इस पक्षी के पंख आपको कर सकते हैं मालामाल, कीमत जानकर चौंक जाएंगे आप

दुनियाभर में ऐसी कई चीजें हैं, जिनके बारे में हम आज भी बिल्कुल अनजान हैं. क्या आपको पता है कि कुछ पक्षी ऐसे भी हैं, जिनके पंखों की कीमत लाखों रुपए में है. जी हां, इसी वजह से पंखों को खोजने के लिए लोग महीनों लगा देते हैं. एक ऐसा पक्षी जिसका घोसला आसानी से नहीं मिल पाता. शिकारी भी जंगलों में महीनों तक खोजते फिरते हैं. अगर उन्हें उस पक्षी के पंख मिल जाते तो वह मालामाल हो जाते हैं.

अल्केश कुशवाहा | Aug 03, 2021, 10:39 AM IST
1/5

लाखों में है पंखों की कीमत

cost of wings is in lakhs

चलिए हम बताते हैं आखिर ऐसा कौन सा पक्षी है, जिसके पंखों की कीमत लाखों में है. आइसलैंड के जंगलों में ईडर पोलर बत्तख (Eider polar duck) मिला करते हैं, जिनके पंख बेहद ही हल्के और गर्म होते हैं. इन पंखों की ज्यादातर डिमांड इंटरनेशनल मार्केट में है. इनके पंक सबसे गर्म तो होते हैं, साथ ही प्राकृतिक फाइबर भी माना जाता है. इसी वजह से पक्षी के पंख सोने के भाव में बाजार में बिकते हैं.

2/5

आइसलैंड में मिलते हैं ये पक्षी

birds are found in Iceland

इंडिया टाइम्स के खबर के मुताबिक, शिकारी पश्चिम आइसलैंड (West Iceland) के ब्रेइआफजोरिउर खाड़ी (Breiðafjörður Bay) में गर्मियों के मौसम में ईडर पोलर बत्तख (Eider polar duck) के खोज के लिए जंगलों में निकलते हैं.

3/5

पंखों के लिए शिकारी पक्षी को नहीं मारते

hunters don't kill birds for feathers

घोसलों में बैठे-बैठे बतख की निचली गर्दन से फाइबर हट जाता है. उस दौरान पंखों के रेशे परिपक्व होते हैं, जब बत्तख उन पर बैठकर अपने अंडे देना शुरू करती है. सबसे अच्छी बात यह है कि इस पंखों को पाने के लिए शिकारी पक्षियों को मारते नहीं.

4/5

इंटरनेशनल मार्केट में खूब डिमांड

Great demand in international market

हालांकि, ईडर पोलर बत्तख में फाइबर की मात्रा बहुत कम होती है जिससे अधिक पंख मिल पाना मुश्किल हो जाता है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में 800 ग्राम फाइबर की कीमत करीब 5000 डॉलर (3.71 लाख रुपये) है.

5/5

लोकल के लिए रोजगार का जरिया

source of employment for local

मालूम हो कि लोकल लोगों के लिए यह बत्तख रोजगार का जरिया है, जिसके पंखों को खोजकर बेचने में उन्हें अच्छे दाम मिल जाते हैं. जानकारी के मुताबिक, करीब एक किलो बत्तख के पंख के लिए करीब 60 घोसलों को ढूंढना पड़ता है और सालभर में सिर्फ तीन बार ही जंगलों में जाकर खोज-बीन करनी पड़ती है.