राजस्थान का एक ऐसा शहर, जहां महिलाओं पर रंग डालने पर पड़ते हैं कोड़े

भगवान के होली खेलने के बाद परंपरानुसार भाभी और देवरों ने करीब पौन घंटे तक कोड़ामार होली खेली गई. 

राजस्थान का एक ऐसा शहर, जहां महिलाओं पर रंग डालने पर पड़ते हैं कोड़े
यहां भाभी होली के दौरानअपने देवर पर कोड़े बरसाती है.

ओंकार शर्मा, अजमेर: धार्मिक नगरी के नाम से जाना जाने वाला शहर ब्यावर में परंपराओं के नाम पर कई तरह के तीज-त्यौहार मनाए जाते है. इन्हीं तीज-त्यौहारों व पर्वो में शामिल है धुलंडी के दूसरे दिन खेली जाने वाली जीनगर समाज की कोड़ामार होली. इस कोड़ामार होली के दौरान भाभियों ने देवरों की पीठ पर कोड़े बरसाए तो देवरों ने भी परंपरानुसार भाभियों पर रंग डाला. 

कोड़ामार होली के पूर्व शुक्रवार दोपहर साढे बारह बजे चार भुजानाथ मंदिर से शोभायात्रा निकाली गई. जो मेन बाजार से होते हुए मंगल मार्केट के सामने पहुंची. इसके बाद जीनगर समाज के पदाधिकारियों द्वारा ठाकुरजी को कड़ाहों में स्नान करवाया गया. भगवान के होली खेलने के बाद परंपरानुसार भाभी और देवरों ने करीब पौन घंटे तक कोड़ामार होली खेली गई. 

कोड़ामार होली की परंपरा डेढ़ सौ साल पुरानी
ब्यावर में खेली जाने वाली कोड़ामार होली की परंपरा डेढ़ सौ साल पुरानी है. समाज द्वारा मुख्य बाजार में विभिन्न साइज के 9 बड़े कड़ाहों में पानी भरकर उनमें रंग घोला जाता है. ठाकुरजी को कड़ाहों में स्नान करवाकर उन्हें होली खिलाई जाती है. 

माना जाता है अटूट स्नेह का प्रतीक
देवरों पर बरसाया जाने वाला कोड़ा होली के चार दिन पहले लहरिया रंग के सूती कपडे से तैयार किया जाता है. उसे बट देकर दो दिन तक भिगोया जाता है. भाभियां देवरों पर कोड़े बरसाती है तो देवर उन पर रंग डालते है. जब देवरों द्वारा रंग डाला जाता है तो बचाव के लिये भाभियां उन पर कोडे बरसाती है जो उनके अटूट स्नेह का प्रतीक माना जाता है. 

अतिप्राचीन है ये परंपरा
समाज की महिलाओं का कहना है कि ये परंपरा अतिप्राचीन है. यही कारण है कि आज भी ब्यावर में अच्छे स्तर पर कोड़ामार होली का आयोजन किया जा रहा है. देवरों द्वारा भाभियों पर फेका गया रंग और बदले में मिलने वाले प्यार के कोड़े खाने के लिए सभी पुरुष इस होली में भाग लेते है. विभिन्न 9 कड़ाहों में भरा गया रंग खत्म होने के बाद ही होली का समापन किया जाता है और उसके पश्चात पुन: शोभायात्रा के साथ भगवान चारभुजा नाथजी को मंदिर तक विदाई दी जाती है.