Remedies of Saturn: इस महाउपाय से दूर होता है शनि दोष, बनेंगे बिगड़े काम

9 ग्रहों में शनि देव का नाम आते ही लोगों को डर लगने लगता है. शनि की ढैय्या, साढ़े साती और उनकी वक्र दृष्टि को लेकर ये डर और भी बढ़ जाता है.

Remedies of Saturn: इस महाउपाय से दूर होता है शनि दोष, बनेंगे बिगड़े काम
शनि देव.

नई दिल्ली: 9 ग्रहों में शनि देव का नाम आते ही लोगों को डर लगने लगता है. शनि की ढैय्या, साढ़े साती और उनकी वक्र दृष्टि को लेकर ये डर और भी बढ़ जाता है. इस समय धनु, मकर और कुंभ राशि पर साढ़े साती चल रही है. इसमें धनु का पहला चरण, मकर का दूसरा और कुंभ का पहला चरण चल रहा है. वहीं मिथुन और तुला राशि पर शनि की ढैय्या चल रही है. इन दिनों शनि देव मकर राशि में वक्री होकर चल रहे हैं. निश्चित रूप से किसी भी जातक की कुंडली में शनि की स्थिति कमजोर होने पर उसे तमाम तरह के कष्टों का सामना करना पड़ता है लेकिन ऐसा भी नहीं है कि शनि सिर्फ आपको कष्ट ही देते हैं. शनि न्याय के देवता हैं. शनि आपके कर्मों का पूरा फल देते हैं. आइए जानते हैं कि किन उपायों को करने से शनि देव प्रसन्न होकर अपनी कृपा बरसाने लगते हैं.

कैसे रखें शनिवार का व्रत —
शनि की कृपा पाने के लिए शनिवार का व्रत एक चमत्कारिक उपाय है. जिसे विधि-विधान द्वारा करने से शीघ्र ही फल मिलने लगता है. शनिवार के व्रत का प्रारंभ शुक्ल पक्ष के शनिवार के करना चाहिए और इसे कम से कम 19 व्रत जरूर रखना चाहिए. यदि इसे 51 व्रत किया जाए तो यह उत्तम फल प्रदान करने वाला साबित होता है. व्रत के दिन शनि के साधक को प्रात: काल स्नान-ध्यान करके शनि के मंत्र की तीन या फिर 19 माला का जाप करना चाहिए. फिर शनिदेव की लोहे से बनी प्रतिमा को पंचास्नान करवाना चाहिए. यदि संभव न हो तो जल से स्नान करवाएं. इसके बाद साफ पानी में काला तिल, काला फूल, लौंग, चीनी, गंगा जल और थोड़ा सा दूध डालकर पश्चिम की ओर मुख करके पीपल देव को अर्पित करना चाहिए. इस दिन सादा भोजन शाम के समय प्रसाद स्वरूप लें. प्रसाद लेने से पूर्व किसी ब्राह्मण को उड़द के बने आटे के लड्डू, पंजीरी, तेल, तिल आदि का दान जरूर करें. अंतिम व्रत वाले दिन हवन करें और शनि स्तोत्र का पाठ करें. इस व्रत को करने से शनि की साढ़े साती में विशेष लाभ होता है.

शनि का प्रार्थना मंत्र —
सूर्य पुत्रो दीर्घ देहो विशालाक्षः शिवप्रियः। 
मन्दचारः प्रसन्नात्मा पीडां हरतु मे शनिः।।

शनि के इस महामंत्र का जाप करने से शनिदेव शीघ्र ही प्रसन्न होते हैं और साधक की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं.

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शनि का तंत्रोक्त मंत्र – 
"ॐ प्रां प्रीं प्रौं स: शनैश्चराय नम: नमः।"  

जप संख्या – 23,000 जाप  

शनि का दान — 
शनिवार के दिन चाय की पत्ती, काला तिल, लोहे या चमड़े का सामान, तवा, चिमटा, आदि का दान करें.

शनि के महाउपाय 
— पांच या 11 सप्ताह तक शनिवार का व्रत लगातार करें और शिव का विशेष रूप से पूजन करें. 
— शनिवार की रात शिव, हनुमान मंदिर और पीपल के नीचे सरसों के तेल का दिया जलाएं.
— शनिवार को शनि दर्शन एवं शनि देव की प्रतिमा पर सरसों का तेल अर्पण करें.
— शनिवार के दिन शनि के वैदिक या तांत्रिक मंत्र का जाप करें. दशरथ कृत शनैश्चर स्तोत्र का पाठ भी काफी शुभ फल देने वाला होता है. 
— इन सभी उपायों को करने के साथ शनिवार के दिन भूलकर भी तेल, कोयला, लोहा, नमक आदि न खरीदें.

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