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ZEE जानकारी: नरसिम्हा राव - एक भुला दिया गया नायक

नरसिम्हा राव को 'Father of Indian Economic Reforms,' यानी 'भारत के आर्थिक सुधारों का जनक' कहा जाता है. 

ZEE जानकारी: नरसिम्हा राव - एक भुला दिया गया नायक

और अब हम भारत के सबसे विद्वान प्रधानमंत्री P V नरसिम्हा राव को श्रद्धांजलि देने वाला एक DNA टेस्ट करेंगे. नरसिम्हा राव 17 भाषाएं बोल सकते थे. इनमें 9 भारतीय भाषाएं थीं और 8 विदेशी भाषाएं थीं. नरसिम्हा राव को 'Father of Indian Economic Reforms,' यानी 'भारत के आर्थिक सुधारों का जनक' कहा जाता है. 

नरसिम्हा राव से पहले चंद्रशेखर भारत के प्रधानमंत्री थे. चंद्रशेखर के कार्यकाल में भारत दिवालिया होने की कगार पर खड़ा था. अपने कर्ज़ चुकाने के लिए भारत को अपना सोना विदेशों में गिरवी रखना पड़ा था. ये भारत के लिए बहुत शर्मनाक स्थिति थी. भारत की अर्थव्यवस्था को इस खराब दौर से बाहर निकालने का श्रेय नरसिम्हा राव को जाता है.

भारत की विदेश नीति को विस्तार देने में भी उनका बहुत बड़ा योगदान था . आज हम भारत की विदेश नीति का जो विस्तार देख रहे हैं, उसकी शुरुआत नरसिम्हा राव ने ही की थी . कुल मिलाकर हम ये कह सकते हैं कि नरसिम्हा राव भारत के बहुत दूरदर्शी प्रधानमंत्री थे . 

लेकिन ये बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि नरसिम्हा राव को वो सम्मान कभी नहीं मिला जिसके वो हकदार थे .नरसिम्हा राव की पार्टी, कांग्रेस और और इसकी First Family यानी गांधी परिवार की तरफ से भी उन्हें कभी, कोई सम्मान नहीं दिया गया.

आज 28 जून है. नरसिम्हा राव का जन्म आज से 98 वर्ष पहले... 1921 को तेलंगाना के वारंगल ज़िले में हुआ था . अंग्रेज़ों के ज़माने में ये जगह, हैदराबाद स्टेट में थी . आज का दिन नरसिम्हा राव को सम्मान और श्रद्धांजलि देने का है .

लेकिन ये बहुत दुख की बात है कि आज भी कांग्रेस के अध्यक्ष राहुल गांधी ने नरसिम्हा राव को याद करते हुए कोई Tweet नहीं किया. कांग्रेस ने नरसिम्हा राव के लिए किसी श्रद्धांजलि कार्यक्रम का आयोजन नहीं किया . आज कांग्रेस पार्टी ने अपने आधिकारिक Twitter Handel से सिर्फ एक Tweet करके सिर्फ रस्म अदायगी की है . 

लेकिन दूसरी तरफ... प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नरसिम्हा राव को श्रद्धांजि देते हुए एक Tweet किया है. जिसमें लिखा है कि नरसिम्हा राव एक महान विद्वान और अनुभवी प्रशासक थे. उन्होंने बहुत निर्णायक मोड़ पर भारत का नेतृत्व किया था . रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के अलावा कई केंद्रीय मंत्रियों और बीजेपी के नेताओं ने भी Tweet करके नरसिम्हा राव को श्रद्धांजलि दी है .

नरसिम्हा राव की मृत्यु 23 दिसंबर 2004 को दिल्ली में हुई थी . उस वक्त केंद्र में यूपीए की सरकार थी . मनमोहन सिंह Prime Minister थे. उस समय कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को Super Prime Minister कहा जाता था. लेकिन, दिल्ली में नरसिम्हा राव के अंतिम संस्कार के लिए दो गज़ ज़मीन भी नहीं दी गई. इतना ही नहीं... नरसिम्हा राव के पार्थिव शरीर को कांग्रेस के मुख्यालय में प्रवेश नहीं दिया गया. भारत के इतने योग्य प्रधानमंत्री का इस तरह का अपमान शायद कभी नहीं हुआ होगा . 

यही वजह है कि नरसिम्हा राव का परिवार अब ये मांग कर रहा है कि इस अन्याय और अपमान के लिए सोनिया गांधी और राहुल गांधी को माफी मांगनी चाहिए . 
आज हम आपको नरसिम्हा राव का एक भाषण सुनाना चाहते हैं . ये भाषण 15 अगस्त 1992 का है .राव ने लाल किले की प्राचीर से अर्थव्यवस्था की स्थिति के बारे में बताया था .

आपने देखा होगा... अक्सर हमारे देश के विद्वान आर्थिक उदारीकरण के लिए नरसिम्हा राव की सरकार में वित्त मंत्री रहे मनमोहन सिंह को Credit देते हैं . लेकिन ये विद्वान कभी भी नरसिम्हा राव का नाम नहीं लेते हैं . जिन्होंने मनमोहन सिंह की प्रतिभा को पहचाना और उनको वित्त मंत्री बनाया . नरसिम्हा राव के साथ ये अन्याय इसलिए किया गया क्योंकि वो गांधी परिवार के चहेते नहीं थे . क्योंकि गांधी परिवार ये नहीं चाहता था कि कांग्रेस पार्टी में गांधी खानदान के अलावा किसी और नेता का गुणगान हो. 

बीजेपी के संस्थापकों में से एक लाल कृष्ण आडवाणी ने अपनी जीवनी 'मेरा देश मेरा जीवन' में लिखा है कि नरसिम्हा राव की सरकार के दौर में मैंने कई बार ये कहा था कि लाल बहादुर शास्त्री के बाद नरसिम्हा राव भारत के सबसे अच्छे प्रधानमंत्री हैं . 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कई बार गांधी परिवार को उनकी गलती याद दिलाई है . लेकिन इसके बाद भी गांधी परिवार ने कभी नरसिम्हा राव को वो सम्मान नहीं दिया, जिसके वो हकदार थे .

नरसिम्हा राव ने अपने कार्यकाल में भारतीय विदेश नीति के विस्तार की प्रक्रिया को शुरू किया था. वर्ष 1992 में नरसिम्हा राव ने इज़राइल के साथ भारत के संबंधों को बढ़ावा देना शुरू किया. उन्होंने अपने कार्यकाल में इज़राइल के साथ भारत के रिश्तों को आधिकारिक रूप दिया. 

1990 के पहले भारत की विदेश नीति सोवियत संघ की तरफ झुकी हुई थी . लेकिन दूरदर्शी नरसिम्हा राव ने भारत और अमेरिका के बीच संबंधों को बहुत मजबूत किया . 

वर्ष 1992 में भारत और अमेरिका ने मिलकर Malabar Naval Exercise शुरू की थी. आज जापान भी इसमें शामिल होता है . नरसिम्हा राव इस बात को पहले ही समझ चुके थे कि हिंद महासागर में चीन के बढ़ते प्रभाव को कम करने के लिए अमेरिका को साथ लाना बहुत ज़रूरी है . 

Look East Policy भी नरसिम्हा राव ने ही शुरू की थी. इस नीति के तहत भारत ने दक्षिण पूर्व एशिया के देशों के साथ अपने संबंधों को मजबूत किया. आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसी Look East Policy को Act East Policy के रूप में आगे बढ़ाया है. इसी नीति के माध्यम से आज भारत और दक्षिण पूर्व एशिया के देश जैसे... Vietnam, Laos, Cambodia, Thailand और Myanmar के बीच रिश्ते मजबूत हो रहे हैं. 

ज़रा सोचिए, ऐसे दूरदर्शी प्रधानमंत्री का गांधी परिवार आज भी सम्मान नहीं करना चाहता है . लेकिन इतने विद्वान और योग्य प्रधानमंत्री का अपमान करने में कांग्रेस पार्टी ने कोई कसर नहीं छोड़ी . 

23 दिसंबर 2004 को नरसिम्हा राव की मृत्यु हुई . तब केन्द्र में UPA की सरकार थी . लेकिन नरसिम्हा राव के अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली में कोई जगह नहीं दी गई . 

राजनीतिक मामलों के लेखक विनय सीतापति ने नरसिम्हा राव पर एक किताब लिखी है... Half-Lion: How P.V. Narasimha Rao Transformed India

इस किताब में वो लिखते हैं कि सुबह 11 बजे AIIMS में नरसिम्हा राव की मृत्यु हुई. जिसके बाद राव के पार्थिव शरीर को उनके सरकारी आवास 9, मोतीलाल नेहरू मार्ग लाया गया. कांग्रेस के एक नेता आए और उन्होंने नरसिम्हा राव के छोटे बेटे प्रभाकर से कहा कि नरसिम्हा राव का अंतिम संस्कार हैदराबाद में किया जाना चाहिए . हालांकि नरसिम्हा राव के परिवार वालों का तर्क था कि दिल्ली नरसिम्हा राव की कर्मभूमि थी . इसलिए अंतिम संस्कार दिल्ली में ही किया जाना चाहिए .

इसके बाद सोनिया गांधी के करीबी गुलाम नबी आजाद ने भी परिवार वालों को हैदराबाद जाने की सलाह दी . शाम करीब सात बजे, सोनिया गांधी के साथ प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और प्रणब मुखर्जी भी नरसिम्हा राव के सरकारी आवास पर गए . परिवार वालों ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से भी अपनी वही मांग दोहराई . इसके बाद आंध्र प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री Y S राजशेखर रेड्डी ने नरसिम्हा राव के परिवार वालों को मनाना शुरू किया . 

कांग्रेस के बड़े नेताओं के दबाव के बाद परिवारवालों ने हैदराबाद जाना स्वीकार कर लिया . 24 दिसंबर 2004 को यानी उनकी मृत्यु के अगले दिन... नरसिम्हा राव के अंतिम दर्शन के लिए सभी राजनीतिक दलों के नेता आए . इसके बाद सुबह 10 बजे राव के पार्थिव शरीर को गाड़ी में रखा गया . एयरपोर्ट जाते हुए उनके पार्थिव शरीर को 24 अकबर रोड यानी कांग्रेस दफ्तर में ले जाने की योजना थी . 

लेकिन जब उनके पार्थिव शरीर को कांग्रेस दफ्तर के सामने ले जाया गया तो वहां गेट बंद था . उनके पार्थिव शरीर को अंदर नहीं ले जाया गया . आप इस वक्त वो ऐतिहासिक तस्वीरें देख रहे हैं . कांग्रेस दफ्तर के सामने ही एक श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया था . सोनिया गांधी, मनमोहन सिंह, प्रणब मुखर्जी और कांग्रेस के कई बड़े नेता वहां मौजूद थे . लेकिन दुख की बात है कि ये श्रद्धांजलि समारोह कांग्रेस दफ्तर के बाहर चल रहा था . 

नरसिम्हा राव के जीवन पर आधारित किताब Half-Lion में ये भी लिखा गया है कि पूर्व कांग्रेस अध्यक्षों के पार्थिव शरीर को पार्टी दफ्तर में रखने की परंपरा थी . ताकि कार्यकर्ता उन्हें श्रद्धांजलि दे सकें . लेकिन नरसिम्हा राव के मामले में ये नहीं किया गया . एक कांग्रेस नेता ने साफ कहा था कि कांग्रेस के दफ्तर का गेट खोलने का आदेश सिर्फ सोनिया गांधी ही दे सकती थीं . और उन्होंने आदेश नहीं दिया था . नरसिम्हा राव के निधन से कुछ वर्ष पहले माधवराव सिंधिया का निधन हुआ था. और उनके पार्थिव शरीर को कांग्रेस दफ्तर के अंदर लाया गया था .

अब हम आपको वर्ष 2018 की कुछ तस्वीरें दिखाना चाहते हैं . जब पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का निधन हुआ तो उनके पार्थिव शरीर को बीजेपी के दफ्तर में रखा गया . प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इतने भावुक थे कि वो अटल जी के पार्थिव शरीर के साथ पैदल चलते हुए दिल्ली के स्मृति वन पहुंचे . जहां पूरे राजकीय सम्मान के साथ अटल जी को आखिरी विदाई दी गई . 

लेकिन कांग्रेस की संस्कृति में गांधी परिवार ही सर्वे सर्वा है . आपको जानकर आश्चर्य होगा कि नरसिम्हा राव के अंतिम संस्कार में मनमोहन सिंह तो गए लेकिन सोनिया गांधी नहीं पहुंची .