रतनगढ़ में दूल्हा-दुल्हन ने लिए आठ फेरे, जानिए आखिर क्यों पड़ी जरूरत?

इस नव वर-वधू ने शादी का आठवां फेरा लेकर पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी ली है. 

रतनगढ़ में दूल्हा-दुल्हन ने लिए आठ फेरे, जानिए आखिर क्यों पड़ी जरूरत?
यह फेरा पृथ्वी और प्रकृति को बचाने, पर्यावरण सुरक्षा के संदेश के लिए था.

नारेंद्र राठौड़, रतनगढ़: अमूमन नव दांपत्य जीवन की शुरुआत के लिए वैवाहिक कार्यक्रम में वर-वधू सात फेरे लेते हैं, लेकिन बीरमसर गांव में अलग ही नजारा देखने को मिला. यहां एक ऐसी शादी के लोग साक्षी बने, जहां वर-वधू ने सात फेरे के बाद आठवां फेरा लिया. यह फेरा पृथ्वी और प्रकृति को बचाने, पर्यावरण सुरक्षा के संदेश के लिए था.

तहसील के गांव बीरमसर में एक नव दंपत्ति ने आठ फेरे की शादी कर एक मिसाल पेश की है. इस नव वर-वधू ने शादी का आठवां फेरा लेकर पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी ली है. इस अनोखी शादी में लड़की पक्ष ने शादी की रस्मों में पौधों को और पर्यावरण संरक्षण को मुख्यता दी. इस शादी में आए बारातियों को भी पौधे सौंपकर विदाई दी गई तथा पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लिया गया. इससे पहले वर-वधू दोनों ने एक-दूसरे को वरमाला डालने के बाद पौधे भी भेंट कर समाज को पर्यावरण बचाने का संदेश दिया. 

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प्राप्त जानकारी अनुसार, बीरमसर निवासी चेतन सैनी की पुत्री डिंपल की शादी चूरू निवासी जगदीश सैनी के पुत्र मुकेश सैनी के साथ हुई. मंच पर वर-वधू ने एक-दूसरे को वरमाला पहनाने के साथ ही एक-दूसरे को पौधे भेंट कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया.

समर्पण संस्थान के अध्यक्ष विरेन्द्र सैन ने बताया कि चूरू जिले में लगातार पिछले पांच साल से संस्थान ने क्षेत्र में पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए ऐसे बहुत से कार्य कर रही हैं और आगे भी करते रहेंगे.