लोकसभा चुनाव 2019: हरियाणा में बीजेपी-INLD के बीच हो सकता है गठबंधन, खट्टर से मिले अभय चौटाला

हरियाणा के इंडियन नेशनल लोक दल (INLD) नेता अभय चौटाला ने सीएम अशोक गहलोत से सोमवार को राजधानी दिल्ली मुलाकात की है.

लोकसभा चुनाव 2019: हरियाणा में बीजेपी-INLD के बीच हो सकता है गठबंधन, खट्टर से मिले अभय चौटाला
इससे पहले भी दोनों दलों में गठबंधन हो चुका है. (फाइल फोटो)

नई दिल्ली: लोकसभा चुनाव 2019 से पहले हरियाणा से एक बड़ी खबर आ रही है. हरियाणा के इंडियन नेशनल लोक दल (INLD) नेता अभय चौटाला ने सीएम अशोक गहलोत से सोमवार को राजधानी दिल्ली में मुलाकात की है. इस दौरान दोनों नेताओं के बीच राज्य में संभावित गठबंधन को लेकर चर्चा हुई है. बताया जा रहा है कि अभय चौटाला के साथ इनेलोलो प्रदेश अध्यक्ष अशोक अरोड़ा भी बैठक में मौजूद रहे. 

दिल्ली के हरियाणा भवन में हुई मुलाकात
सूत्रों के अनुसार, राजधानी दिल्ली स्थित हरियाणा भवन में दोनों दलों के शीर्ष नेताओं के बीच मुलाकात हुई है. लोकसभा चुनाव के पहले हो रही इस बैठक को काफी अहम माना जा रहा है. वैसे, सीएम खट्टर से मुलाकात के बाद मीडिया से बातचीत में गठबंधन की किसी भी संभावना से इंकार किया है. उन्होंने कहा है कि वो वयक्तिगत कार्य से खट्टर से मिलने गए थे.

2 सीटों पर INLD के साथ गठबंधन को लेकर हुई चर्चा
वैसे, हरियाणा के 8 सीटों पर बीजेपी ने अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है. माना जा रहा है कि वहां पर बची दो सीटों पर गठबंधन के तहत अपने उम्मीदवार देने के लिए दोनों नेताओं के बीच चर्चा हुई है. हरियाणा की राजनीती में लंबे समय तक दबदबा रखने वाले चौटाला के INLD ने 2014 के लोकसभा चुनाव में राज्य की 10 सीटों में से 2 पर चुनावी जीत हासिल की थी. इस बार के लोकसभा चुनाव में जाट वोटों को अपने पाले में करने में यह गठबंधन काफी महत्वपूर्ण साबित हो सकता है. 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान लोकदल ने हरियाणा से 2 सीट जीती थी. 

लोकदल में हो चुका है विभाजन
आपको बता दें कि, हरियाणा की राजनीति में अपना दबदबा रखने वाले इंडियन नेशनल लोक दल में विभाजन हो चुका है. हरियाणा के नेता देवीलाल की राजनीतिक विरासत संभालने वाले पूर्व सीएम ओम प्रकाश चौटाला के परिवार में आपसी मनमुटाव के देवीलाल के पोते दुष्यंत सिंह ने अपनी जननायक जनता पार्टी (JJP) का गठन किया. परिवार में चल रहे मनमुटाव के बीच अभय चौटाला को अपनी राजनीतिक जमीन बचाने के लिए इस तरह की कवायत करनी पड़ रही है.

(इनपुट: नितिन धीमन)