राजस्थान: घट रहे हिरणों की संख्या से परेशान वन विभाग, शिकारी बने बड़ी चुनौती

पिछले कुछ दिनों से वन विभाग एवं पुलिस की इस ओर से उदासीनता के चलते शिकारियों के हौंसले भी बुलंद होते दिखाई दे रहे हैं

राजस्थान: घट रहे हिरणों की संख्या से परेशान वन विभाग, शिकारी बने बड़ी चुनौती
हिरणों की सुरक्षा को लेकर वन विभाग द्वारा कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं

जयपुर: चिंकारा हिरण के शिकार के मामले में कई बॉलीवुड सुपर स्टार अभी तक न्यायालयों के चक्कर काट रहे हैं. उन्हीं चिंकाराओं के शिकार के मामले इन दिनों सीमावर्ती जिले जैसलमेर में बढते जा रहे हैं. लेकिन वन विभाग और पुलिस अब तक शिकारियों को पकड़ने में कहीं भी कामयाब नहीं हो पा रही है. सीमावर्ती जिलें के वन क्षेत्र में इन चिंकारा हिरणों के शिकार के लिये शिकारी या तो शिकारी कुत्तों का सहारा लेते हैं या फिर खुद रात के अंधेरे में शिकार की घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं. वन विभाग और पुलिस इन मामलों में केवल मामला दर्ज कर इतिश्री करता नजर आ रहा है.

चिंकारा हिरण जो अपनी सुन्दरता की वजह से वन्यजीव प्रेमियों की प्रमुख पशुओं की श्रेणी में आता है. आजाद जंगल में अपनी लम्बी लम्बी कुंलाचों से वनक्षेत्र में दौड़ने वाला ये जीव अब जैसलमेर जिले में सुरक्षित नहीं दिखाई दे रहा है. सीमावर्ती जिले जैसलमेर के वन क्षेत्र में बडी संख्या में चिंकारा सहित हिरण की कई प्रजातियां पाई जाती है. हालांकि स्थानीय ग्रामीणों द्वारा संरक्षण किये जाने के चलते पिछले लम्बे समय में इन हिरणों की संख्या में अच्छा इजाफा हुआ है. लेकिन पिछले कुछ दिनों से वन विभाग एवं पुलिस की इस ओर से उदासीनता के चलते इन इलाकों में शिकारियों के हौंसले भी बुलंद होते दिखाई दे रहे हैं. जिसका प्रमाण शिकार की बढती घटनाएं स्वयं दे रही है.

हिरणों की सुरक्षा को लेकर वन विभाग द्वारा कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं. जिसके चलते सड़क दुर्घटनाओं में मरने वाले हिरणों की संख्या में बढ़ोतरी हो रही है. हिरण बाहुल्य क्षेत्र कहलाने वाले गांव खेतोलाई, धोलिया, ओढाणियां में हिरणों की संख्या सर्वाधिक है. राज्य पशु के खिताब से नवाजे चिंकारा को वन विभाग के अधिकारियों द्वारा किसी भी प्रकार कोई सुरक्षा नहीं दी जा रही है. वहीं दूसरी ओर कई हिरण वाहनों की चपेट में आकर घायल हो जाते हैं. कहीं पर शिकारियों द्वारा भी हिरणों को पानी पीते के समय भी गोली मारकर हत्या कर देते है. जिसके चलते के राज्य पशु की दिनों दिन संख्या कम होती हो रही है. वन विभाग के अधिकारियों व कार्मिकों द्वारा समय- समय पर सर्वे नहीं करने के कारण आवारा पशुओं द्वारा इन हिरणों को शिकार बना लिया जाता है.

रात्रि होते ही सड़क मार्ग पर अवारा पशुओं की संख्या बढ़ जाती है. रात्रि में वाहन चालकों द्वारा दी जाने वाली तेज रोशनी से हिरण एक बार से नेत्रहीन हो जाते हैं तथा तेजी से अपने ओर आने वाले वाहनों को नहीं देख पाते हैं. जिसके कारण यह हिरण वाहनों की चपेट में आकर मौत के मुंह में समा जाते है. पिछले दो माह में वाहनों की चपेट में आने से लगभग 20 से अधिक हिरणों की अकाल मौत हो गई. लेकिन अभी तक वन विभाग द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है. हिरणों को राष्ट्रीय राजमार्ग से दूर रखने के संबंध में कई बार ग्रामीणों द्वारा प्रशासन से क्षेत्र की तारबंदी करने की अपील की गई है लेकिन प्रशासन द्वारा इस संबंध में कोई कार्रवाई नहीं करने का खामियाजा आवारा मूक पशुओं को उठाना पड़ रहा है.

शिकारियों द्वारा चिंकारा को देखते ही उनके पीछे पड़ जाते है. हिरण पर अपनी टॉर्च देकर हिरण को नेत्रहीन हो जाते बाद में उनके पर गोली मार कर हत्या कर देते है. उसके बाद शिकारियों द्वारा हिरण की चमड़ी खोलकर आगे बैचने का काम करते है. ऐसी घटनाऐं हर रोज देखने को मिलती है. उसके बाद भी वन विभाग द्वारा कोई कार्रवाई करता नहीं नजर आ रहे है. 

क्यों होता है हिरण का शिकार
जैसलमेर के मरूस्थलीय वन क्षेत्र में हिरणों की विभिन्न प्रजातियां निवास करती है. हिरण चूंकि शांत स्वभाव का प्राणी होता है इसलिये इन वनक्षेत्रों के आसपास के ग्रामीण भी इन हिरणों का संरक्षण करते हैं. कई गांवों में तो हिरण गावों में घरों में अन्य पशुओं की तरह विचरण करते भी नजर आ जाते हैं. ऐसे में स्थानीय संरक्षण के चलते पिछले लम्बे समय में हिरणों की संख्या में बढोत्तरी ही हुई है. जैसलमेर के हिरण बाहुल्य क्षेत्रों में कई गांव ऐसे भी हैं जो न तो हिरण का शिकार करते हैं और न हीं किसी को करने देते हैं. ऐसे में धार्मिक मान्यताओं को आधार मानते हुए ग्रामीण इन हिरणों का संरक्षण करते हैं. स्थानीय संरक्षण के चलते बढी संख्या में जैसलमेर के वनक्षेत्र में कुलांचे मारते ये हिरण अब शिकारियों की नजरों में चढ गये हैं और संभवतः इसी कारण हिरण शिकार की घटनाएं लगातार बढती जा रही है. 

जैसलमेर में वनक्षेत्र में पाये जाने वाले हिरणों की विभिन्न प्रजातियों का शिकार उनकी खालों और उनके सुन्दर सींगों के लिये किया जाता है. काले बाजार में इन हिरणों की खाल और इनके सींगों की अच्छी कीमतें मिलने के चलते शिकारी इन मूक पशुओं की जान ले लेते हैं. देश ही नहीं वरन विदेशों तक इन हिरणों के सींगों और इनकी खाल की बहुत अच्छी डिमांड रहती है. ऐसे में मनमानी कीमतें मिलने के चलते इन हिरणों के शिकार की घटनाएं लगातार बढ़ ही रही है. खालों और सींगों के अलावा हिरण की कुछ प्रजातियां मांसांहार करने वाले लोगों की भी पहली पसंद है. ऐसे में मांसाहार के शौकीन भी इन हिरणों के लिये अच्छी कीमतें चुकाने को तैयार रहते हैं जो कि शिकारियों को शिकार के लिये प्रेरित करती है.