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टेरर फंडिंग को लेकर FATF ने पाकिस्तान को किया बेनकाब, PAK के बैंक पर भी उठाए सवाल

APG ने अपनी रिपोर्ट में जिन बातों का जिक्र किया है, उसे पाकिस्तान के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है. पाकिस्तान पर ब्लैक लिस्ट होने का खतरा और बढ़ गया है.

टेरर फंडिंग को लेकर FATF ने पाकिस्तान को किया बेनकाब, PAK के बैंक पर भी उठाए सवाल
FATF के एशिया पैसिफिक ग्रुप (APG) ने टेरर फंडिंग को लेकर पाकिस्तान को एक बार फिर से बेनकाब कर दिया है.

नई दिल्ली: दुनियाभर में टेरर फंडिंग पर नजर रखने वाली संस्था फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) के एशिया पैसिफिक ग्रुप (APG) ने टेरर फंडिंग (Terror Funding) को लेकर पाकिस्तान को एक बार फिर से बेनकाब कर दिया है. ग्रुप ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि पाकिस्तान (Pakistan) यूएन प्रतिबंधित आतंकवादियों पर ठोस कार्रवाई नहीं की. एफएटीएफ ने टेरर फंडिंग के मामले में पाकिस्तान के बैंक पर भी सवाल उठाए हैं. 

APG ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रतिबंधित आतंकवादियों हाफिज सईद, मसूर अजहर  और संस्थानों लश्कर-ए-तैयबा, जमात उद दावा, फलाह-ए-इंसानियत फाउंडेशन के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं की.  APG ने अपनी रिपोर्ट में जिन बातों का जिक्र किया है, उसे पाकिस्तान के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है. पाकिस्तान पर ब्लैक लिस्ट होने का खतरा और बढ़ गया है. FATF की एक अहम बैठक 13 से 18 अक्टूबर के बीच होनी है. बैठक से पहले एपीजी की रिपोर्ट पाकिस्तान के लिए बड़ा झटका है. 

गौरतलब है कि FATF ने पाकिस्तान को जून 2018 में संवेदनशील सूची (ग्रे लिस्ट) में डाल दिया था. उस समय पाकिस्तान को 15 माह की डेडलाइन देते हुए एफएटीएफ ने 27 बिंदुओं पर काम करने को कहा था. अगर पाकिस्तान इन बिंदुओं पर खरा नहीं उतरा तो उसे ब्लैक लिस्ट में डाला जा सकता है. अभी वह एफएटीएफ की ग्रे लिस्ट (निगरानी सूची) में है. एफएटीएफ से संबद्ध एशिया-प्रशांत समूह (एपीजी) ने हाल में पाकिस्तान को काली सूची में डाल दिया था.

पिछले महीने हुई FATF की सहयोगी संस्था, एशिया पैसिफिक ग्रुप (APG) की बैठक में भी पाकिस्तान को प्रतिबंधित किए जाने की अनुशंसा की गई है. ऐसे में माना जा रहा है कि 10 दिन बाद होने वाली FATF की बैठक में पाकिस्तान का ब्लैकलिस्ट होना तय है.

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अगर FATF ने पाकिस्तान को ब्लैकलिस्ट किया तो वह और 'कंगाल' हो जाएगा. इसके अलावा पाकिस्तानी रुपया रसातल में जा सकता है. पाकिस्तान पहले ही कर्ज के बोझ से दबा हुआ है. उसे अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से कर्ज मिलने में काफी मशक्कत का सामना करना पड़ रहा है. उसे वैश्विक संस्थाओं से कर्ज मिलना मुश्किल हो जाएगा. पाकिस्तान की आर्थिक हालत और कमजोर हो जाएगी. इसके अलावा, महंगाई और आतंकवाद की मार झेल रहे पाकिस्तान में कोई भी यूरोपियन देश पहले ही निवेश मुश्किल से कर रहे हैं. अगर FATF ने ब्लैकलिस्ट किया तो यूरोपीय देश पाकिस्तान में निवेश से अपने हाथ खींच लेंगे.