भारत ने पाकिस्तान से कहा- सार्थक बातचीत के लिए अनुकूल नहीं समय
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भारत ने पाकिस्तान से कहा- सार्थक बातचीत के लिए अनुकूल नहीं समय

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के विदेशी मामलों के सलाहकार की हुर्रियत नेताओं के साथ मुलाकात से नाराज भारत ने मंगलवार को कहा कि सतत शांति के लिए उपयोगी बातचीत तभी हो सकती है जब ‘भावनाओं और संवेदनाओं का सम्मान’ हो। उन्होंने पाकिस्तानी सेना द्वारा हाल में नियंत्रण रेखा पर संघर्ष विराम के उल्लंघन को ‘‘प्रतिकूल’’ करार दिया।

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गुड़गांव : पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के विदेशी मामलों के सलाहकार की हुर्रियत नेताओं के साथ मुलाकात से नाराज भारत ने मंगलवार को कहा कि सतत शांति के लिए उपयोगी बातचीत तभी हो सकती है जब ‘भावनाओं और संवेदनाओं का सम्मान’ हो। उन्होंने पाकिस्तानी सेना द्वारा हाल में नियंत्रण रेखा पर संघर्ष विराम के उल्लंघन को ‘‘प्रतिकूल’’ करार दिया।
विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद ने एएसईएम मंत्रिस्तरीय बैठक से इतर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के विदेश मामलों के सलाहकार सरताज अजीज के साथ द्विपक्षीय बातचीत की। उन्होंने कहा कि हाल के समय में ऐसी घटनाएं हुई हैं, जो सरकार अथवा भारत में किसी को भी उत्साहवर्धक नहीं लगतीं। खुर्शीद इस दौरान नियंत्रण रेखा के इर्द-गिर्द संघर्ष विराम उल्लंघन का जिक्र कर रहे थे, जिसमें बहुत से भारतीय सैनिक मारे गए।
उन्होंने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि वह प्रतिकूल हैं और मैं नहीं समझता कि किसी ऐसी स्थिति तक पहुंचने की दिशा में संजीदगी है, जहां सार्थक बातचीत शुरू हो सके, चाहे उस बातचीत का नतीजा कुछ भी हो।’
खुर्शीद ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘सार्थक बातचीत (भारत और पाकिस्तान के बीच) के लिए अनुकूल माहौल तैयार करना होता है और यह दोनो तरफ से होना चाहिए। यह केवल एक तरफ से नहीं हो सकता। दुर्भाग्य से इनमें से कुछ घटनाएं किसी न किसी तरह से प्रतिकूल हैं।’’
हुर्रियत और अन्य पृथकतावादी नेताओं के साथ अजीज की मुलाकात के बारे में पूछे जाने पर खुर्शीद ने कहा, ‘‘मैं कहना चाहूंगा कि हम जो कहते हैं और हम जो करते हैं, हमें सावधानी से देखना होगा।’’ उन्होंने कहा, ‘‘ऐसा नहीं है कि मैं सीमा के उस पार के अपने बहुत वरिष्ठ सहयोगियों को कोई फिजूल सलाह देना चाहता हूं, लेकिन अगर भारत के साथ सार्थक बातचीत की चाह में गंभीरता है तो भारत के विचारों, भारत की भावनाओं और हमारे देश की संवेदनाओं का सम्मान करना जरूरी है।
खुर्शीद ने कहा, ‘‘क्योंकि यह एक ऐसा संवाद नहीं है, जो अलग-थलग होकर हो, यह ऐसा संवाद है जो संदर्भगत है और यह ऐसा संवाद है, जिसे सार्वजनिक सहयोग की जरूरत है। और मुझे लगता है कि भारत के साथ निष्पक्ष और पारदर्शी बातचीत करने में सक्षम होने के लिए पाकिस्तान सरकार को जिस समर्थन की जरूरत थी, हमने उसे हासिल करने में उसकी मदद की।’’
एक विवाद को जन्म देते हुए अजीज ने रविवार को एएसईएम मंत्रिस्तरीय बैठक के लिए यहां पहुंचने के फौरन बाद हुर्रियत कांफ्रेंस के विभिन्न कश्मीरी पृथकतावादी संगठनों से मुलाकात की। सरकार ने इसे एक बहुपक्षीय मंच का विघटनकारी इरादों के लिए ‘बेहद दुर्भाग्यपूर्ण’ दुरूपयोग करार दिया। (एजेंसी)

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