जैसलमेर: ओरण भूमि को लेकर ग्रामीणों ने शुरू की परिक्रमा, बताई यह बड़ी वजह...

ग्रामीणों का कहना है कि लगभग 610 वर्ष पुरानी इस ओरण क्षेत्र को लगातार पिछले कई समय से निजी कंपनियों को आंवटित किया जा रहा है, जिससे यहां के पेड़-पौधे कट रहे हैं.

जैसलमेर: ओरण भूमि को लेकर ग्रामीणों ने शुरू की परिक्रमा, बताई यह बड़ी वजह...
भूमाफियाओं द्वारा हो रहे अतिक्रमण के कारण भी ओरण भूमि लगातार घट रही है.

मनीष रामदेव/जैसलमेर: राजस्थान के जैसलमेर के देगराय मंदिर ओरण क्षेत्र में निजी कंपनियों को आंवटित की जा रही है, जिससे ओरण भूमि लगातार कम हो रही है. लगातार सिंकुड़ती इस ओरण भूमि को बचाने के लिए आसपास के क्षेत्रों के ग्रामीणों और पर्यावरण प्रेमियों द्वारा शनिवार को 55 किलोमीटर ओरण क्षेत्र की दो दिवसीय परिक्रमा शुरू की गई है.

ग्रामीणों का कहना है कि लगभग 610 वर्ष पुरानी इस ओरण क्षेत्र को लगातार पिछले कई समय से निजी कंपनियों को आंवटित किया जा रहा है, जिससे यहां के पेड़-पौधे कट रहे हैं. साथ ही ओरण क्षेत्र की लगभग 36 हजार बीघा जमीन को राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज कराने के लिए यह यात्रा शुरू की गई है ताकि सरकार का इस ओर ध्यान जाए और इस पवित्र और प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर ओरण भूमि को बचाया जा सके.
 
गौरतलब है कि जैसलमेर मे देगराय ओरण भूमि के अलावा कई अन्य ओरण भूमि पर पिछले लंबे समय से कई निजी सोलर एवं विंड कंपनियों सहित अन्य कंपनियों को आंवटित की जा रही है. साथ ही भूमाफियाओं द्वारा यहां अतिक्रमण भी किया जा रहा है, जिससे ओरण भूमि लगातार घट रही है, जिससे यहां निवास करने वाले पशु-पक्षियों सहित अन्य पालतू जानवरों के विचरण एवं चारागाह नष्ट हो रहे हैं.

ग्रामीणों का कहना है कि इस ओरण भूमि को जैसलमेर रियासत के तत्कालीन महारावल द्वारा ओरण घोषित किया गया था ओर ताम्रपत्र जारी किया गया था, जो अभी भी मौजूद है. लेकिन इसके बावजूद भी राज्य सरकार और राजस्व विभाग द्वारा इस ओरण को कंपनियों को आंवटित किया जा रहा है जो कि गलत है.