श्रीगंगानगर: एक चिकित्सक के सहारे चल रहा ट्रामा सेंटर

श्रीगंगानगर के राजकीय चिकित्सालय में बना ट्रामा सेंटर चिकित्सकों और संसाधनों के अभाव के चलते सिर्फ एक रैफर सेंटर बन कर रह गया है.

श्रीगंगानगर: एक चिकित्सक के सहारे चल रहा ट्रामा सेंटर
श्रीगंगानगर के राजकीय चिकित्सालय में बना ट्रामा सेंटर

श्रीगंगानगर: जिले के राजकीय चिकित्सालय में बना ट्रामा सेंटर चिकित्सकों और संसाधनों के अभाव के चलते सिर्फ एक रैफर सेंटर बन कर रह गया है. श्रेत्र के सैकड़ों गावों के लोगों को स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करवाने वाला यह चिकित्सालय चिकित्सकों के अभाव में दम तोड़ रहा है.

सूरतगढ़ का ट्रामा सेंटर आज मरीजों के अभाव में सूना पड़ा है. महिला एवं पुरूष वार्ड खाली पड़े हैं. इसकी एक मात्र वजह चिकित्सकों का अभाव होना है. वहीं कुछ चिकित्सकों को अन्यत्र स्थान पर पदस्थापित कर दिया गया है. दो करोड़ की लागत से शुरू हुए ट्रोमा सेंटर नेशनल हाईवे पर होने वाली सड़क दुर्घटनाओं में घायलों को त्वरित उपचार देने के लिए शुरू किया गया था. चिकित्सालय में डाॅक्टरों की कमी के चलते अनेक घायलों को दूसरे अस्पतालों में रैफर किया जा रहा है.

सूरतगढ़ का यह ट्रामा सेंटर महज एक चिकित्सक के सहारे सभी को स्वास्थ्य लाभ देने के सरकारी दावों की खानापूर्ति कर रहा है. वास्तव में चिकित्सकों के कमरों में कुर्सियां और महिला-पुरूष वार्डों के बैड खाली पड़े हैं. दो करोड़ की लागत से शुरू हुए ट्रामा सेंटर में घायलों का जीवन बचाने के लिए  4 चिकित्सकों सहित 12 कर्मचारियों का स्टाॅफ लगया गया था, जिन्हें अब यहां से हटाकर मूल स्थान पर भेज दिया गया है. ट्रामा सेंटर  प्रभारी को भी अपने मूल स्थान पर भेजा जा चुका है. प्रभारी के पास भी चिकित्सकों की कमी का रोना रोने के अलावा और कोई जवाब नहीं है.

चिकित्सकों के अभाव और ट्रामा सेंटर सूरतगढ़ शहर के अलावा नेशनल हाईवे 62 तथा फोरलेन पर पड़ने वाले राजियासर, थर्मल, पीलीबंगा, आर्मी केन्ट तथा एयरफोस रोड़ पर दुर्घटनाओं के घायलों को समय पर उपचार नहीं मिल पा रहा और त्वरित उपचार के अभाव में घायलों और गंभीर रूप से बीमार दम तोड़ देते हैं.