CAA से नहीं छिनेगी किसी की नागरिकता, जानिए क्‍या है कानून और पूरी हकीकत?

नागरिकता संशोधन कानून (Citizenship Amendment Act) के नाम पर भारत में पिछले कई दिनों से प्रदर्शन हो रहे हैं. लेकिन इन सबके बीच ये भी समझना चाहिए कि वास्‍तव नया कानून क्‍या है? क्‍या अफवाहें फैलाई जा रही हैं? इसके बारे में धारणा क्‍या है?

CAA से नहीं छिनेगी किसी की नागरिकता, जानिए क्‍या है कानून और पूरी हकीकत?
फाइल फोटो

नागरिकता संशोधन कानून (Citizenship Amendment Act) के नाम पर भारत में पिछले कई दिनों से प्रदर्शन हो रहे हैं. लेकिन इन सबके बीच ये भी समझना चाहिए कि वास्‍तव नया कानून क्‍या है? क्‍या अफवाहें फैलाई जा रही हैं? इसके बारे में धारणा क्‍या है?
दरअसल CAA नागरिकता संशोधन कानून है और NRC का मतलब है एक ऐसा राष्ट्रीय रजिस्टर जिसमें देश के सभी नागरिकों का ब्‍यौरा होगा. इसको सवाल-जवाब के सहारे सिलसिलेवार तरीके से समझा जा सकता है:

पहला सवाल- क्या इससे भारत का कोई मौजूदा नागरिक प्रभावित होगा?
जवाब- बिल्कुल नहीं. CAA किसी वर्तमान भारतीय नागरिक के मूलभूत अधिकारों को नुकसान नहीं पहुंचाता है. इसमें सभी धर्मों के नागरिक शामिल हैं. मुस्लिम भी.

दूसरा सवाल- ये कानून किन पर लागू होता है.
जवाब- ये कानून सिर्फ उन हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध और पारसियों पर लागू होता है जो 31 दिसंबर 2014 से पहले पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से भारत आए थे और जिनके पलायन की वजह धर्म के आधार पर होने वाला शोषण था. लेकिन ये कानून भारत में आए दूसरे विदेशियों पर लागू नहीं होता. बाहर से आए मुसलमानों पर भी नहीं.

तीसरा सवाल- इस कानून से तीन पड़ोसी देशों से आए हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध और पारसियों को क्या फायदा होगा
जवाब- पासपोर्ट और वीज़ा जैसे दस्तावेज़ ना होने के बावजूद...उन्हें भारत की नागरिकता दी जाएगी.

चौथा सवाल- क्या पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए मुसलमान कभी भारत के नागरिक नहीं बन सकते?
जवाब- भारत के नागरिकता कानून की धारा 6 के नियमों का पालन करके कोई भी भारत की नागरिकता के लिए आवेदन कर सकता है. मौजूदा कानूनों के आधार पर पिछले कुछ वर्षों में कई विदेशी मुसलमानों को भारत की नागरिकता दी गई है. भविष्य में भी ये व्यवस्था कायम रहेगी. यानी अगर कोई मुसलमान किसी भी देश से भारत आता है और भारत का नागरिक बनना चाहता है तो उसे सिर्फ कुछ नियम कायदों का पालन करना होगा और सभी दस्तावेज़ सही पाए जाने पर उसे भारत की नागरिकता मिल जाएगी.

पांचवां सवाल- क्या नए नागरिकता कानून के लागू हो जाने के बाद अवैध रूप से भारत आए मुसलमानों को वापस भेज दिया जाएगा..
जवाब- नहीं. क्योंकि इस नए कानून में अवैध प्रवासियों को वापस भेजने का प्रावधान नहीं है. इन लोगों को वापस भेजने की प्रक्रिया पहले से मौजूद कानूनों के तहत पूरी की जाएगी.

और सबसे बड़ी बात ये है कि सिर्फ पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से भारत आए हिंदुओं को ही नए कानून के तहत नागरिकता दी जाएगी. अगर किसी और देश का हिंदू भारत आकर नागरिकता मांगता है तो उसे इस नए कानून से कोई फायदा नहीं होगा.

भ्रम और अफवाह
एक अफवाह ये भी फैलाई जा रही है कि इस नए कानून के तहत भारतीय मुसलमानों से उनकी नागरिकता छीन ली जाएगी. लेकिन ये सरासर झूठ है क्योंकि CAA किसी भारतीय नागरिक पर लागू नहीं होता है.

कुछ लोग ये भ्रम भी फैला रहे हैं कि नागरिकता कानून के बाद पूरे देश में NRC लागू कर दिया जाएगा. मुसलमानों को छोड़कर सभी शरणार्थियों को भारत का नागरिक बना दिया जाएगा और मुसलमानों को डिटेंशन कैंपों में भेज दिया जाएगा. लेकिन ये भी कोरा झूठ है...क्योंकि नागरिकता कानून का NRC से कुछ लेना देना नहीं है. NRC से जुड़े कानूनी प्रावधान 2004 से ही नागरिकता कानून 1955 का हिस्सा हैं और CAA की वजह से इनमें कोई बदलाव नहीं हुआ है.