र राठौड़ मंत्री बने और उन्होंने अपने कुछ चहेते लोगों के आलीशान मकान बचाने के चक्कर में पुल की चौड़ाई आधी कर दी. इसका फायदा गौतम कंस्ट्रक्शन कंपनी ने उठाया. उन्होंने इसका घटिया निर्माण कर दिया और यह पुल भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया. कांग्रेसी नेता रियासत खान ने कहा अब कांग्रेस की सरकार बनी है, इस पुल की पुरानी ड्राइंग को निकलवाया जाएगा और इसकी पूरी जांच करवाई जाएगी जिन्होंने इसमें गड़बड़ी की है उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई करवाएंगे.

सार्वजनिक निर्माण विभाग चूरू के एक्सईएन राजेश सैनी का कहना है कि इस ओवर ब्रिज का स्ट्रक्चर पूरी तरह से फेल है. उन्होंने कहा कि इसके लिए हमारी कोई जिम्मेदारी नहीं है. इसका निर्माण कार्य गौतम कंस्ट्रक्शन कंपनी ने किया और कार्यकारी एजेंसी आरयूआईडीपी थी आरयूआईडीपी के अधिकारी ही इसके लिए पूरी तरह से जिम्मेदार हैं. सार्वजनिक निर्माण विभाग मानता है कि इस पर भारी वाहन चलने से कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है. इसमें पिछले दिनों जो डैमेज हुआ था उस पर लीपापोती कर दी गई है. यह छोटे वाहनों के लिए खोला गया है लेकिन जयपुर रोड पर जो भारी वाहन आते हैं वह भी रात्रि में कई बार इस पुल पर आ जाते हैं. जो अवरुद्ध लगाए गए हैं उनसे टकरा जाते हैं इससे कई बार हादसे भी हो चुके हैं.

गौरतलब है  पुल की डिफेक्ट लायबिलिटी 21 अप्रेल 2018 को खत्म हो गई. जिसके बाद यह सार्वजनिक निर्माण विभाग को 21 अप्रैल 2018 को सुपुर्द कर गई थी लेकिन उस समय के अधिकारियों ने इसकी सही तरीके से जांच नहीं की और अपने सुपुर्द ले लिया था. जिसका खामियाजा आमजन को भुगतना पड़ रहा है. पुल के निर्माण पर साढ़े 29 करोड़ से अधिक रुपए खर्च हुए थे. बता दें कि चार माह से आरओबी पर यातायात बंद है. वहीं आरयूआईडीपी, सानिवि व जिला प्रशासन के अधिकारी आरओबी निर्माण की हकीकत को समझने में लगे हैं. लेकिन अभी तक आरओबी के क्षतिग्रस्त होने का कोई ठोस नतीजा नहीं निकल पाए हैं. माना जा रहा है कि आरओबी को सुधारने में लम्बा समय लग सकता है. ऐसे में लोगों को लम्बे समय तक परेशानी का सामना करना पड़ेगा.