1300 किलोमीटर पैदल चला एक बाघ, नए 'घर' की तलाश में भटकता रहा पांच महीने

सी-1 बाध विदर्भ के यवतमाल जिले के टिपेश्वर सेंचुरी का सी-1 नामक बाघ 1300 किलोमीटर की यात्रा कर बुलढाणा की ज्ञानगंगा सेंचुरी पहुंचा है. बाघ अपने लिए नए ठिकाने की तलाश में भटक रहा था. 

1300 किलोमीटर पैदल चला एक बाघ, नए 'घर' की तलाश में भटकता रहा पांच महीने

नागपुर: इनसान अपने लिए एक सही घर या ठिकाना तलाशने में महीनों कई बार वर्षों लगा देता है. ठीक ऐसा ही कुछ देखने को मिला है महाराष्ट्र (Maharashtra) के विदर्भ (Vidarbh) के जंगलों में. दरअसल, एक बाघ अपने लिए सही ठिकाने की तलाश में पांच महीने भटकता रहा. इन पांच महीनों के दौरान उसने 1300 किलोमीटर की यात्रा पूरी कर ली. विदर्भ के यवतमाल जिले के टिपेश्वर सेंचुरी का सी-1 नामक बाघ 1300 किलोमीटर की यात्रा कर बुलढाणा की ज्ञानगंगा सेंचुरी पहुंचा है. बाघ अपने लिए नए ठिकाने की तलाश में भटक रहा था. अधिवास की तलाश में उसने नया रिकॉर्ड बना डाला है. 

जानकारी के मुताबिक, यवतमाल की टिपेश्वर सेंचुरी के इस बाघ का जन्म 2016 में हुआ था. टिपेश्वर सेंचुरी की टी-वन बाघिन ने इस शावक को जन्म दिया था. 27 फरवरी 2019 को इससे रेडिओ कॉलर लगाया गया. वनविभाग लगातार इसपर नजर बनाए हुए था. 3 साल कि उम्र में सी-वन बाघ अपनी मां टी-वन बाघिन से अलग हुआ और नए अधिवास कि खोज में आगे बढ़ता गया. 

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पेंच टाइगर प्रोजक्ट के प्रमुख वन संरक्षक डॉ रवीकिरण गोवेकर ने बताया कि जून 2019 में सी-वन बाघ नए अधिवास की खोज में निकला. टिपेश्वर सेंचुरी से शुरू हुई उसकी यात्रा दो राज्य और 6 जिलों से गुजरी. उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र के विदर्भ और तेलंगाना के अदिलाबाद इलाकों के जंगलों में चलते हुए पूरे पांच महीने बाद एक दिसंबर को यह विदर्भ के ही बुलढाणा जिले के ज्ञानगंगा सेंचुरी पहुंच गया. 

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डॉ गोवेकर का कहना है कि अपनी 1300 किलोमीटर की यात्रा के दौरान यह बाघ गांवों से के नजदीक से भी गुजरा लेकिन इसने किसी को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया. हालांकि अपनी भूख मिटाने के लिए उसने कुछ मवेशियों का शिकार जरूर किया. अधिकारियों ने बताया कि चलते चलते वह हिंगोली की मानव बस्ती के पास पहुंचा. लोगों द्वारा उसकी फोटो खींचने और परेशान करने पर उसने कुछ लोगों पर हमला कर दिया था. 

जानकारों का मानना है कि तीन वर्षीय सी-वन बाघ की 1300 किलोमीटर की यात्रा में वह सिर्फ घने जंगलों से होकर नहीं गुजरा बल्कि कई जगह बस्तियां और गांव भी आए. ऐसी जगहों पर खुद को लोगों की नजरों से बचाने के लिए बाघ ने नालों का सहारा लिया. जानकारों की मानें तो बुलडाणा से 14 किलोमीटर दूरी पर स्थित ज्ञानगंगा सेंचुरी में यह बाघ कुछ दिन ठहरेगा इसके बाद मेलघाट इलाके से 50 किलोमीटर की दूरी पर जाकर अपना अधिवास निश्चित कर सकता है.