Coronavirus: शहर-शहर कितने थप्पड़बाज अफसर? लाल बत्ती ऑन, फिर जनता कौन
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Coronavirus: शहर-शहर कितने थप्पड़बाज अफसर? लाल बत्ती ऑन, फिर जनता कौन

पावर का नशा होता ही ऐसा है कि जब वो दिमाग पर सवार हो जाए तो क्या सही, क्या गलत. कोरोना का गाइडलाइंस का पालन कराना एक बात होती है, लेकिन सीनियर अफसर जब ऐसा व्यवहार करेंगे तो लोगों का गुस्सा होना लाजमी है.

थप्पड़बाज अफसर.

नई दिल्ली: शहर-शहर कितने थप्पड़बाज अफसर? ऐसा हम इसलिए पूछ रहे हैं क्योंकि कल छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) में सूरजपुर के डीएम (DM) के तबादले की खबर आई, जो उनके एक युवक को थप्पड़ मारे जाने के बाद हुआ. ऐसा ही एक वीडियो आज भी सामने आया है. इस बार शाजापुर (Shajapur) की एक आईएएस अधिकारी का एक युवक को थप्पड़ मारने वाला वीडियो वायरल हो रहा है. 

शाजापुर ADM ने बीच सड़क पर युवक को मारा थप्पड़

जिसमें शाजापुर एडीएम (Shajapur ADM) मंजूषा विक्रांत राय लॉकडाउन का पालन करवाने के लिए सड़क पर निकलीं और एक दुकानदार को दुकान खोलने पर थप्पड़ मार दिया. ADM मंजूषा विक्रांत राय ने युवक को दुकान से बाहर निकाल कर बीच सड़क पर उसको तमाचा मारा.

यहां डीएम ने दवा लेने घर से निकले युवक का मोबाइल तोड़ा

अब ऐसी तस्वीरें तो अक्सर दिख जाती हैं, जब सत्ता और पावर के नशे में नेता या अधिकारी आम लोगों के साथ बदसलूकी करते हैं. कुछ ऐसी ही तस्वीरें छत्तीसगढ़ से भी आई हैं. सूरजपुर के डीएम रणवीर शर्मा जो अब उस पद से हटा दिए गए हैं, डीएम के पावर के नशे में रणवीर शर्मा ने कोरोना गाइडलाइंस की आड़ में ऐसे ही एक युवक को सरेआम थप्पड़ मारा, उसका मोबाइल तोड़ दिया.

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बता दें कि उस युवक का कसूर बस इतना था कि वो अपनी कोरोना से लड़ रही दादी के लिए दवा लेने बाहर निकला था. हालांकि इस घटना का वीडियो वायरल होने के बाद रणवीर शर्मा को डीएम के पद से हटा दिया गया, लेकिन ऐसे में सवाल ये उठता है कि बेलगाम होते अफसरों को उनकी गलती की सजा तबादले से ही मिलेगी?

पावर के नशे में चूर अफसर ने शादी में मचाया उत्पात

कोरोना काल में अफसरों का बेलगाम होना आम बात हो गई है. कुछ हफ्ते पहले त्रिपुरा में भी एक IAS अधिकारी ने पावर के नशे में चूर होकर शादी समारोह में ऐसा गदर मचाया कि वो दूसरों को कानून का पाठ पढ़ाने से पहले खुद ही कानून का पालन करना भूल गए.

शैलेश कुमार यादव उस वक्त त्रिपुरा में डीएम थे. दरअसल शैलेश कुमार यादव ने दो जगहों पर छापा मारा था और कोरोना काल में हो रहे शादी समारोहों को रोका था. लेकिन लॉकडाउन के नियमों का पालन कराने का तरीका ये है क्या? शैलेश कुमार यादव ने पहले बैंड वालों को भगाया. उसके बाद शादी में शामिल लोगों को मैरिज हॉल से बाहर किया. इतना ही नहीं डीएम साहब ने तो दुल्हन को भी स्टेज से उतरने को कहा.

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लेकिन जैसे-जैसे डीएम साहब आगे बढ़ रहे थे, उनका गुस्सा सातवें आसमान पर जा रहा था. बड़े अफसर थे सो उन्हें लगा कि वो जो करेंगे सब सही ही करेंगे. दूल्हा समेत शादी में शामिल हो रहे पुरुषों, महिलाओं और बुजुर्गों के साथ तो इन्होंने जमकर बदसलूकी की. डीएम साहब ने तो दूल्हे को भी धक्का मारकर बाहर निकाल दिया था. शादी समारोह में एक डीएम अपने लोगों के साथ इस कदर गुंडों जैसा व्यवहार करेगा इसकी कल्पना भला कोई कैसे कर सकता है.

लेकिन पावर का नशा होता ही ऐसा है कि जब वो दिमाग पर सवार हो जाए तो क्या सही, क्या गलत. कोरोना का गाइडलाइंस का पालन कराना एक बात होती है, लेकिन सीनियर अफसर जब ऐसा व्यवहार करेंगे तो लोगों का गुस्सा होना लाजमी है. तब शैलेश कुमार यादव ने कोरोना के नाम पर जो गुंडागर्दी की उसका खामियाजा भी उन्हें भुगतना पड़ा. वीडियो के वायरल होते ही त्रिपुरा सरकार ने उन्हें सस्पेंड कर दिया था.

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