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राजस्थान में गोल्ड इंडस्ट्री की मांग, 'टैक्स दरें रिजनेबल रखे सरकार'

केंद्रीय वित्त मंत्रालय के फैसले के बाद जगी आस, सोने के आयात शुल्क में 3 फीसदी IGST हुई कम

राजस्थान में गोल्ड इंडस्ट्री की मांग, 'टैक्स दरें रिजनेबल रखे सरकार'
गोल्ड नीति और टैक्स दरें रीजनेबल रखने की मांग

अंकित तिवाड़ी/जयपुर: जयपुर की ज्वैलरी देश ही नहीं विश्व में अपना अहम स्थान रखती है. यह इंडस्ट्री तीन लाख लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रुप से रोजगार दे रही है जो अब सरकारी मदद की मांग कर रही है. इसमें सबसे अहम गोल्ड नीति और टैक्स दरें रीजनेबल रखने की मांग की जा रही है. नोटबंदी और जीएसटी के बाद ज्वैर्ल्स के कारोबार पर असर आया है जिसके बाद से इंडस्ट्री केंद्रीय वित्त मंत्रालय पर लगातार आयात शुल्क में राहत की मांग कर रही थी. 

सोना तस्करी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने के बाद केंद्र सरकार ने सोने पर तीन फीसदी की राहत दी है. लेकिन अब ज्वैलर्स की मांग रंगीन रत्नों पर भी कर दर कम करने की हैं. वहीं जयपुर के जवाहरात उद्योग को भी नई सरकार से बेहद उम्मीदें हैं. खासकर जैम बुर्श, कौशल केंद्र और सुरक्षा की मांग गहलोत सरकार से ज्वैलर्स कर रहे हैं.

चुनावी सीजन में अब केंद्रीय वित्त मंत्रालय जीएसटी दरों के साथ बड़े सेक्टर्स की फाइलों की धूल हटा रहा है. उनकी मांगों पर अब तक प्रभावी सुनवाई नहीं करने वाले मंत्रालय में राहत देने की फाइलें तेजी से मूवमेंट दर्शा रही है. आईजीएसटी में तीन फीसदी की राहत गोल्ड कारोबारियों और निर्यातकों के लिए संजीवनी हैं लेकिन अब इनकी मांग हैं कि रंगीन रत्न को भी इस दायरे में लाया जाए.

जयपुर के उद्वमियों का कहना हैं कि जेम बुर्श इन हालातों में बेहद आवश्कक है. वहीं अब केंद्र सरकार स्वर्ण उद्योग और ज्वैलरी के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए नई गोल्ड नीति तैयार करने पर काम कर रही है. इसके जल्दी ही जारी होने की उम्मीद है. नीति में सोने से जुड़े सभी पहलुओं पर गौर किया जाएगा. इसमें सोने पर आयात शुल्क में कटौती की मांग भी शामिल है. घरेलू उद्योग सोने पर आयात शुल्क को घटाकर 4% करने की मांग कर रहा है. वहीं नई नीति में घरेलू स्वर्ण उद्योग और जेम्स एंड ज्वैलरी के निर्यात को बढ़ावा देने पर फोकस होगा. कुल वस्तु निर्यात में इस सेक्टर की करीब 15% हिस्सेदारी है. 

राजस्थान के जेम्स ज्वेलरी, मीनाकारी, जयपुरी रजाई, कालीन, हेण्डीक्राफ्ट, मूर्तिकला सहित कई उद्योगों की दुनिया में पहचान है, लेकिन सरकारी नीतियों के कारण पनप नहीं पा रहे हैं।. इनमें से जेम्स ज्वेलरी कारोबारी केन्द्र सरकार की नीति के कारण पहले प्रभावित रहा. इसी तरह अधिकारियों की गलती से जयपुरी रजाई, मूर्तिकला सहित कारोबार जीएसटी की मार का शिकार हुए. प्रदेश की मार्बल, कोटा स्टोन, करौली स्टोन और धौलपुर स्टोन के लिए भी पहचान है, लेकिन उसके लिए भी टैक्स और सुविधाओं को लेकर परेशानी रही है.

जबकि चाइना की कंपनियों से जयपुर को टफ कंपिटिशन मिल रहा हैं. घरेलू ऑर्डर के साथ उनके अंतराष्ट्रीय मांग पर भी चीनी उत्पादों ने असर डाला है. ज्वैलर्स का कहना हैं कि नीति को सुगम होनी ही चाहिए टैक्स दरें भी अंतरार्ष्टीय बाजार को ध्यान में रखकर तय होनी चाहिए. इंटरनेशनल सर्वे एजेंसी मेटल फोकस के अनुसार भारत में ऊंची अआयात शुल्क दरों से बचने के लिए सोने की स्मगलिंग का जोर है. एजेंसी के अनुसार तीन साल में भारत में 580 टन सोने की वैध अथवा अवैध तरीके की स्मगलिंग की गई जिसका मूल्य लगभग 1.65 लाख करोड़ रुपए आंका गया है.

जयपुर की ज्वैलरी फर्मों में पिछले कुछ समय में निर्यात ऑर्डर घटने पर बीस फीसदी नौकरियों में कटौती हुई है. वहीं चारदीवारी क्षेत्र में रंगीन रत्नों की घिसाई करने वालों के पास भी काम कम हुआ है. ज्वैलरी सेक्टर को अब केंद्र से नीति निर्माण औश्र कर दरें कम करने और राज्य सरका रसे जैम बुर्श बनाने की उम्मीद है. प्रदेश में आई नई सरकार की प्राथमिकमा में किसान और युवा के साथ उद्योग भी है. माना जा रहा हैं अशोक गहलोत सरकार ज्वैलर्स के लिए कोई बड़ी घोषणा शीघ्र कर सकती है.