Udaipur: सुभाष चन्द्र बोस की जयंती पर आयोजित हुआ मेवाड़ टॉक फेस्ट
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Udaipur: सुभाष चन्द्र बोस की जयंती पर आयोजित हुआ मेवाड़ टॉक फेस्ट

उदयपुर में सुभाष चन्द्र बोस की जयंती पर मेवाड़ टॉक फेस्ट आयोजित हुआ.युवाओं ने भी कई महत्वपूर्ण सवाल पूछ कर अपनी जिज्ञासा को शान्त किया.

Udaipur: सुभाष चन्द्र बोस की जयंती पर आयोजित हुआ मेवाड़ टॉक फेस्ट

Udaipur: उदयपुर में नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की जयंती के मौके पर पहली बार मेवाड टॉक फेस्ट का आयोजन किया गया. सीटीएई सभागार में आयोजित हुए इस टॉक फेस्ट में जाने माने इतिहास कारों ने बोस की जीवनी के बारे में महत्पूर्ण जानकारियां दी. तो वहीं युवाओं ने भी कई महत्वपूर्ण सवाल पूछ कर अपनी जिज्ञासा को शान्त किया.

नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की जीवन के बारे में युवाओं को जागरूक करने और उनकी जिज्ञासा को शान्त करने के लिए आयोजित हुए मेवाड़ा टॉक फेस्ट में कुल चार सत्रों का आयोजन किया गया. पराक्रमी भारत थीम पर आयोजित हुए इस फेस्ट में जानमाने इतिहास कारों ने अपने विचारों का रखा.

फस्ट को संबोधित करते हुए प्रो बीपी शर्मा ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में मेवाड़ के अक्षुण्ण योगदान का स्मरण करते हुए कहा कि नेताजी सुभाष के प्रभाव में ही ब्रिटिश-भारतीय सशस्त्र बलों के भारतीय सैनिकों ने अंग्रेजों के विरुद्ध संग्राम छेड़ दिया था. इससे पूर्व 1928 में नेताजी ने ही सर्वप्रथम कांग्रेस अधिवेशन में पूर्ण स्वराज की मांग रखी थी. 

अंग्रेजों को चुनौती देते हुए नेताजी ने अखंड भारत की स्वाधीन सरकार का गठन किया. आजाद हिंद फौज व सुभाष के पराक्रम के चलते अंग्रेजों को भारत छोड़ना पड़ा. देव ऋण, ऋषि ऋण व पितृ ऋण की भांति प्रत्येक भारतीय पर सुभाष ऋण भी है. सुभाष के सपनों के भारत की बात की जाए तो उसमें राष्ट्र को आर्थिक, सामरिक, तकनीकी व सामाजिक रूप से संबल बनना होगा.

आईआईएमसी की प्रोफेसर संगीता प्रणवेंद्र ने अपने वक्तव्य में कहा कि नेताजी सुभाष कुशल लेखक, पत्रकार एवं विवेचक थे. नेताजी का पत्रकारिता के प्रति रुचि एवं प्रेम भी दिखाई देता है. छद्म नाम से सुभाष फॉरवर्ड ब्लॉक में संपादकीय भी लिखते रहे. भारतीय युवाओं में आजादी की लौ प्रज्वलन करने में आजाद हिंद रेडियो की भी मुख्य भूमिका रही है. आजाद हिन्द रेडियो के विरुद्ध बीबीसी को ईस्टर्न सर्विस सेंटर शुरू करना पड़ा.

फेस्ट के दौरान नेताजी के जीवन पर डॉक्यूमेंट्री का प्रदर्शन किया गया. डॉक्यूमेंट्री प्रदर्शन के बाद युवाओं ने समीक्षात्मक विचार रखें. युवाओं के विचार विशेष रूप से सुभाष की रहस्यमई मृत्यु के संबंध में थे.युवाओं ने अपने विचारों से विभिन्न भारतीय सरकारों की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए.

फेस्ट में सैंकड़ो युवाओ ने उत्साह से भाग लिया. नेताजी सुभाषचंद्र बोस की प्रतिमा के साथ युवाओं में सेल्फी लेने की उत्सुकता दिखाई दी. नेताजी सुभाष के जीवन पर आधारित पुस्तकों का स्टाल लगाया गया, जहां युवाओ ने खुब रूचि दिखाई. सतीश अग्रवाल, सुनील खटीक व सरोज कुमार ने नेताजी पर आधारित पुस्तकों का परिचय भी प्रस्तुत किया.

आयोजक विकास छाजेड ने बताया कि इस तरह के फेस्ट के आयोजन करने का मुख्य उद्धेश्य ही सुभाष के जवीन को आम जन तक पहुंचाना है. उन्होने कहा कि आगे भी इस तरह के फेस्ट का आयोजन किया जाएगा. जिससे देश के वीर योद्धाओं और गौरव पूर्ण इतिहास के बारे में युवाओं को रूबरू कराया जा सकें.

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