ZEE जानकारी: पैसे की बर्बादी वाले सूचकांक में भारत का स्थान बहुत ऊपर है

अब हम आपका और देश का आर्थिक स्वास्थ्य सुधारने वाली एक नई योजना का विश्लेषण करेंगे. भारत को एक गरीब देश कहा जाता है, विकासशील देश माना जाता है.

ZEE जानकारी: पैसे की बर्बादी वाले सूचकांक में भारत का स्थान बहुत ऊपर है

अब हम आपका और देश का आर्थिक स्वास्थ्य सुधारने वाली एक नई योजना का विश्लेषण करेंगे. भारत को एक गरीब देश कहा जाता है, विकासशील देश माना जाता है. लेकिन भारत के लोग हर साल टोल नाकों पर ही 87 हज़ार करोड़ रुपये का डीज़ल और पेट्रोल खर्च कर देते हैं .  यानी वक्त और पैसे की बर्बादी वाले सूचकांक में भारत का स्थान बहुत ऊपर हो गया है.  लेकिन अब सरकार Highways पर होने वाली इस बर्बादी को रोकने के लिए एक नई योजना ला रही है. अब सभी Private और Commercial गाड़ियों पर Fastag डिवाइस लगाना जरूरी हो जाएगा. आप 15 दिसंबर तक अपनी गाड़ी में Fastag डिवाइस लगवा सकते हैं. सबसे पहले आपको बताते हैं कि ये Fastag क्या है ?

Fastag एक इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस है .  इसमें RFID यानी Radio Frequency Identificatin Device लगी होती है. आपकी गाड़ी जैसे ही Fastag टोल Lane में जाती है तो वहां लगा सेंसर इस डिवाइस के संपर्क में आता है .  सेंसर और डिवाइस का संपर्क होते ही Fastag के अकाउंट से टोल फीस ऑटोमेटिक कट जाएगी .  इस तरह टोल प्लाजा पर आप बिना रुके ही आगे चले जाएंगे. 

आपको यहां ध्यान रखना होगा कि यह Fastag डिवाइस प्रीपेड होता है. यानी अगर इस डिवाइस को आपने पहले से रिचार्ज नहीं किया हुआ है तो फिर आपको टोल फीस से 2 गुना ज्यादा पैसा देना ही होगा .  अब बताते हैं कि आप किस तरह से Fastag डिवाइस को अपनी गाड़ी पर लगवा सकते हैं. 

आप दो तरीके से अपनी गाड़ी में Fastag डिवाइस लगवा सकते हैं. आप चाहें तो घर बैठे ही डिवाइस लगवा सकते हैं लेकिन इसके लिए आपको 500 रुपये से ज्यादा खर्च करने पड़ेंगे .  घर पर लगवाने के लिए अधिकृत किए गए 22 बैंकों के हेल्पलाइन नंबर पर संपर्क करना होगा. अगर फ्री में Fastag डिवाइस लगवाना चाहते हैं तो आपको नेशनल हाईवे के किसी भी टोल प्लाजा पर आना होगा.  लेकिन ध्यान रहे कि डिवाइस को लगवाने के लिए कुछ जरूरी कागजात भी रखना होगा .  जैसे गाड़ी की RC यानी Registration certificate, गाड़ी मालिक का पासपोर्ट साइज फोटो और KYC के लिए आधार कार्ड या वोटर कार्ड या फिर ड्राइविंग लाइसेंस. 
 

Fastag को बेहतर तरीके से समझने के लिए अब आपको हर वो जानकारी देंगे जो सवाल के रूप में आपके मन में आ रहा होगा . पहला सवाल तो आपके दिमाग में यही आ रहा होगा कि क्या 15 दिसंबर तक Fastag लगवाना जरूरी है . .तो आपको बता दें कि अभी इसे लगवाने में आप कुछ देरी भी कर सकते हैं .  लेकिन Fastag नहीं होने पर आपको टोल प्लाजा पर सिर्फ 1 लेन ही मिलेगा जिसमें लंबे जाम का सामना करना पड़ सकता है . 

आप यह भी सोच रहे होंगे कि अगर Fastag लगवा लिया लेकिन इसे कैसे रिचार्ज करेंगे. तो जान लीजिए कि आपको मोबाइल फोन के Play Store में जाकर My Fastag App इंस्टॉल करना होगा. इस App को Indian Highways Management Company Ltd कंपनी ने बनाया है. इसी Mobile App से आप अपने Fastag को एक्टिवेट भी कर सकेंगे और UPI या Credit Card या Debit Card या Net Banking के जरिए आसानी से रिचार्ज कर सकेंगे .  Fastag को 100 रुपये से लेकर अधिकतम 1 लाख रुपये तक का Recharge कर सकते हैं .  Fastag एक बार लेने पर 5 साल के लिए Valid रहेगा . 

आपके मन में यह भी सवाल आ सकता है कि एक ही डिवाइस को क्या अलग-अलग गाड़ियों में प्रयोग कर सकते हैं ? तो आपको बता दें ... बिल्कुल नहीं .  एक डिवाइस को उसी रजिस्टर्ड गाड़ी नंबर के लिए प्रयोग करना होगा .  अगर आप दूसरी गाड़ी में डिवाइस का प्रयोग करते हैं तो इसे Block किया जा सकता है.  इसलिए इसका जरूर ध्यान रखें . 

अब आप यह भी सोच रहे होंगे कि डिवाइस लगा लिया और रिचार्ज भी करा लिया लेकिन उसमें Balance का कैसे पता लगाएंगे .  क्योंकि ये मोबाइल फोन की तरह तो नहीं कि बैलेंस चेक कर सकें .  ... तो आपको बता दें कि Fastag डिवाइस से जब कभी टोल टैक्स कटेगा तो आपके रजिस्टर्ड मोबाइल फोन नंबर पैसे कटने और बैलेंस का SMS मिलेगा .  अगर आपको लगता है कि आपके पैसे ज्यादा कट गए तो आप Customer Care Number 1033 पर भी शिकायत भी कर सकते हैं .  हालांकि ये हेल्पलाइन नंबर अभी 15 दिसंबर से एक्टिवेट होगा . 

आपके मन में यह भी सवाल हो सकता है कि क्या इस डिवाइस के प्रयोग से कोई Cashback भी मिलेगा .  अगर ये सवाल आपके मन में भी है तो आप खुश होइए क्योंकि CashBack मिलेगा .  2019-20 में इसके इस्तेमाल पर आपको 2.5 % का Cashback मिलेगा .  किसी भी टोल प्लाजा पर लगने वाले चार्ज का 2.5 % Cashback आपको 1 हफ्ते में मिल जाएगा . 

अब Fastag का वो विश्लेषण करेंगे जो आपकी आर्थिक सेहत से भी जुड़ा है .  Transport Corporation of India और IIM कोलकाता की स्टडी बताती है अगर देश में सभी टोल प्लाजा पर इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन को शुरू किया जाए तो हर साल 87 हजार करोड़ रुपये की बचत होगी. 

इस बचत को ऐसे समझें कि अभी देश भर के सभी टोल प्लाजा पर Waiting Time की वजह से हर साल करीब 87 हजार करोड़ रुपये का ईधन और समय बर्बाद होता है . ... यानी जब पेट्रोल कम खर्च होगा तो वायु प्रदूषण भी कम होगा.  जाहिर है इससे आपका स्वास्थ्य अच्छा रहेगा. 

Fastag के प्रयोग के बारे में सबसे पहले नोबल विजेता अर्थशास्त्री William Vickrey ने सुझाव दिया था. दुनिया में पहला टोल प्लाजा Norway देश के Bergen शहर में शुरू हुआ था .  Norway के ही Alesund में पहली बार अक्टूबर 1987 में Electronic Toll Collection का प्रयोग हुआ था.

यानी दुनिया में अब से 32 साल पहले से Fastag का प्रयोग हो रहा है.  इसलिए अब जरूरत है कि हम भी इसका ज्यादा से ज्यादा प्रयोग करें .  क्योंकि इसके प्रयोग से हमारे पर्यावरण में भी सुधार होगा और हम समय भी बचा सकेंगे.