एक और मोर्चे पर चीन की 'घेरेबंदी', ईरान की राजधानी तेहरान पहुंचे रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह

लद्दाख में भारत से तनाव बढ़ाने वाले चीन को एलएसी से लेकर दुनिया के कोने कोने में पटखनी मिल रही है.

एक और मोर्चे पर चीन की 'घेरेबंदी', ईरान की राजधानी तेहरान पहुंचे रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह
मॉस्को से वापसी के दौरान तेहरान पहुंचे रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का हुआ स्वागत

तेहरान: लद्दाख में भारत से तनाव बढ़ाने वाले चीन को एलएसी से लेकर दुनिया के कोने कोने में पटखनी मिल रही है. रक्षा मंत्री राजना​थ सिंह ने पहले रूस की राजधानी मास्को में चीन को साफ समझाया कि भारत अपनी संप्रभुता से समझौता नहीं कर सकता. 

चीन पर 24 घंटे में दूसरा कूटनीतिक अटैक
वहीं इस कूटनीतिक जीत के बाद 24 घंटे के भीतर चीन को दूसरा सबक सिखाते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह मॉस्को से अचानक तेहरान के दौरे पर पहुंच गए. जहां वे आज ईरान के रक्षा मंत्री से मुलाक़ात करेंगे. अपने ईरान दौरे से राजनाथ सिंह चीन को कई मोर्चों पर मात देने वाले हैं.

भारत की कूटनीतिक जंग के आगे छटपटा रहा है चीन
लगातार दो पराजय मिलने के बाद ही चीन समझ गया कि लद्दाख में उससे चूक हो गई है और अब भारत उसे धोखेबाज़ी का कोई मौका नहीं देने वाला. इसीलिए चीन ने मास्को में भारत से बातचीत करने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा दिया था. करीब 140 मिनट की इस बातचीत में भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने चीन को जो तेवर दिखाए. उससे चीन के होश उड़ना तय है. 

बड़ी कूटनीति का हिस्सा है राजनाथ का तेहरान दौरा
लेकिन अब भारत चीन को ओर झटके देने जा रहा है. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का अचानक ईरान दौरा बड़ी कूटनीति का हिस्सा है. ये दौरा चीन को एक दो नहीं कई मोर्चों पर परेशान कर सकता है. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के दौरे से भारत के खिलाफ चीन और पाकिस्तान गठबंधन पर प्रहार होगा तो चीन के परमाणु प्लान पर भी बहुत बड़ी चोट लगेगी. 

तेहरान पहुंचने से पहले राजनाथ सिंह ने किया ट्वीट
मॉस्को से तेहरान के लिए निकलने से पहले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ट्वीट किया. इसमें लिखा था कि ''मास्को से तेहरान के लिए निकल रहा हूं, मैं ईरान के रक्षा मंत्री ब्रिगेडियर जनरल अमीर हातमी से मिलूंगा। राजनाथ सिंह, रक्षा मंत्री''

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह तेहरान दौरे से क्यों परेशान है चीन 
अमेरिका के दबाव में दुनिया ईरान से दूरी बना रही है. ऐसे में चीन ने ईरान के साथ एक महाडील की थी. इस डील के मुताबिक चीन बहुत कम दाम में अगले 25 साल तक ईरान से तेल ख़रीदेगा. चीन बैंकिंग, दूरसंचार, बंदरगाह, रेलवे, और ट्रांसपोर्ट जैसी क्षेत्रों में निवेश करेगा. चीन और ईरान के बीच हो रहे समझौते में सैन्य सहयोग भी शामिल है. जिसके तहत चीन ईरान के साथ मिलकर हथियारों का विकास करेगा. 

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रक्षामंत्री के दौरे भारत के करीब आएगा ईरान ! 
ये डील ईरान को चीन के क़रीब और भारत से दूर लेकर जा सकती थी. ऐसे में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का दौरा भारत और ईरान के पुराने संबंधों को मज़बूत करने की दिशा में सार्थक प्रयास होगा. इससे अफग़ानिस्तान में भारतीय सहयोग से चल रही विकास योजनाओं पर भी सकारात्मक असर पड़ेगा. अमेरिका भले ही ईरान से नाराज़ हो लेकिन भारत के लिए ईरान की दोस्ती बेहद ज़रूरी है । 

अफगानिस्तान का गेटवे है ईरान - रक्षा विशेषज्ञ
रक्षा विशेषज्ञ मेजर जनरल एस पी सिन्हा कहते हैं कि ईरान असल में अफ़ग़ानिस्तान का गेट वे है. यदि अफगानिस्तान में आपको काम करना है तो उसमें ईरान का सहयोग लेना ही होगा. चीन से 140 मिनट तक चली बातचीत में भारत ने चीन को ये समझाने की कोशिश की कि न वो भारत के किसी हिस्से को छीन सकता है और न ही भारत के किसी दोस्त को. नया भारत चीन को गलवान से ईरान तक कहीं भी मौक़े का फायदा नहीं उठाने देगा. 

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