राजस्थान के युवा इंजीनियर ने नौकरी छोड़ शुरू की जैविक खेती

युवा उमेश नागर ने वैसे तो मेकेनिकल ब्रांच में इंजीनियरिंग की डिग्री ली है. पर नौकरी में उनका मन नहीं लगता था और वे खुद का कोई कारोबार शुरू करना चाहते थे. 

राजस्थान के युवा इंजीनियर ने नौकरी छोड़ शुरू की जैविक खेती
उनकी सलाह पर सैकड़ों किसान भी रसायन छोड़ जैविक खाद का इस्तेमाल करने लगे है

कोटा: वर्तमान समय में तेजी से रासायनिक खाद व पेस्टिसाइड के उपयोग से नष्ट हो रही मिट्टी की उर्वरा शक्ति को देख अब धीरे-धीरे किसानो का जैविक खेती की ओर रूख बढ़ने लगा है. अभी हाल मे ही झालावाड़ जिले के किसान हुक्मचंद पाटीदार को जैविक खेती मे नवाचार और बेहतर कार्य करने पर राष्ट्रपति की ओर से पद्मश्री से सम्मानित हुए. कुछ ऐसे ही रास्ते पर चल पड़ा है कोटा जिले के सुल्तानपुर क्षेत्र के छोटे से पड़ासलिया गांव का एक युवा किसान.  

युवा उमेश नागर ने वैसे तो मेकेनिकल ब्रांच में इंजीनियरिंग की डिग्री ली है. पर नौकरी में उनका मन नहीं लगता था और वे खुद का कोई कारोबार शुरू करना चाहते थे. इसके बाद जब उमेश ने गांव में कृषि वैज्ञानिकों से रसायनिक खाद से खेतों की मिट्टी खराब होने की बात सुनी तो बस उन्होने मिट्टी सरंक्षण को लेकर कुछ करने की ठान ली. जिसके बाद से उमेश मृदा सरंक्षण को जैविक खाद बनाने के साथ साथ किसानों को जैविक खेती के प्रति जागरूक कर रहे है. 

इंजीनियर युवा किसान उमेश ने रसायनों और पेस्टिसाइड के प्रयोग से खराब हो रही मिट्टी के सरंक्षण को लेकर जैविक खाद को हल के रूप में खोजा और बिना सरकारी मदद के कृषि विश्वविद्यालय के विशेषज्ञो के सहयोग से पड़ासलिया गांव में अपने खेत की एक बीघा भूमि पर 10 लाख रूपए की लागत से जैविक खाद उत्पाद की यूनिट लगाई. 

जहां सुल्तानपुर कस्बे की गोपाल गौशाला से गोबर लेकर उसे जैविक खाद के रूप मे तैयार करना शुरू किया. एक बीघा मे बनी इस यूनिट से क्षेत्र के दर्जनो गांवो के किसान जैविक खाद लेते है. यूनिट से निर्मित जैविक खाद से नागर खुद तो खेती करते ही है, साथ उनकी सलाह पर सैकड़ों किसान भी रसायन छोड़ जैविक खाद का इस्तेमाल करने लगे है. 

युवा किसान उमेश आज पूरे क्षेत्र के लिए जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए मिशाल बन गए हैं. स्वरोजगार के साथ मृदा सरक्षण को लेकर उनके प्रयास आज के किसानो के लिए प्रेरणा है. उनके द्वारा वर्ष 2017 में यह जैविक खाद की यूनिट लगाई थी. जहां निर्मित खाद से उन्होने खेती शुरू की तो अच्छा फसल उत्पादन मिला. यह देख दूसरे किसान भी जैविक खाद अपनाने लगे. 

जिसके बाद से अब तक 50 से अधिक किसानो ने रसायन व पेस्टिसाइड की राह छोड़ जैविक खेती की राह पकड़ ली है. युवा किसान नागर की यूनिट से तैयार जैविक खाद से आर्थिक संबल के साथ ही किसानो की फसलों मे रसायनो की निर्भरता भी घटी है. वंही युवा किसान की इस जैविक खेती के प्रति पहल से पूरा गांव गौरवान्वित हुआ है.