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सावन के आखिरी सोमवार के दिन है प्रदोष व्रत का भी संयोग, शुभ मुहूर्त में करें बाबा भोलेनाथ की पूजा

सावन का आखिरी सोमवार का महत्व प्रदोष व्रत होने कारण और भी बढ़ गया है. सावन के सोमवार की तरह ही प्रदोष व्रत में भगवान शिव की ही पूजा की जाती है यह पूजा शाम में की जाती है प्रदोष व्रत हर महीने की त्रयोदशी तिथि के दिन किया जाता है.

सावन के आखिरी सोमवार के दिन है प्रदोष व्रत का भी संयोग, शुभ मुहूर्त में करें बाबा भोलेनाथ की पूजा

नई दिल्लीः आज सावन का चौथा और अंतिम सोमवार है. इस कारण प्रत्येक शिव मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ है. भगवान शिव की कृपा पाने के लिए यह सोमवार सबसे शुभ फलदायी है. ज्येष्ठा नक्षत्र में भगवान शिव की पूजा करने से हर श्रद्धालू को इसका लाभ जरूर मिलता है. धन और संतान की इच्छा रखने वाले लोग इस दिन भगवान शिव का अभिषेक करना न भूलें. 

सावन का आखिरी सोमवार का महत्व प्रदोष व्रत होने कारण और भी बढ़ गया है. सावन का सोमवार की भांति ही प्रदोष व्रत में भगवान शिव की ही पूजा की जाती है यह पूजा शाम में की जाती है प्रदोष व्रत हर महीने की त्रयोदशी तिथि के दिन किया जाता है. इसे शुक्ल और कृष्ण दोनों ही पक्षों की त्रयोदशी के दिन किया जाता है इसलिए इसे तेरस भी कहा जाता है

प्रदोष व्रत की महिमा
शास्त्रों के अनुसार प्रदोष व्रत को रखने से दो गायों को दान देने के समान पुन्य फल प्राप्त होता है. प्रदोष व्रत को लेकर एक पौराणिक में कहा गया है 'एक दिन जब चारों और अधर्म की स्थिति होगी, अन्याय और अनाचार का एकाधिकार होगा, मनुष्य में स्वार्थ भाव अधिक होगी. व्यक्ति सत्कर्म करने के स्थान पर नीच कार्यों को अधिक करेगा. उस समय में जो व्यक्ति त्रयोदशी का व्रत रख, शिव आराधना करेगा, उस पर शिव कृ्पा होगी. इस व्रत को रखने वाला व्यक्ति जन्म- जन्मान्तर के फेरों से निकल कर मोक्ष मार्ग पर आगे बढता है. उसे उतम लोक की प्राप्ति होती है.