ब्रह्मा जी का पूरे भारत में है केवल एक ही मंदिर, इसके पीछे है श्राप से जुड़ी एक कथा

संसार के रचयिता माने जाने वाले भगवान ब्रह्मा की देवता होने के बाद भी पूजा क्यों नही की जाती? आखिर क्यों पूरे भारत में ब्रह्मा जी का है केवल एक ही मंदिर? क्या है इसके पीछे का रहस्य, जानें.

ब्रह्मा जी का पूरे भारत में है केवल एक ही मंदिर, इसके पीछे है श्राप से जुड़ी एक कथा
ब्रह्मा जी का एकमात्र मंदिर

नई दिल्ली: वेद और पुराणों की मानें तो हिंदू धर्म में हमारे 33 कोटि देवी-देवता हैं जिन्हें कुछ लोग 33 करोड़ मानते हैं तो कुछ कोटि को प्रकार. संख्या चाहे जो हो इनमें त्रिमूर्ति यानी 3 देवताओं को सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण माना जाता है. ब्रह्मा (Brahma), विष्णु (Vishnu) और महेश (Mahesh) यानी भगवान शिव (Lord Shiv). ब्रह्मदेव को संसार का रचनाकार माना जाता है, विष्णु को पालनहार और महेश यानी शिव को संहारक. लेकिन हैरानी की बात है कि जिन्होंने सृष्टि की रचना की, उसका निर्माण किया उनकी संसार में पूजा नहीं की जाती.

पुष्कर में है ब्रह्मा जी का एकमात्र मंदिर

हमारे देश और भारत के बाहर भी भगवान शिव और विष्णु के तो कई मंदिर हैं, लेकिन ब्रह्मा जी का पूरे भारतवर्ष में केवल एक ही मंदिर है जो राजस्थान के पुष्कर (Pushkar) में स्थित है. आपके मन में भी यह सवाल जरूर होगा कि आखिर ब्रह्मा जी का मंदिर केवल एक ही क्यों है? आखिर क्यों किसी और जगह पर ब्रह्मा जी के मंदिर का निर्माण नहीं किया गया? बाकी देवताओं की तरह ब्रह्मा जी की पूजा क्यों नहीं की जाती (Not being Worshipped)? ऐसा माना जाता है कि ब्रह्मा जी की पत्नी ने उन्हें श्राप दिया था कि देवता होने के बाद भी उनकी पूजा नहीं होगी. इसके पीछे की पौराणिक कथा, यहां पढ़ें.

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ब्रह्मा जी को मिले श्राप की कथा

पद्म पुराण के अनुसार एक बार ब्रह्मा जी ने संसार की भलाई के लिए पुष्कर में यज्ञ का आयोजिन किया. इस यज्ञ में उन्हें अपनी पत्नी के साथ बैठना था लेकिन उनकी पत्नी सावित्री को पहुंचने में देर हो गई है. पूजा का मुहूर्त बीता जा रहा था इसलिए ब्रह्मा जी ने एक स्थानीय ग्वाल बाला से शादी कर ली और यज्ञ में बैठ गए. जब सावित्री वहां पहुंची और ब्रह्मा जी के बगल में किसी अन्य स्त्री को यज्ञ में बैठे देखा तो वे अत्यंत क्रोधित हो गईं और उसी क्षण उन्होंने ब्रह्मा जी को श्राप दिया कि संसार उन्हें भुला देगा और देवता होने के बाद भी कभी उनकी पूजा नहीं होगी. सावित्री के क्रोध को देखकर यज्ञ में मौजूद सभी देवी-देवताओं ने सावित्री से अपना श्राप वापस लेने के लिए कहा, लेकिन यह संभव नहीं था. इसलिए सावित्री ने कहा कि धरती पर केवल पुष्कर में ही ब्रह्मा जी का मंदिर होगा और वहीं उनकी पूजा होगी. कोई भी दूसरा मंदिर बना तो उसका विनाश हो जाएगा.  

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