कांग्रेस ने हारे हुए वरिष्ठ नेताओं को दी गुजरात विधानसभा उपचुनाव की जिम्मेदारी

कांग्रेस ने जिन वरिष्ठ नेताओं को उपचुनाव की जिम्मेदारी सौंपी है, वे विधानसभा और लोकसभा में बुरी तरह हारे हैं. 

कांग्रेस ने हारे हुए वरिष्ठ नेताओं को दी गुजरात विधानसभा उपचुनाव की जिम्मेदारी
फाइल फोटो

अहमदाबाद: गुजरात कांग्रेस द्वारा राज्य में होने वाले सात विधानसभाओं के उपचुनाव की जिम्मेदारी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को सौंपी गई है. कांग्रेस का दावा है कि वो उपचुनाव में अच्छा प्रदर्शन करेगी. हालांकि, जिन वरिष्ठ नेताओं को उपचुनाव की जिम्मेदारी सौंपी गई है, वे विधानसभा और लोकसभा में बुरी तरह हारे हैं. 

जानें किस नेता को मिली है कौन से विधानसभा क्षेत्र की जिम्मेदारी

राधनपुर सीट की जिम्मेदारी अर्जुन मोढवाडिया को सौंपी गई है. अर्जुन मोढवाडिया पोरबंदर से वर्ष 2012 में 17146 और वर्ष 2017 में 1855 वोटों से हारे थे. थराद बेठक की जिम्मेदारी सिद्धार्थ पटेल को सौंपी गई है. सिद्धार्थ पटेल ढबोई से वर्ष 2012 में 5122 और वर्ष 2017 में 2839 वोटों से हारे थे. खेरालु सीट की जिम्मेदारी जगदीश ठाकोर को सौंपी गई है. जगदीश ठाकोर पाटण लोकसभा सीट से वर्ष 2014 में 138719 और वर्ष 2019 में 192455 वोटों से हारे थे.

लुणावाड़ा सीट की जिम्मेदारी भारत सिंह सोलंकी को सौंपी गई है. भारत सिंह सोलंकी आनंद लोकसभा सीट से वर्ष 2014 में 63426 और वर्ष 2019 में 197718 वोटों से हारे थे. मोरवाहड़फ सीट की जिम्मेदारी तुषार चौधरी को सौंपी गई है. तुषार चौधरी बारडोली लोकसभा सीट से वर्ष 2014 में 123884 और वर्ष 2019 में 215447 वोटों से हारे थे. वहीं, वर्ष 2017 में विधानसभा चुनाव महुवा से लड़े थे और 6433 वोटो से हारे थे. 

बायड सीट की जिम्मेदारी मधुसूदन मिस्त्री को सौंपी गई है. मधुसूदन मिस्त्री वडोदरा लोकसभा सीट पर से वर्ष 2014 में 570128 वोटों से हारे थे और 2009 में साबरकांठा की सीट से 17160 वोटों से हारे थे. अमराइवाडी सीट की जिम्मेदारी दीपक बाबरीया को सौंपी गई है. दीपक बाबरीया अहमदाबाद पूर्व लोकसभा सीट से वर्ष 2009 में 86056 वोटों से हारे थे.

इसके अलावा शक्ति सिंह गोहिल को भी उप चुनाव की जिम्मेदारी सौंपी गई है. शक्ति सिंह गोहिल वर्ष 2012 में भावनगर ग्राम्य से 18554 वोट से और 2017 विधानसभा चुनाव मांडवी से 9046 वोट से हारे थे. इन सभी नेताओं पर गुजरात विधानसभा के उपचुनाव की जिम्मेदारी सौंपी गई है. अब ये देखना होगा कि हारे हुए नेता पार्टी को किस तरह जीत की ओर ले जाते हैं.