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जब बाबू राजेंद्र प्रसाद ने अपने आप पंडित नेहरू को भारत रत्‍न देने का फैसला किया!

आज देश के प्रथम राष्‍ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद की 135वीं जयंती है.

जब बाबू राजेंद्र प्रसाद ने अपने आप पंडित नेहरू को भारत रत्‍न देने का फैसला किया!

आज देश के प्रथम राष्‍ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद (Dr. Rajendra Prasad Jayanti) की 135वीं जयंती है. राजेंद्र बाबू की देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के साथ जहां कई मुद्दों पर सहमति थी, वहीं कुछ मसलों पर असहमति भी थी. राजनीति में धर्म के मसले पर दोनों नेताओं के बीच मतांतर था लेकिन दोनों नेताओं के आपसी रिश्‍तों में गर्मजोशी कभी कम नहीं रही.

इसकी बानगी इस रूप में समझी जा सकती है कि शीत युद्ध के उस दौर में 13 जुलाई, 1955 को पंडित नेहरू तत्‍कालीन सोवियत संघ (रूस) और यूरोपीय देशों के सफल दौरे से भारत लौटे. वैश्विक मामलों में भारत की बड़ी भूमिका को स्‍थापित करने की प्रधानमंत्री की कोशिशों को उस यात्रा के दौरान व्‍यापक समर्थन भी मिला. उसका नतीजा यह हुआ कि वह यात्रा काफी चर्चित रही. इसी कारण जब पंडित नेहरू स्‍वदेश लौटे तो राष्‍ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद प्रोटोकॉल को तोड़ते हुए उनको रिसीव करने एयरपोर्ट पहुंचे. नेहरू के स्‍वागत के लिए जबर्दस्‍त भीड़ भी दिल्‍ली एयरपोर्ट के बाहर जमा हो गई थी. नतीजतन नेहरू ने उपस्थित जनसमूह के समक्ष एक छोटा सा भाषण भी दिया.

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अंग्रेजी वेबसाइट द वायर की एक रिपोर्ट के मुताबिक उसके बाद 15 जुलाई, 1955 को राष्‍ट्रपति ने एक विशेष भोज का राष्‍ट्रपति भवन में आयोजन किया. उस दौरान उन्‍होंने पंडित नेहरू को उस दौर का शांति का अग्रदूत करार देते हुए भारत रत्‍न देने की घोषणा की. इस रिपोर्ट में 16 जुलाई, 1955 की द टाइम्‍स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट का जिक्र किया गया है. उसमें बताया गया कि किस तरह इस फैसले को आयोजन से पहले गुप्‍त रखा गया. इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि राष्‍ट्रपति ने खुद ही स्‍वीकार किया कि उन्‍होंने प्रधानमंत्री या कैबिनेट की सलाह या सुझाव के बिना खुद ही पंडित नेहरू को यह सम्‍मान देने की घोषणा की.

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पंडित नेहरू को 1955 में भारत रत्‍न से नवाजा गया.(फाइल फोटो)

विवाद
वैसे पंडित नेहरू को 1955 में भारत रत्‍न से सम्‍मानित किए जाने के मसले पर विवाद रहा है. वह इसलिए क्‍योंकि वह खुद उस वक्‍त प्रधानमंत्री थे. आमतौर पर होता है कि प्रधानमंत्री के नेतृत्‍व में कैबिनेट, भारत रत्‍न के लिए कुछ नामों का प्रस्‍ताव राष्‍ट्रपति के पास भेजती है. राष्‍ट्रपति इसी में से फाइनल करते हैं. इस कारण कहा जाता है कि पंडित नेहरू ने खुद ही अपना नाम आगे बढ़ाकर ये सम्‍मान ले लिया. इस कारण ये मसला विवादित रहा है. लेकिन एक आरटीआई के जवाब में भी ये बताया गया है कि राष्‍ट्रपति राजेंद्र प्रसाद ने खुद ही तय कर लिया कि पंडित नेहरू को भारत रत्‍न मिलना चाहिए.