close

खास खबरें सिर्फ आपके लिए...हम खासतौर से आपके लिए कुछ चुनिंदा खबरें लाए हैं. इन्हें सीधे अपने मेलबाक्स में प्राप्त करें.

लखनऊ में हो सकती है प्रियंका-राहुल की पहली रैली, बीजेपी बोली, 'कोई फर्क नहीं पड़ेगा'

कुछ राजनीतिक विश्लेषकों का मत है कि प्रियंका गांधी के सक्रिय रूप से राजनीति में आने से कांग्रेस के साथ अगड़ा वर्ग फिर से जुड़ेगा.

लखनऊ में हो सकती है प्रियंका-राहुल की पहली रैली, बीजेपी बोली, 'कोई फर्क नहीं पड़ेगा'
फाइल फोटो

नई दिल्लीः प्रियंका गांधी वाड्रा को कांग्रेस का महासचिव और पूर्वी उत्तर प्रदेश का प्रभारी बनाए जाने के बाद यूपी में उनकी पहली रैली को लेकर खबर आ रही है. सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की यूपी में 12 रैलियां प्रस्तावित है. ऐसा बताया जा रहा है कि राहुल गांधी पहली रैली लखनऊ में होगी और इस रैली में प्रियंका गांधी भी राहुल गांधी के साथ दिखाई देंगीं.

ऐसा माना जा रहा है कि राहुल गांधी और प्रियंका गांधी की पहली रैली 10 फरवरी को हो सकती है.

उधर बीजेपी के उत्तर प्रदेश प्रभारी गोवर्द्धन झड़फिया ने प्रियंका गांधी वाड्रा को कांग्रेस का महासचिव और पूर्वी उत्तर प्रदेश का प्रभारी बनाए को ‘पारिवारिक मसला’ करार देते हुए कहा कि बीजेपी को इससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा. उन्होंने कहा कि वह (प्रियंका) भी तो गांधी-नेहरू परिवार का ही हिस्सा हैं और इसी परिवार के राहुल गांधी कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष हैं.

झड़फिया ने से बातचीत में कहा, ‘‘ यह उस पार्टी और परिवार का मसला है कि किसे क्या दायित्व दिया जाता है. लेकिन बीजेपी की संभावनाओं पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा .’’ उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में विकास कार्य सब पर भारी पड़ेंगे .

झड़फिया से पूछा गया था कि प्रियंका गांधी के राजनीति में औपचारिक रूप से उतरने और उन्हें महासचिव व पूर्वी उत्तरप्रदेश का प्रभारी बनाये जाने से बीजेपी की चुनावी संभावनाओं पर क्या प्रभाव पड़ेगा.

उन्होंने कहा, ‘‘ मैं पूछना चाहता हूं कि क्या राहुल गांधी, जो कांग्रेस अध्यक्ष हैं, क्या वे गांधी- नेहरू परिवार से नहीं आते हैं ? इसी प्रकार से कांग्रेस का मागर्दशन करने वाली सोनिया गांधी भी इसी परिवार से आती हैं . प्रियंका गांधी वाड्रा भी अमेठी, रायबरेली में पहले चुनाव प्रचार में शामिल रही हैं. इस प्रकार से कुछ नयी बात सामने नहीं आई है . यह तो अपेक्षित ही था . ’’ बीजेपी नेता ने कहा कि यह उस पार्टी (कांग्रेस) और परिवार का मसला है कि वे किसे कौन सा पद देते हैं . लेकिन इतना पक्का हो गया है कि कांग्रेस परिवारोन्मुखी पार्टी है .

यह पूछे जाने पर कि कुछ राजनीतिक विश्लेषकों का मत है कि प्रियंका गांधी के सक्रिय रूप से राजनीति में आने से कांग्रेस के साथ अगड़ा वर्ग फिर से जुड़ेगा, उत्तरप्रदेश बीजेपी प्रभारी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश के गरीबों एवं राष्ट्र के समग्र विकास के लिये काम किया है, जातियों के आधार पर कोई भेद नहीं किया . देश को 30 साल तक अस्थिरता के दौर से गुजरना पड़ा और इसके बाद मोदी के नेतृत्व में एक स्थिर सरकार मिली . अब जनता एक बार फिर अस्थिरता को जनादेश नहीं देगी .

उन्होंने जोर दिया कि चुनावी राजनीति में पार्टियां बदलती रहती हैं, कोई जीतता है, कोई हारता है लेकिन पहली बार मोदी ने जनहित में व्यवस्था बदलने का काम किया है . सपा-बसपा गठबंधन के संदर्भ में झड़फिया ने कहा कि क्षेत्रीय पार्टी का अपना महत्व है, इसे अस्वीकार नहीं करते लेकिन राष्ट्रहित से ऊपर कोई नहीं हो सकता है . प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के पांच साल और उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ के करीब डेढ साल के कार्यकाल के आधार पर बीजेपी को जनता आगामी चुनाव में पूरा आर्शीवाद देगी . चुनाव में विकास का मुद्दा महत्वपूर्ण है.

उत्तर प्रदेश में करिश्मा नहीं कर पाएंगी प्रियंका : बीजेपी विधायक
बीजेपी विधायक सुरेन्द्र सिंह ने गुरुवार को दावा किया कि कांग्रेस की नवनियुक्त महासचिव प्रियंका गांधी उत्तर प्रदेश में कोई करिश्मा नहीं कर पाएंगी. अपने बयानों को लेकर अकसर विवादों के घेरे में रहने वाले सिंह ने प्रियंका को लेकर किये गये सवाल पर कहा, ‘‘प्रियंका कोई करिश्मा नहीं कर पाएंगी. प्रियंका प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सामने टिक नहीं पाएंगी.' 

उल्लेखनीय है कि कांग्रेस ने बुधवार को प्रियंका को पार्टी महासचिव और पूर्वी उत्तर प्रदेश का प्रभारी नियुक्त किया है. प्रदेश की योगी सरकार के बारे में पूछे गये एक सवाल पर सिंह ने कहा कि योगी सरकार में भी भ्रष्टाचार सपा और बसपा सरकार के समय के जितना ही है. 

उन्होंने दावा किया कि योगी सरकार में भ्रष्टाचार में बहुत बड़ा सुधार नहीं हुआ है. साथ ही आरोप मढ़ा कि योगी सरकार अधिकारियों और कर्मचारियों को दंडित करने में विफल है. अधिकारी और कर्मचारी कामचोरी तथा भ्रष्टाचार के कारण योगी सरकार को बदनाम कर रहे हैं.

(इनपुट भाषा)