मेवाड़ के इकबाल ने अयोध्या के राम मंदिर के लिए बनाई सोने की सबसे सूक्ष्म खड़ाऊं, बने मिसाल

उदयपुर के रिकॉर्ड धारी सूक्ष्म शिल्प कार इकबाद सक्का ने सांप्रदायिक सौहार्द्र का अनूठा परिचय देते हुए राम मंदिर के लिए अपने सूक्ष्म कला से तीन स्वर्ण कृतियों का निर्माण किया है, जिसे वे अयोध्या में बनने वाले राम मंदर के लिए भेट करना चाहते हैं. 

मेवाड़ के इकबाल ने अयोध्या के राम मंदिर के लिए बनाई सोने की सबसे सूक्ष्म खड़ाऊं, बने मिसाल
इकबाल सक्का की ओर से बनाई गई इन तीनों सूक्ष्म कलाकृतियों को खुली आंखों से नहीं देखा जा सकता है.

अविनाश जगनावत, उदयपुर: अपनी सूक्ष्म शिल्पकाल के दम पर कई रिकॉर्ड बना चुके उदयपुर के सूक्ष्म शिल्पकार इकबाल सक्का ने इस बार फिर अपनी सूक्ष्म कलाकृतियों से सांप्रदायिक सौहार्द्र का अनूठा परिचय दिया है. सक्का ने अयोध्या में बनने वाले राम मंदिर के लिए सोने की ईंट, घंटा और दो खड़ाऊं बनाई हैं, जिसे वे अब अयोध्या भेजना चाह रहे हैं.

राम मंदिर विवाद को लेकर सुप्रीम कोर्ट की ओर दिए गए फैसले को सभी धर्म के लोगों ने सहज भाव से स्वीकार कर न्यायालय के निर्णय का सम्मान किया. कोर्ट के फैसले के बाद अयोध्या में राम मंदिर बनने का मार्ग भी प्रशस्त हो गया है. इसी को लेकर उदयपुर के रिकॉर्ड धारी सूक्ष्म शिल्प कार इकबाद सक्का ने सांप्रदायिक सौहार्द्र का अनूठा परिचय देते हुए राम मंदिर के लिए अपने सूक्ष्म कला से तीन स्वर्ण कृतियों का निर्माण किया है, जिसे वे अयोध्या में बनने वाले राम मंदर के लिए भेट करना चाहते हैं. सक्का ने 5 गुणा 3 मिलीमीटर आकार की राम नाम अंकित एक स्वर्ण की ईंट बनाई है. साथ ही मंदिर के लिए 5 मिलीमीटर लंबा घंटा और राम लला के लिए 3 गुणा 2 मिलीमीटर आकार की दो खड़ाऊं बनाई हैं. इन सभी सूक्ष्म कलाकृतियों का वजन महज 200 मिलीग्राम है.

इकबाल सक्का की ओर से बनाई गई इन तीनों सूक्ष्म कलाकृतियों को खुली आंखों से नहीं देखा जा सकता है. इनको देखने के लिए लेंस का इस्तेमाल करना पड़ता है. सक्का ने इन तीनों सूक्ष्म कलाकृतियों को राम मंदिर में स्थान मिले, इसके लिए पीएम नरेंद्र मोदी को एक पत्र भी लिखा है. साथ ही सक्का ने दावा किया है कि ये तीनों कृतियां विश्व की सबसे छोटी सोने की ईंट, खड़ाऊं और घंटा है. यही नहीं सक्का ने कहा कि अगर भविष्य में अयोध्या में मस्जिद भी बनती है तो इसके लिए भी उन्होंने अल्लाह लिखी, वझु का लौठा और जानमाज भी बनाई है.

बहरहाल देश में राजनैतिक पार्टियां वोट बैंक की राजनीति के लिए सांप्रदायिकता के नाम धर्म के आधार पर लोगों को बाटने का काम करती हो लेकिन समय समय पर देश के लोग अपनी कला के दम पर अनूठी पहल कर सांप्रदायिक सौहार्द्र की अनूठी मिसाल पेश कर देश को एकता के सूत्र में बांधने का संदेश देते हैं. ऐसे में कहा जा रहा है कि मेवाड़ के इस सूक्ष्म शिल्पकार की ये कृतियां अयोध्या में बनने वाले राम मंदिर की शोभा बढ़ाने में काम में ली जाएं.