अमेठी की सियासी मिट्टी में कौन किसको देगा मात, BJP की इच्छा को पूरा कर पाएंगी स्मृति ईरानी ?

अमेठी कांग्रेस का गढ़ है और सपा-बसपा गठबंधन ने यहां से अपना उम्मीदवार नहीं उतार रहा है, फिर भी अमेठी में इस बार मुकाबला कांटे का हो गया है. 

अमेठी की सियासी मिट्टी में कौन किसको देगा मात, BJP की इच्छा को पूरा कर पाएंगी स्मृति ईरानी ?
फाइल फोटो

नई दिल्ली: लोकसभा चुनाव 2019 के लिए रणभेरी बज चुकी है. राजनीतिक पार्टियों ने अपने-अपने गणित लगाना शुरू कर दिया है. पक्ष और विपक्ष दोनों ओर से योद्धा इस सियासी समर में कूद चुके हैं. 17वीं लोकसभा के लिए 11 अप्रैल से 19 मई के बीच वोटिंग और 23 मई को देश को नई सरकार का एलान हो जाएगा. यूपी की 80 सीटों पर 7 चरणों में मतदान होगा. यूपी की कई सीटों पर राजनीतिक पार्टियों ने अपने-अपने उम्मीदवारों का ऐलान कर दिया है. यूपी की कई सीटों पर मुकाबला दिलचस्प हो गया है. यूपी की अमेठी सीट से जहां बीजेपी ने स्मृति ईरानी और कांग्रेस ने राहुल गांधी के तौर पर अपने प्रत्याशियों का ऐलान कर किया है, वहीं सपा-बसपा गठबंधन ने इस सीट पर अपना प्रत्याशी नहीं उतारने के फैसला किया है. 

कांग्रेस का गढ़ है अमेठी
उत्तर प्रदेश लोकसभा सीट में अमेठी महत्वपूर्ण सीटों में से एक मानी जाती है. अमेठी कांग्रेस का गढ़ है और सपा-बसपा गठबंधन ने यहां से अपना उम्मीदवार नहीं उतार रहा है, फिर भी अमेठी में इस बार मुकाबला कांटे का हो गया है. कांग्रेस अध्यक्ष और अमेठी के मौजूदा सांसद राहुल गांधी के खिलाफ बीजेपी ने स्मृति ईरानी को यहां से टिकट दिया है. राहुल गांधी यहां से तीन बार सांसद रह चुके हैं. 

बीजेपी जीतना चाहती है अमेठी 
स्मृति ईरानी और बीजेपी पूरी तरह अमेठी पर कब्जा करना चाहती हैं. हालांकि, 2014 में PM मोदी की आंधी के बावजूद कांग्रेस ने यहां से जीत हासिल की थी. बीजेपी स्मृति ईरानी के सहारे यहां अमेठी मुक्त कांग्रेस की तरफ बढ़ती दिखती है. कुछ दिन पहले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेठी की जनता को पांच हजार करोड़ की योजनाओं का तोहफा दिया. 

2014 में ये था समीकरण
साल 2014 में राहुल गांधी ने स्मृति ईरानी को पराजित किया था. आम आदमी पार्टी (आप) के कुमार विश्वास भी यहां से चुनाव लड़े थे, जिनकी जमानत जब्त हो गई थी. समाजवादी पार्टी ने इस सीट से अपना प्रत्याशी नहीं उतारा था. साल 2014 के लोकसभा चुनाव में राहुल गांधी को 408,651 वोट मिले थे. जबकि बीजेपी की उम्मीदवार स्मृति ईरानी को 300,74 वोट मिले थे. इस तरह जीत का अंतर 1,07,000 वोटों का ही रह गया. जबकि 2009 में कांग्रेस अध्यक्ष की जीत का अंतर 3,50,000 से भी ज्यादा का रहा था.

 

इस सीट पर 16 बार रहा कांग्रेस का कब्जा
अमेठी संसदीय सीट को कांग्रेस का दुर्ग कहा जाता है. इस सीट पर अभी तक 16 लोकसभा चुनाव और 2 उपचुनाव हुए हैं. इनमें से कांग्रेस ने 16 बार जीत दर्ज की है. वहीं, साल1977 में लोकदल और साल 1998 में बीजेपी को जीत मिली है. जबकि बसपा और सपा अभी तक अपना खाता नहीं खोल सकी है.