वर्ल्ड वॉटर डे : केपटाउन के बाद भारत के इस शहर पर मंडरा रहा है जलसंकट

बेंगलुरु का भूमि जल स्तर पिछले दो दशक में 10-12 मीटर से गिरकर 76-91 मीटर तक जा पहुंचा है. साथ ही शहर में बोर-वेल की संख्या तीस साल में पांच हजार से बढ़कर 4.5 लाख हो गई है. 

वर्ल्ड वॉटर डे : केपटाउन के बाद भारत के इस शहर पर मंडरा रहा है जलसंकट
बेंगलुरु में 79 प्रतिशत जलाशय अनियोजित शहरीकरण और अतिक्रमण की भेंट चढ़ चुके हैं

नई दिल्ली : 22 मार्च को वर्ल्ड वॉटर डे के रुप में मनाया जाता है. पिछले दिनों एक रिपोर्ट आई थी कि दक्षिण अफ्रीका के शहर केपटाउन में कुछ ही दिनों का पानी बचा हआ है यानि की एक वक्त के बाद शहर में पानी खत्म हो जाएगा. जलसंकट का खतरा सिर्फ केपटाउन पर ही नहीं बल्कि आने वाले समय में विश्व के कई देशों पर मंडराने वाला है. पर्यावरण के क्षेत्र में कार्यरत संस्था सेंटर फॉर सांइस (सीएसई) की मदद से प्रकाशित पत्रिका डाउन टू अर्थ की रिपोर्ट में इस बात का खुलासा हुआ है कि ब्राजील के साओ पाउलो और भारत के बेंगलुरु में जल्द ही पानी की किल्लत हो जाएगी. 

शहरीकरण की भेंट चढ़ते जलाशय
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत के शहर बेंगलुरु में 79 प्रतिशत जलाशय अनियोजित शहरीकरण और अतिक्रमण की भेंट चढ़ चुके हैं. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि जलाशय के खत्म होने के लिए शहर के कुल क्षेत्रफल में 1973 की तुलना में निर्माणाधीन क्षेत्र में 77 प्रतिशत इजाफे का अहम योगदान है. बेंगलुरु का भूमि जल स्तर पिछले दो दशक में 10-12 मीटर से गिरकर 76-91 मीटर तक जा पहुंचा है. साथ ही शहर में बोर-वेल की संख्या तीस साल में पांच हजार से बढ़कर 4.5 लाख हो गई है. 

2030 तक जलसंकट से गुजर सकती है आधी दुनिया

भारत में पानी को लेकर हालात खराब
द वॉटर गैप’ रिपोर्ट के मुताबिक युगांडा, नाइजर, मोजांबिक, भारत औऱ पाकिस्तान लिस्ट में उन देशों में शामिल हैं जहां पर सबसे ज्यादा जलसंकट मंडरा रहा है. रिपोर्ट में कहा गया है कि इन देशों में कई फीसदी लोगों को साफ पानी पीना नसीब नहीं हो पा रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक भारत में 16.3 करोड़ लोग साफ पानी के लिए तरस रहे हैं. बता दें कि पिछले साल इसी रिपोर्ट में यह आंकड़ा 6 करोड़ 30 लाख लोगों का था. यानि की महज एक साल में इस आंकड़े में कई गुणा इजाफा हो गया है. 

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जून-जुलाई में नलों में पानी की आपूर्ति खत्म
रिपोर्ट के दावे के अनुसार दक्षिण अफ्रीका के केपटाउन में जलसंकट की भयावहता का अनुमान इस बात से लगाया जा सकता है कि आगामी जून-जुलाई में शहर के सभी नलों में पानी की आपूर्ति खत्म हो जाएगी. एक अनुमान के मुताबिक वर्ष 2031 तक बेंगलुरु की आबादी 3.5 फीसदी प्रति वर्ष दर के साथ 2.03 करोड़ हो जाएगी.