राजस्थान की स्टेट डिजास्टर रिस्पांस फोर्स हुई हाईटेक, जानिए कैसे

राजस्थान की स्टेट डिजास्टर रिस्पांस फोर्स केमिकल, बॉयोलॉजिकल, रेडियोलॉजिक और न्यूक्लियर हमले से उत्पन्न आपदा में बचाव की तैयारी कर रही है. 

राजस्थान की स्टेट डिजास्टर रिस्पांस फोर्स हुई हाईटेक, जानिए कैसे
फाइल फोटो

विष्णु शर्मा, जयपुर: राजस्थान की स्टेट डिजास्टर रिस्पांस फोर्स (State Disaster Response Force) केमिकल, बॉयोलॉजिकल, रेडियोलॉजिक और न्यूक्लियर हमले से उत्पन्न आपदा में बचाव की तैयारी कर रही है. एनडीआरएफ की तर्ज पर एसडीआरएफ सीबीआरएन टीम गठित की जाएगी. इसके लिए एसडीआरएफ के 165 कार्मिकों को ट्रेनिंग कराई जा चुकी है. अब सीबीआरएन से संबंधित उपकरण खरीदे जा रहे हैं. 

राजस्थान में आपदाओं से बचाव के लिए स्टेट डिजास्टर रिस्पांस फोर्स अर्थात एसडीआरएफ का गठन किया गया है. वर्तमान में एसडीआरएफ के पास बाढ़, आग सहित अन्य प्राकृतिक आपदाओं में राहत कार्य कर रही है, लेकिन एसडीआरएफ के पास CBRN आर्थात केमिकल, बायोलॉजिकल, रेडियोलॉजिकल और न्यूक्लियर से संबंधित उपकरण उपलब्ध नहीं है. यह तो तब है जब एनडीआरएफ की तर्ज पर एसडीआरएफ सीबीआरएन टीम का गठन किया जाना प्रस्तावित है.

मुख्य सचिव की अध्यक्षता में 1 अक्टूबर 2019 को राज्य कार्यकारी समिति की बैठक हुई. बैठक में एसडीआरएफ के लिए नए उपकरणों की खरीद के लिए प्रस्ताव भिजवाने के निर्देश दिए गए. 26 करोड़ रुपए के प्रस्ताव में कुछ उपकरण पुलिस आधुनिकीकरण योजना में बजट स्वीकृत हो चुका है, खरीद प्रक्रिया जारी है. एसडीआरएफ में सीबीआरएन से होने वाली अपदाओं से निपटने के लिए एक टीम गठित किया जाना है.15 करोड़ 3 लाख 67 हजार रुपए का अतिरिक्त बजट प्रावधान मांगा गया है. पुलिस मुख्यालय से एसीएस गृह को प्रस्ताव भिजवाए गए हैं.

एसडीआरएफ में सीबीआरएन उपकरणों के अलावा अन्य जरूरत के संसाधन जुटाने की तैयारी कर रही है. इन उपकरणों में मकान क्षतिग्रस्त होने पर मलबे में दबे होने या पानी में बह गए लोगों के बचाव के काम आने वाले उपकरणों की खरीद की जाएगी.

प्रमुख उपकरण और उन पर संभावित खर्च की बात करें तो गैस की पहचान के लिए 8 मल्टी गैसे डिटेक्टर जिसकी कीमत 16 लाख रूपये है. बीटा-गामा एक्सरे किरणों की पहचान के लिए 3 टेलेक्टर जिसकी कीमत 1 लाख 95 हजार रूपये है. एसडीआरएफ में 2 एयर लिफ्टिंग बैग्स सेट जिसकी कीमत 20 लाख रूपये है. लकड़ी, स्टील, कंक्रीट के उपकरणों को काटने के लिए 4 सर्कुलर सॉ इलेक्ट्रिकल जिसकी कीमत 6 लाख रूपये है. लोहे को काटने के लिए 4 बुलेट चैन सॉ कीमत 7.60 लाख रूपये है.

वहीं किसी भी बंद क्षेत्र से किसी भी उड़ने वाली धूल / स्मोक से बचाव के लिए 8 स्मोक वेंटीलेटर एंड फेयर ट्यूब् जिसकी कीमत 40 लाख रूपये है. दीवार और रस्से से बचाव के लिए 4 कम अलाेंग सिस्टम जिसकी कीमत 18 लाख रूपये है. जिंदा पीड़ितों की तलाश के लिए 4 लाइफ डिटेक्टर जिसकी कीमत एक करोड़ 22 लाख रूपये है. अलग-अलग दिशा में कोई भी वजन उठाने के लिए 4 रमसेट फुट पम्प सहित जिसकी कीमत 12 लाख रूपये है.

वहीं क्षतिग्रस्त स्ट्रक्चर में फंसे व्यक्ति को ढूंढ़ने के लिए विक्टिम लोकेशन इक्युपमेंट एंड ब्रींचिंग सिस्टम जिसकी कीमत एक करोड़ 60 लाख रूपये है. बचाव राहत के समय फोटो-वीडियोग्राफी के लिए 8 एचडी वीडियो कैमरा जिसकी कीमत आठ लाख रूपये है. किसी भी आपदा में मशीन के साथ लोहे की रस्सी के लिए 8 मल्टी केबल विंच जिसकी कीमत 7 लाख 50 हजार रूपये है.

वहीं उंची जगह पर पहुंचने के लिए 8 टेलीस्कॉपिक लेडर जिसकी कीमत 4 लाख 80 हजार रूपये है. लोहे को काटने, ताला तोड़ने के लिए 2 टैक्टीकल ब्रीचिंग सिस्टम जिसकी कीमत 30 लाख रूपये है. कंक्रीट काटने के उपकरण के लिए 4 डायमंड चैन सॉ जिसकी कीमत 23 लाख 20 हजार रूपये है. एरिया सर्चिंग के लिए 8 ड्रोन कैमरा जिसकी कीमत 24 लाख रूपये है. पानी के नीचे से शव बरामद करने के लिए 6 पर्सनल डाइविंग किट जिसकी कीमत 20 लाख 40 हजार रूपये है. इसके अलावा जल बचाव, सांप पकड़ने सहित अन्य आपदाओं में बचाव के उपकरणों की खरीद की जाएगी.