अयोध्या केस: राजीव धवन ने सवाल पूछ रहे जज के लहज़े को आक्रामक कहा, बाद में माफी मांगी

दरअसल, जस्टिस अशोक भूषण ने 1935 में इमारत के भीतर मूर्ति देखने का दावा करने वाले गवाह पर सवाल किया था. धवन का कहना था कि अविश्वसनीय बयान पर चर्चा नहीं होनी चाहिए. जज का कहना था कि चर्चा हर बात की हो सकती है. बात को देखना कैसे है, यह कोर्ट का काम है.

अयोध्या केस: राजीव धवन ने सवाल पूछ रहे जज के लहज़े को आक्रामक कहा, बाद में माफी मांगी

नई दिल्‍ली: अयोध्‍या केस की 27वें दिन की सुनवाई में मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन ने कहा कि 1949 के मुकदमे के बाद सभी गवाह सामने आए लेकिन लोग रैलिंग तक क्यों जाते थे इस बारे में किसी को नहीं पता. गवाहों ने कहा कि हिन्दू-मुस्लिम दोनों वहां पर पूजा करते थे, मैंने किसी किताब में यह नहीं पढ़ा कि वह कब से एक साथ पूजा कर रहे थे, दोनों वहां पर औरंगजेब के समय से जाते थे. धवन ने एक हिंदु पक्ष के गवाह की गवाही के बारे में बताते हुए कहा कि गर्भगृह में 1939 में वहां पर मूर्ति नहीं थी, वहां पर बस एक फोटो थी.

धवन ने कहा कि गर्भगृह में 1939 में वहां पर मूर्ति नहीं थी वहां पर बस एक फोटो थी. मूर्ति और गर्भगृह की पूजा का कोई सबूत नहीं है. जस्टिस भूषण ने कहा कि यह कहना सही नहीं है कि हिंदुओं ने गर्भगृह की पूजा की, इस बात का सबूत नहीं है. राम सूरत तिवारी नामक गवाह ने 1935 से 2002 तक वहां पूजा करने की बात कही है, आप सबूतों को तोड़ मरोड़ के पेश कर रहे हैं. कोई भी सबूतों को तोड़ मरोड़ नहीं सकता. धवन ने कहा कि मैं सबूतों को तोड़-मरोड़ नहीं रहा हूं.

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इस बीच राजीव धवन ने सवाल पूछ रहे जज के लहज़े को आक्रामक कहा, फिर बाद में माफी मांगी. दरअसल, जस्टिस अशोक भूषण ने 1935 में इमारत के भीतर मूर्ति देखने का दावा करने वाले गवाह पर सवाल किया था. धवन का कहना था कि अविश्वसनीय बयान पर चर्चा नहीं होनी चाहिए. जज का कहना था कि चर्चा हर बात की हो सकती है. बात को देखना कैसे है, यह कोर्ट का काम है. इस पर धवन ने जज से कहा कि आपका लहज़ा आक्रामक है. मैं इससे डर गया. धवन के रवैये पर बेंच के सदस्य जस्टिस चंद्रचूड़ और वकील वैद्यनाथन ने एतराज़ किया. धवन ने तुरंत कोर्ट से माफी मांगी.

धवन ने बहस के दौरान जोसेफ तेफेन्थेलर का ज़िक्र किया. धवन ने रामचबूतरे की स्थिति पर एक तस्वीर का ज़िक्र करते हुए कहा कि वही पहले जन्मस्थान था. कहते हैं कि दीवार इतनी ऊंची नहीं थी. दरवाज़े से बाएं मुड़ते ही आप चबूतरे के पास पहुंच सकते थे. जस्टिस बोबडे ने कहा कि इसकी ऊंचाई 6-8 फीट हो सकता है. मनुष्य की औसत ऊंचाई लगभग 5.5 फीट है. लेकिन दीवार इसके ऊपर 2 फीट प्रतीत होती है. इस पर धवन ने कहा कि दीवार कूदने के लिए हमको ओलंपिक के जिमनास्ट होने की ज़रूरत नहीं है. जस्टिस भूषण ने कहा कि अंदर प्रवेश करने के किये दीवार कूदने की ज़रूरत नहीं है, वहां दरवाजा भी है. जस्टिस डीवाई चन्द्रचूड़ ने कहा कि दरवाज़े को हनुमान द्वार कहते हैं.

अयोध्या मामले में लंच के बाद पीठ सुनवाई के लिए नहीं बैठी. CJI की तबीयत ठीक नहीं होने के कारण अयोध्या मामले में लंच के बाद सुनवाई नहीं हुई. अयोध्या मामले में आज की सुनवाई पूरी हुई.