संतों का दाह संस्कार नहीं होता, क्यों दी जाती है भू-समाधि? कितनी पुरानी है यह परंपरा, जानें

महंत नरेंद्र गिरी ने अपने कथित सुइसाइड नोट में यह इच्छा जताई थी कि उन्हें बाघंबरी मठ में ही उनके गुरु की समाधि के बगल में भू-समाधि दी जाए. उनके निर्देश के अनुसार बाघंबरी मठ में नींबू के पेड़ के नीचे उन्हें भू-समाधि दी गई. नींबू के इस पेड़ को महंत नरेंद्र गिरी ने ही अपने हाथों से लगाया था.

संतों का दाह संस्कार नहीं होता, क्यों दी जाती है भू-समाधि? कितनी पुरानी है यह परंपरा, जानें
Image Credit: संतों की सबसे बड़ी संस्था अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरी की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के बाद संत परंपरा के अनुसार बुधवार को उनके शव को मठ बाघम्बरी गद्दी में भू-समाधि दी गई. Source: ज़ी न्यूज़ डेस्क

About the Author