महिला के पास नहीं था आधार कार्ड, इसलिए पति के शव को कब्रिस्तान में भी नहीं मिली दो गज जमीन

कब्रिस्तान में जब जुबैर के शव को दफनाने के लिए शबनम को मदद नहीं मिली तो वह एंबुलेंस से वापस बरेली जिला मुख्यालय स्थित पोस्टमॉर्टम हाउस आ गई...

महिला के पास नहीं था आधार कार्ड, इसलिए पति के शव को कब्रिस्तान में भी नहीं मिली दो गज जमीन
सांकेतिक तस्वीर.

बरेली: किसी अपने को खोना कितना भयानक हो सकता है, यह हर देशवासी जानता है. लेकिन जब उनके जाने के बाद भी उनकी आत्मा की शांति के लिए परिजन कुछ न कर पाएं तो और दुख होता है. कई लोग ऐसे भी हैं, जो दूसरों की मुसीबत कम करने की जगह उन्हें परेशान करने से पीछ नहीं हटते. ऐसा ही एक मामला सामने आया यूपी के बरेली से, जहां अपने पति के शव को कब्रिस्तान लेकर गई महिला को दो गज जमीन भी न मिल सकी. कब्रिस्तान में काम करने वाले लोगों ने महिला से इसलिए शव वापस ले जाने को कह दिया, क्योंकि उसके पास पति का आधार कार्ड नहीं था. बताया जा रहा है कि प्रबंधन ने ऐसा इसलिए किया क्योंकि महिला गांव की नहीं थी और न ही गांव में कोई उसका जानने वाला था.

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मामला बरेली जिले के भोजीपुरा थाना क्षेत्र के गांव अभयपुर केशोपुर का है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, महिला का नाम शबनम है और वह अपने दो छोटे-छोटे बच्चों को अपने पति के शव के पास लेकर बैठी थी. उसकी रोती हुई आवाज और मदद की गुहार को कोई सुनने वाला नहीं था. 

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पति ने किया था सुसाइड
शबनम और पति जुबैर अपने जो बच्चों के साथ कुछ दिन पहले गांव आए थे. उन्होंने गांव के ही बाहर एक टेंट लगाया था और उसमें रह रहे थे. मृतक पति जुबैर मजदूरी कर अपने परिवार का पालन-पोषण करता था. जुबैर कानपुर का निवासी था. शबनम का कहना है कि मंगलवार रात जुबैर उससे शराब के पैसे मांग रहा था, जिसके बाद दोनों में बहस हो गई थी. उसी रात, कुछ समय बाद जुबैर ने शबनम के दुपट्टे से पेड़ पर फंदा बनाया और फांसी लगाकर सुसाइड कर लिया. 

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जुबैर ने फाड़ दिए थे आधार कार्ड
भोजीपुरा ने शव का पोस्टमॉर्टम कर एम्बुलेंस से अभयपुर केशोपुर गांव भेज दिया था. शबनम ने मीडिया को बताया कि उसके पास आधार कार्ड नहीं है, क्योंकि जुबैर ने ही एक दिन दोनों के आधार कार्ड फाड़ दिए थे. 

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गांव वालों इसलिए नहीं कर रहे थे मदद
वहीं, गांव वालों का कहना था कि ये लोग गांव के नहीं हैं और सभी ग्रामीणों के लिए अनजान हैं. ऐसे में कोई भी शबनम की मदद के लिए आगे आने में हिचक रहा था. लेकिन उनका कहना था कि अगर शबनम आधार कार्ड से अपनी पहचान दे देती, तो ग्रामीणों को कोई आपत्ति नहीं थी. 

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शबनम की मदद के लिए आगे आए समाजसेवी
कब्रिस्तान में जब जुबैर के शव को दफनाने के लिए शबनम को मदद नहीं मिली तो वह एंबुलेंस से वापस बरेली जिला मुख्यालय स्थित पोस्टमॉर्टम हाउस आ गई. वहां पर आवामी खिदमात कमेटी ने उसकी सहायता की. कमेटी की मदद से गुरुवार को जुबैर के शव को दफनाया गया.

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