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उदयपुर: राजकीय महाराणा भूपाल अस्पताल के 2 डॉक्टर्स पर फ्रॉड का मामला दर्ज, जांच में जुटी ACB

एसीबी अधिकारियों ने इस पूरे प्रकरण को लेकर होस्पीटल प्रबंधंन से जवाब मांगा है. मामले की गंभीरता को देखते हुए अधिक्षक डॉ. लाखन पोसवाल ने होस्पीटल के तीन विभागाध्यक्ष की एक टीम बनाई. 

उदयपुर: राजकीय महाराणा भूपाल अस्पताल के 2 डॉक्टर्स पर फ्रॉड का मामला दर्ज, जांच में जुटी ACB
फाइल फोटो

उदयपुर: आम तौर पर डॉक्टर्स को धरती के भगवान के रूप में देखा जाता है लेकिन धरती का यह भगवान जब अपने रूप को बदलता है तो किसी की जिन्दगी ही तबाह हो सकती है. कुछ ऐसा ही मामला सामने आया है उदयपुर संभाग के सबसे बड़े राजकीय महाराणा भूपाल चिकित्सालय में. ममता नाम की एक महिला ने होस्पीटल के पूर्व अधिक्ष डॉ. तरुण गुप्ता और मेडिकल ज्यूरिस्ट डॉ. राहुल जैन पर अपने पद का दुरूपयोग करने को आरोप लगाते हुए अपने पति बाबूलाल के परमानेंट डिसेबिलिटी के दौर अलग अलग प्रमाण पत्र जारी करने का आरोप लगया है. 

पीड़िता ने एसीबी में दोनों ही डॉक्टर्स के खिलाफ शिकायत कर न्याय दिलाने की गुहार लगाई है. दरअसल, ममता का अपने पति बाबूलाल निमावत के साथ लम्बे सयम से विवाद चल रहा था और वह अपनी बेटी के साथ पति से अलग अपने पीहर में रह रही थी. इस दौरान उसने न्यायल में अपने भरण पोषण के लिए अर्जी लगाई. इस पर न्यायालय ने ममता के पक्ष में फैसला सुनाते हुए बाबूलाल को 3 हाजर रूपए ममता को भरण पोषण के रूप में देने का आदेश सुनाया. 

हालांकि, कोर्ट के इस आदेश के बाद बाबूलाल का एक्सिडेंट हो गया और लम्बा इलाज भी चला. इसी की आड़ में भरण पोषण की राशि देने से बचने के लिए शुरू हुआ बाबूलाल के परमानेंट डिसेबिलिटी फर्जी प्रमाण पत्र बनाने का पुरा खेल. जिसमें वह सफल भी हो गया और अपने लिए उसने 80 प्रतिशत परमानेंट डिसेबिलिटी का प्रमाणपत्र भी प्राप्त कर लिया लेकिन आखिर उसका यह खेल सबके सामने आ ही गया. 

धरती के भगवान द्धारा किए धोखे का शिकार हुई ममता ने अपने हक की लडाई के लिए हिम्मत जुटा मामले की शिकायत एसीबी के अधिकारियों से की. जिसमें ममता ने दोनों ही डॉक्टर्स पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं. एसीबी अधिकारियों ने इस पूरे प्रकरण को लेकर होस्पीटल प्रबंधंन से जवाब मांगा है. मामले की गंभीरता को देखते हुए अधिक्षक डॉ. लाखन पोसवाल ने होस्पीटल के तीन विभागाध्यक्ष की एक टीम बनाई. जिसमें डॉ. योगेश शर्मा, एके मेहरा और डॉ. आरएल सुमन को शामिल किया गया. 

बताया जा रहा है कि तीनों ही डॉक्टर्स ने मामले से जुड़े तमाम पहलुओं पर जांच कर अपनी रिपोर्ट तैयार कर होस्पीटल प्रबंधन को दे दी है. जिसे एसीबी ऑफिस भेज दिया गया है. हालांकि, इस पूरे मामले पर खुद पीड़िता ममता और होस्पीटल प्रबंधंन से जुडे डॉक्टर्स कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है. वहीं एसीबी के अधिकारी मामले के अंडर इनक्वायरी में होने की बात बोल कर कुछ भी कहने से बच रह हैं लेकिन होस्पीटल के दो सीनियर डॉक्टर्स की इस हरकत ने धरती के भगवान कहे जाने वाले डॉक्टर्स को फिर से कठगरे में खड़ा कर दिया है. ऐसे में अब देखना होगा कि इस तरह के आरोपियों के खिलाफ एसीबी किस तरह से कार्रवाई करती है.