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असदुद्दीन ओवैसी ने 2019 चुनाव को लेकर खेला दलित कार्ड, कही ये बड़ी बात

2019 Elections: महाराष्ट्र में दलित और मुस्लिम वोटों के बिखराव को रोकने के लिए इन दोनों नेताओं ने साथ आने का फैसला किया है.

असदुद्दीन ओवैसी ने 2019 चुनाव को लेकर खेला दलित कार्ड, कही ये बड़ी बात
फाइल फोटो

नांदेड़(महाराष्ट्र): 2019 लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के साथ गठबंधन के सवाल पर AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने राहुल गांधी के सामने एक शर्त रखी है. महागठबंधन के सवाल पर पहली बोलते हुए ओवैसी ने कहा है कि वह राहुल गांधी के साथ समझौता करने को तैयार है लेकिन इसके लिए उनकी एक शर्त है. ओवैसी ने शर्त रखी है कि अगर राहुल गांधी महाराष्ट्र के दलित नेता प्रकाश अंबेडकर को सम्मानजनक सीटें दें तो वह महागठबंधन में शामिल हो सकते है. 

ओवैसी ने रैली को संबोधित करते हुए कहा, 'मुझे यहां कोई सीट नहीं चाहिए लेकिन मैं चाहता हूं कि मेरे बड़े भाई प्रकाश अंबेडकर को सम्मानजनक सीटें मिलें.' ओवैसी यहीं नहीं रुके उन्होंने राहुल गांधी की तरफ इशारा करते हुए कहा, 'आपने कहा कि आप प्रकाश अंबेडकर से बात करेंगे लेकिन एमआईएम से नहीं, सुनों राहुल गांधी, सुनों अशोक चव्हाण...मैं दृढ़ विश्वास, जिम्मेदारी और गंभीरता से राहुल गांधी और शरद पवार से कहता हूं कि अगर आपको एमआईएम से दिक्कत है तो मैं आपको बता देना चाहता हूं कि आप मेरे बड़े भाई प्रकाश अंबेडकर से बात करें, उन्हें वो सीटें दें जिनके वो हकदार है. मैं एक भी सीट नहीं चाहता हूं.'

ओवैसा ने कहा, 'आप (कांग्रेस) प्रकाश अंबेडकर को जितनी भी सीटें देंगे, ओवैसी आपका आभारी रहेगा. बोलो अशोक चव्हाण...क्या आप तैयार है? आप बहुत बड़ी बड़ी बातें करते हैं आज मैं आपको ऑफर दे रहा हूं. '

बता दें कि बीते साल 2 अक्टूबर को ही महाराष्ट्र में प्रकाश अंबेडकर की पार्टी बहुजन रिपब्लिकन पार्टी- बहुजन महासंघ (बीबीएम) और असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) ने आपस में हाथ मिलाया था. तभी ये माना जा रहा था कि महाराष्ट्र में दलित और मुस्लिम वोटों के बिखराव को रोकने के लिए इन दोनों नेताओं ने साथ आने का फैसला किया है.

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गौरतलब है कि महाराष्ट्र में 17 प्रतिशत दलित आबादी है और 13 फीसदी आबादी मुसलमानों की है. राज्य के औरंगाबाद, बीड, नांदेड़ और उस्मानाबाद जिलों में बड़ी तादाद में मुस्लिम आबादी हैं. इसके अलावा परभनी, लातूर, जालना और हिंगोली जैसे जिलों में भी मुस्लिम मतदाता निर्णायक भूमिका में हैं. जबकि दलित समुदाय वाले क्षेत्रों में औरंगाबाद, बीड,लातूर, उस्मानाबाद और नांदेड़ आते हैं.