नकली नोटों से निपटने में बैंकों की भूमिका अहम

देश में नकली नोटों की पहचान कर उन्हें परिचालन से अलग करने में बैंकों की बड़ी भूमिका है। रिजर्व बैंक ने बैंकों को सलाह दी है कि वह जाली नोटों के मामले में प्रणाली को कारगर बनायें और काउंटर पर प्राप्त नोटों को मशीनों पर उचित रूप से प्रमाणित करने के बाद ही परिचालन में लाये।

नई दिल्ली : देश में नकली नोटों की पहचान कर उन्हें परिचालन से अलग करने में बैंकों की बड़ी भूमिका है। रिजर्व बैंक ने बैंकों को सलाह दी है कि वह जाली नोटों के मामले में प्रणाली को कारगर बनायें और काउंटर पर प्राप्त नोटों को मशीनों पर उचित रूप से प्रमाणित करने के बाद ही परिचालन में लाये। देश में नकली मुद्रा के लगातार बढ़ते प्रचलन के सवाल पर वित्त मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि रिजर्व बैंक ने इस पर काबू पाने के लिये कई उपाय किये हैं। रिजर्व बैंक ने बैंकों को निर्देश दिया है कि 100 रपये और इससे अधिक मूल्यवर्ग के बैंक नोटों की मशीन पर प्रामाणिकता तथा उपयुक्तता की पूरी जांच के बाद ही उन्हें काउंटरों और एटीएम के जरिये पुन: जारी किया जाना चाहिये। बैंकिंग विनिमय अधिनियम 1949 के अंतर्गत इस बारे में सभी अनुसूचित बैंकों को निर्देश जारी किये गये हैं।
सूत्रों के अनुसार बैंकों से आम आदमी के हितों की रक्षा करते हुये जाली नोटों की सूचना देने तथा उनकी पहचान प्रक्रिया को तर्कसंगत बनाने को कहा गया है। बैंकों से कहा गया है कि वह अपनी प्रणाली को इस ढंग से कारगर बनायें ताकि वे जाली बैंक नोटों का जोखिम उठायें, न कि यह जोखिम आम आदमी उठाये जिनके पास अनजाने में नकली नोट आ जाते हैं।
बैंकों से कहा गया है कि एकल लेनदेन में यदि चार जाली नोटों का पता लगता है तो ऐसे मामलों की पूरी रिपोर्ट हर महीने पुलिस अधिकारियों को भेजनी होती है। लेकिन यदि किसी एक लेनदेन में पांच से अधिक जाली नोटों का पता चलता है तो ऐसे मामले में क्षेत्र के नोडल पुलिस स्टेशन अथवा पुलिस अधिकारियों के पास एफआईआर दर्ज कराई जानी चाहिये। जारी
सूत्रों के अनुसार बैंकों को सलाह दी गई है कि जहां भी जाली नोटों का पता लग जाता है लेकिन उन्हें जब्त नहीं किया जाता और उनकी सूचना नहीं दी जाती तो यह माना जायेगा कि संबंधित बैंक जाली नोटों के प्रचालन में जानबूझकर शामिल है और उसके खिलाफ दंडात्मक कारवाई की जा सकती है।
जाली नोटों की समस्या से निपटने के लिये गृह मंत्रालय में भी एक विशेष जाली भारतीय करेंसी नोटों (एफआईसीएन) समन्वय समूह गठित किया गया है जो कि देश में जाली करेंसी नोटों की समस्या से निपटने के लिये राज्यों और केन्द्र की विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के बीच आसूचना साझा करता है। इसके अलावा हाल ही में अवैध गतिविधियां (निवारण) अधिनियम 1967 में भी संशोधन कर कानूनी व्यवस्था को सशक्त बनाया गया है। (एजेंसी)

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