Sleeping while Sitting: वर्क स्पेस में कुर्सी पर बैठे-बैठे सोने की है आदत, तो तुरंत बदल दें; जा सकती है जान
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Sleeping while Sitting: वर्क स्पेस में कुर्सी पर बैठे-बैठे सोने की है आदत, तो तुरंत बदल दें; जा सकती है जान

Sleeping while Sitting: वर्क स्पेस में आपकी चेयर चाहे कितनी भी आरामदायक हो, बैठकर सोना आपको नुकसान ही पहुंचाएगा. इससे शरीर में ब्लड फ्लो बाधित होता है.

Sleeping while Sitting: वर्क स्पेस में कुर्सी पर बैठे-बैठे सोने की है आदत, तो तुरंत बदल दें; जा सकती है जान

नई दिल्ली: अक्सर लोग काम के दौरान थकान की वजह से कुर्सी पर बैठे-बैठे ही सो जाते हैं. डेस्क वर्क करते समय ज्यादातर ऐसा होता है. अगर आपके साथ भी ऐसा होता है, तो इस आदत को तुरंत बदल दें क्योंकि, कुर्सी पर इस तरह बैठे-बैठे सोना आपके लिए खतरनाक हो सकता है. ये आपकी हेल्थ प्रॉब्लम्स को और ज्यादा बढ़ा देगा.

हो सकती हैं ये समस्याएं

कई बार डेस्क पर काम करते-करते आप नींद की झपकी ले लेते हैं. आपकी ये आदत कमर दर्द, गर्दन में दर्द और कंधों में अकड़न वजह बन सकती है. वहीं अगर आप पूरे दिन ही एक जगह पर बैठे रहते हैं, तो ये भी आपको बहुत खतरनाक स्थिति में भी डाल सकता है.

इसकी वजह से डीप वेन थ्रोम्बोसिस की गंभीर समस्या हो सकती है. लंबे समय तक एक ही पोश्चर में बैठे रहने और कुर्सी पर बैठे-बैठे सोने की आदत आपकी सेहत के लिए खतरनाक हो सकती है. 

वर्क स्पेस में आपकी चेयर चाहे कितनी भी आरामदायक हो, बैठकर सोना आपको नुकसान ही पहुंचाएगा. इससे शरीर के जोड़ों में अकड़न आने लगती है.

शरीर को इन समस्याओं से बचाने के लिए स्ट्रेचिंग बेहतर विकल्प हो सकता है. इसके अलावा लेट कर भी शरीर को आराम दे सकते हैं. अगर आप बैठे-बैठे ही सो जाते हैं, तो इससे शरीर में ब्लड फ्लो बाधित होता है.

​डीप वेन थ्रोम्बोसिस का खतरा

अगर आप घंटों एक ही पोश्चर में बैठे रहते हैं, तो इसकी वजह से आपको डीप वेन थ्रोम्बोसिस की समस्या भी हो सकती है. इसमें शरीर में कहीं किसी एक नस के भीतर खून का थक्का बन जाता है. आमतौर पर ये पैर या जांघ में होता है. जब आप डेस्क जॉब के दौरान घंटों सिस्टम पर बैठे रहते हैं या कुर्सी पर ही सोने लगते हैं, तब ऐसा होता है.

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जा सकती है जान 

अगर लंबे समय तक इसे आप इग्नोर करते हैं और इलाज नहीं कराते, तो कई मामलों में ये जानलेवा भी हो सकता है. इसकी वजह ये है कि खून का थक्का रक्त प्रवाह के साथ शरीर के दूसरे हिस्सों जैसे दिमाग या फेफड़े में पहुंचता है, इससे जान जाने का खतरा रहता है.

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. इसे अपनाने से पहले चिकित्सीय सलाह जरूर लें. ZEE NEWS इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

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