स्वच्छता के बिना सम्मान नहीं पाया जा सकता

हमारी स्वच्छता हमारे स्वयं के, हमारे वंश के, हमारी जाति के, हमारे धर्म के और हमारे देश के सम्मान के लिए बेहद जरूरी है. स्वच्छता जीवन का एक अनिवार्य विषय है. इसे वैकल्पिक मानकर अपना सम्मान ना गवाएं.

स्वच्छता के बिना सम्मान नहीं पाया जा सकता

स्वच्छता सभी को आकर्षित करती है, यह सभी को अच्छी लगती है, हम सभी इसे पसंद करते हैं और हमारा मान सम्मान स्वच्छता से बहुत हद तक जुड़ा हुआ है. हम उस व्यक्ति का सम्मान नहीं करते जो गंदा हो या अस्वच्छ वातावरण में रहता हो. आप कल्पना करें कि आप एक प्रसिद्ध व्यक्ति से पहली मुलाकात के लिए जाते हैं. आप उसके घर पर पहुंचते हैं और देखते हैं कि जिस गली में उसका घर है वह बहुत गंदी है. जब आप उसका दरवाजा खटखटाते हैं तो दरवाजे के पास ही कुछ गंदगी, कचरा, बासी खाने की चीजें हैं दरवाजा खुलता है आपका वह व्यक्ति एक शालीन मुस्कान के साथ स्वागत करता है लेकिन घर में सभी ओर गंदगी का आलम है. अब वह प्रसिद्ध व्यक्ति बहुत सी ज्ञान की बात आपको बताता है और वह बातें वाकई बहुत उच्च दर्जे की होती हैं. आप उस घर से वापस आ जाते हैं. अब आप मुझे बताइए की उस व्यक्ति के प्रति आपके मन में कितना सम्मान होगा, उसके घर वालों के प्रति कितना सम्मान होगा और उस गली वालों के प्रति कितना सम्मान होगा, जिन्होंने रास्ते में गंदगी फैलाई थी? वह ज्ञानी व्यक्ति अपने ज्ञान में कितना ही श्रेष्ठ हो, लेकिन उसकी गंदगी या अस्वच्छता की वजह से क्या वह अपना सम्मान नहीं खो चुका होगा.

विश्व इतिहास हो या वर्तमान कई जातियों, वंश शहरों और देशों ने स्वच्छता को प्राथमिकता दी थी. वे जानते थे कि दुनिया में सम्मान स्वच्छता के बिना नहीं मिल सकता. वे चाहे कितने ही बड़े साम्राज्य बना लें लेकिन बिना स्वच्छता के उनकी शक्ति या विराटता या महानता का सम्मान अधूरा है. कई व्यक्ति, जातियां, वंश, धर्म, देश स्वच्छता की उपयोगिता को नहीं समझते, उन्हें सम्मान देने की सामूहिक मनोविज्ञान की यह मूलभूत भावना पता नहीं होती है कि स्वच्छता कितनी ज़रूरी है.

अमेरिका के इतिहास में ही देखें तो यूरोपियन ने नीति लागू की कि आप अमेरिकी राज्यों को खोजिए और जीतिए. जब यूरोपियन ने अमेरिका के राज्यों को खोजा और जीता तो वहां के मूल निवासियों को मार डाला या गुलाम बना लिया गया. खदान खोदने और दूसरे श्रम के कामों के लिए उन्हें मजदूरों की जरूरत पड़ी तो उन्होंने अफ्रीका से गुलामों को बुलाया. इन मजदूरों या गुलामों से खुद को श्रेष्ठ साबित करने के लिए उन्होंने इन्हें गंदगी फैलाने वाला, बीमारी फैलाने वाला और कम अक़्ल घोषित किया. इसके लिए उन्होंने चिकित्सकों, शोधकर्ताओं और प्रयोगशालाओं का चतुराई पूर्ण उपयोग किया. यही वजह है कि मूल अमेरिकी या रेड इंडियंस को वहां पर बहुत बाद में मनुष्य कहलाने का अधिकार मिला उससे पहले वे जानवर के ही समकक्ष माने जाते थे. इनमें अमेरिका के उदारवादी लोग भी उन चतुर लोगों के समर्थक हो गए केवल और केवल अस्वच्छता के आधार पर. रोम के पतन के समय जब बेरोजगारी आम हो गई तो बाहर से आए हुए और वर्षों से रह रहे लोगों को मारने और शहर से खदेड़ने के लिए भी यही अफवाह फैलाई के ये बाहरी लोग अपवित्र हैं, गंदे हैं, रोगों के वाहक हैं... आदि. यह भ्रांति बाहरी रोमवासियों के लिए काल बन गई.

अस्वच्‍छता की भ्रांतियां यदि आपके खिलाफ फैलाई जा रही हों तो व्यक्तिगत या सामूहिक पर उन्हें फौरन दूर करने का प्रयास करना चाहिए. आपके रहन-सहन, खानपान, साफ सफाई का झूठा मानक बना कर यदि कोई आपका दुष्प्रचार कर रहा है तो फौरन सचेत हो जाना चाहिए. व्यक्तिगत तौर पर भी और सामूहिक तौर पर भी. हमारी स्वच्छता हमारे स्वयं के, हमारे वंश के, हमारी जाति के, हमारे धर्म के और हमारे देश के सम्मान के लिए बेहद जरूरी है. स्वच्छता जीवन का एक अनिवार्य विषय है. इसे वैकल्पिक मानकर अपना सम्मान ना गवाएं.

पुनश्च: कई कॉलोनी में घर इसलिए सस्ते होते हैं, क्योंकि वे साफ सुथरी होती हैं और कुछ में इसलिये कौड़ियों के भाव होते हैं, क्योंकि वे गंदी होती हैं. क्या सफाई का महत्व इससे समझ में नहीं आता है हमें? क्या सफाई रखना हमारे लिए एक लाभदायक सौदा नहीं है?

लेखक, चिंतक और चिकित्सक

(डिस्क्लेमर: इस आलेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं)