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मालदा उत्तर लोकसभा सीट पर दिखेगी साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण की राजनीति, TMC-BJP में कांटे का मुकाबला

जब से यह लोकसभा सीट सत्ता में आई है, तब से ज्यादातर समयय यहां पर कांग्रेस का कब्जा रहा है. पहले लोकसभा चुनाव से लेकर अब तक दो बार ही ऐसे मौके आए जब माकपा जीत दर्ज करने में कामयाब रही है. 

मालदा उत्तर लोकसभा सीट पर दिखेगी साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण की राजनीति, TMC-BJP में कांटे का मुकाबला
फाइल फोटो.

नई दिल्ली : पश्चिम बंगाल की मालदा लोकसभा सीट एक मुस्लिम बहुल सीट है. पिछले लोकसभा चुनावों में अच्छा प्रदर्शन करने के बाद इस बार बीजेपी जीत हासिल करने की पूरी कोशिश कर रही है. विशेषज्ञों का मानना है कि इस सीट पर साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण का फायदा सभी राजनीतिक दल उठाने की पूरी कोशिश करेंगे. मौजूद सांसद के कांग्रेस छोड़ टीमसी में शामिल होने से राजनीतिक समीकरण पहले के मुकाबले ज्यादा बदल गए हैं. 

वर्तमान सांसद के दल बदलने के बाद कांग्रेस ने इशा खान चौधरी पर भरोसा जताया है. वहीं, बीजेपी ने कांग्रेस के उम्मीदवार से मुकाबला करने के लिए खगेन मुर्मू को टिकट दिया है, जबकि सीपीएम ने विश्वनाथ घोष को टिकट दिया है. मुख्य राष्ट्रीय पार्टियों के कई स्थानीय और अन्य राज्य की सत्ता पर कायम पार्टियां जैसे बहुजन समाज पार्टी, शिवसेना, बहुजन मुक्ति पार्टी समेत कई निर्दलीय कैंडिडेट भी अपनी किस्मत आजमां रहे हैं. 

सीट पर ज्यादतार रहा है कांग्रेस का कब्जा
जब से यह लोकसभा सीट सत्ता में आई है, तब से ज्यादातर समयय यहां पर कांग्रेस का कब्जा रहा है. पहले लोकसभा चुनाव से लेकर अब तक दो बार ही ऐसे मौके आए जब माकपा जीत दर्ज करने में कामयाब रही है. 

क्या था 2014 का जनता का फैसला
2014 के चुनावों की बात करें तो उस वक्त मालदा उत्तर से कांग्रेस की गनी खान चौधरी ने जीत दर्ज की थी. मालदा मुस्लिम बहुल क्षेत्र है और यह इलाका कांग्रेस का गढ़ रहा है, लेकिन अब इस इलाके में सियासी तौर पर दाखिल होने के लिए बीजेपी के साथ तृणमूल कांग्रेस भी जोर आजमाइश कर रही है और इस बार मुकाबला कांटे की टक्कर का होने वाला है.