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BJP ने अगर दिग्‍व‍िजय के सामने उतारा शिवराज सिंह को तो दोहराई जाएगी 16 साल पुरानी जंग

लोकसभा चुनाव 2019 की लड़ाई में मध्‍य प्रदेश की भोपाल में लड़ाई रोचक हो गई है. बीजेपी ने अब दिग्विजय सिंह के खिलाफ मजबूत प्रत्याशी उतारने के लिए दूसरे प्‍लान पर काम शुरू कर दिया है.

BJP ने अगर दिग्‍व‍िजय के सामने उतारा शिवराज सिंह को तो दोहराई जाएगी 16 साल पुरानी जंग

भोपाल: लोकसभा चुनाव 2019 (Lok Sabha Elections 2019) में मध्‍यप्रदेश की भोपाल सीट पर अब सबकी निगाहें रहेंगीं. इस सीट पर कांग्रेस ने पूर्व मुख्‍यमंत्री दिग्‍व‍िजय सिंह को उतारकर मुकाबले को कड़ा कर दिया है. पिछले 30 साल में कांग्रेस कभी भी इस सीट को जीत नहीं पाई है. लेकिन इस बार कांग्रेस ने मुकाबले को रोचक बना दिया है. अब सवाल यही खड़ा हो रहा है कि इस सीट पर बीजेपी किसे उतारेगी.

भाजपा महकमे में कयास लगाये जा रहे हैं कि मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को पार्टी दिग्विजय के खिलाफ इस सीट से मैदान में उतार सकती है. 18 लाख मतदाताओं वाली भोपाल संसदीय सीट पर चार लाख से अधिक मुस्लिम मतदाता हैं, जिनमें से काफी चौहान के समर्थक हैं. पिछले तीन दशकों से भोपाल लोकसभा सीट भाजपा का गढ़ रहा है. इसलिए इस सीट को बनाए रखने के इरादे से पार्टी ने अपनी रणनीति पर नए सिरे से विचार करना शुरू कर दिया है.

बीजेपी आलाकमान भी ये समझता है कि अगर शिवराज नहीं तो उसे भोपाल जैसी सीट को बचाने के लिए उसे किसी फायरब्रांड नेता की जरूरत पड़ेगी. लेकिन बीजेपी के पिछले 15 साल के शासन में बीजेपी के पास मप्र में कोई ऐसा नेता नहीं बचा है. सबसे बड़े और लोकप्रिय नेता शिवराज सिंह चौहान ही हैं, जो दिग्‍व‍िजय सिंह से टक्‍कर ले सकते हैं.

16 साल पहले दिग्‍व‍िजय और शिवराज की हुई थी भिड़ंत
अगर भोपाल में दिग्‍व‍िजय सिंह के सामने बीजेपी ने शिवराज को उतारा तो दोनों की दूसरी बार भिड़ंत होगी. इससे पहले 2003 में जब विधानसभा चुनाव हुए थे, उस समय बीजेपी ने राघोगढ़ में दिग्‍व‍िजय सिंह के सामने शिवराज को उतार दिया था. दिग्‍व‍िजय तब प्रदेश के मुख्‍यमंत्री थे, हालांकि शिवराज चुनाव हार गए थे, लेकिन उन्‍होंने दिग्‍व‍िजय सिंह को उनके ही घर में अच्‍छी टक्‍कर दी थी. इस बार मामला अलग है. अब शि‍वराज करीब 13 साल मप्र के सीएम रह चुके हैं. और प्रदेश का सबसे लोकप्रिय चेहरा हैं. ऊपर से दिग्‍व‍िजय अपनी होम टर्फ पर नहीं हैं.  

क्‍यों जरूरी हैं शिवराज....
मध्‍यप्रदेश में बीजेपी के पास शिवराज के अलावा ऐसा बड़ा चेहरा नहीं है. कई लोग साध्‍वी प्रज्ञा का नाम भी उछाल रहे हैं. लेकिन साध्‍वी प्रज्ञा ने कभी बीजेपी में काम नहीं किया. ऐसे में भोपाल में बीजेपी ही उनका साथ देगी, इस पर संशय है. दूसरी बार दिग्‍व‍िजय सिंह अपने मैनेजमेंट के लिए जाने जाते हैं, ऐसे में बीजेपी की ओर से कोई बड़ा चेहरा ही उन्‍हें चुनौती दे सकता है.

मध्‍यप्रदेश बीजेपी के अध्‍यक्ष बोले....
मध्य प्रदेश भाजपा अध्यक्ष राकेश सिंह से जब सवाल किया गया कि क्या भाजपा भोपाल सीट से दिग्विजय के खिलाफ चौहान को मैदान में उतारेगी, इस पर उन्होंने कहा, ‘‘मैं अभी कुछ भी नहीं कह सकता हूं. पार्टी का केन्द्रीय नेतृत्व ही उनके (चौहान) बारे में निर्णय करेगा.’ उन्होंने कहा, ‘‘वह (चौहान) पूर्व मुख्यमंत्री हैं. केन्द्रीय नेतृत्व निर्णय करेगा कि उन्हें लोकसभा चुनाव लड़ाना है या नहीं.’ दिग्विजय के खिलाफ मजबूत उम्मीदवार के बारे में पूछे जाने पर राकेश ने कहा, ‘‘आप सभी दिग्विजय सिंह को टफ उम्मीदवार मानते हैं. मगर मैं अपने मित्र से भी यही कह रहा था और आपसे भी कह रहा हूं कि दिग्विजय का चुनाव हारना तय है.’ उन्होंने दावा किया, ‘‘दिग्विजय सिंह चुनाव जीतने वाला चेहरा नहीं हैं. वह माहौल बिगाड़ने वाला चेहरा हो सकते हैं. हम नहीं मानते कि दिग्विजय भोपाल से जीतेंगे.’

द‍िग्‍व‍िजय की पहली पसंद थी राघोगढ़
राघौगढ़ राजघराने से ताल्लुक रखने वाले दिग्विजय अपने गृह जिले स्थित राजगढ़ लोकसभा सीट से चुनाव लड़ना चाहते थे, लेकिन कमलनाथ ने उन्हें मुश्किल सीट भोपाल पर चुनाव लड़ने को कहा. राजगढ़ से वह वर्ष 1984 एवं 1991 में कांग्रेस की टिकट पर जीत कर सांसद रह चुके हैं. इस बीच, यहां मध्य प्रदेश भाजपा के आला नेताओं ने रविवार को बंद कमरे में बैठक की. इस बैठक में मध्य प्रदेश भाजपा अध्यक्ष राकेश सिंह, शिवराज सिंह चौहान एवं पार्टी के प्रदेश संगठन महामंत्री सुहास भगत शामिल थे.

बीजेपी ने दूसरे प्‍लान पर काम शुरू किया
भोपाल संसदीय सीट में आठ विधानसभा क्षेत्र आते हैं. पिछले साल नवंबर में हुए विधानसभा चुनाव में इनमें से तीन सीटों पर कांग्रेस जीती थी, जबकि भाजपा पांच सीटों पर जीती थी. हालांकि, भाजपा को इन आठ विधानसभा सीटों पर कांग्रेस से ज्यादा मत मिले थे, लेकिन दोनों दलों के बीच मतों का अंतर ज्यादा नहीं था. भाजपा के एक नेता ने बताया, ‘‘भाजपा की प्रदेश चुनाव समिति ने पहले भोपाल के महापौर आलोक शर्मा और भाजपा के प्रदेश महासचिव वी डी शर्मा का नाम पार्टी की केन्द्रीय चुनाव समित को भेजा था. लेकिन कांग्रेस द्वारा दिग्विजय को भोपाल सीट से उतारे जाने के बाद भाजपा ‘बी प्लान’ पर काम कर रही है.’’

आखिरी बार 1984 में जीती थी कांग्रेस
कांग्रेस ने वर्ष 1984 में हुए लोकसभा चुनाव में भोपाल सीट से जीत दर्ज की थी. तब इंदिरा गांधी की हत्या के बाद देश में कांग्रेस की लहर थी, जिसके चलते भोपाल से के. एन. प्रधान जीते थे. इस सीट पर पिछले 30 साल से भाजपा का कब्जा है. इस सीट को भाजपा ने वर्ष 1989 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस से छीनी थी और तब से लेकर अब तक इस सीट पर आठ बार चुनाव हुए हैं और आठों बार भाजपा ने कांग्रेस के प्रत्याशियों को धूल चटाई है. भोपाल सीट पर 12 मई को मतदान होगा.

input : Bhasha