B'day Special: डेब्यू सीरीज में बने मैन ऑफ द टूर्नामेंट, मैदान पर लगी चोट ने ली जान

रमन लांबा का करियर लंबा नहीं रहा, लेकिन उनके खेलने के अंदाज ने सभी का दिल जीत लिया था.  

B'day Special: डेब्यू सीरीज में बने मैन ऑफ द टूर्नामेंट, मैदान पर लगी चोट ने ली जान
रमन लांबा ने बांग्लादेश और आयरलैंड के लिए भी क्रिकेट खेला था. (फाइल फोटो)

नई दिल्ली: क्रिकेट इतिहास में कई हादसे ऐसे हैं जो फैंस कभी नहीं भूले हैं, भले ही अब वे चर्चा में नहीं आते हों. क्रिकेट मैदान में सिर पर चोट लगने की वजह मौत की चर्चा में अभी भले ही फिलिप ह्यूज की चर्चा होती हो, लेकिन उससे कई साल पहले ही भारतीय उपमहाद्वीप में एक खिलाड़ी की सिर पर गेंद लगने से मौत हो गई थी जिससे भारत सहित पूरा क्रिकेट जगत सहम गया था. हम बात कर रहे हैं पूर्व भारतीय क्रिकेटर रमन लांबा की जिनका बुधवार को जन्मदिन है. 

रमन लांबा का जन्म 2 जनवरी 1960 को हुआ. अंतरराष्ट्रीय करियर में रमन ने एक शानदार शुरुआत की. अपने खेल के अलावा अपने अनोखी लेकिन आकर्षक स्टाइल  के लिए जाने घरेलू क्रिकेट में वह एक बेहतरीन और आक्रामक बल्लेबाज थे, लेकिन महज 38 साल की उम्र में यह शानदार खिलाड़ी को हमसे छिन गया. क्रिकेट के जुनूनी इस खिलाड़ी ने क्रिकेट के मैदान पर खेलते हुए चोटिल होने की वजह से दम तोड़ा था. फील्डिंग के दौरान दुर्घटनावश गेंद से लगी चोट के कारण ही उनकी जान चली गई. उनकी मौत ने क्रिकेट जगत को स्तब्ध कर दिया. लांबा 20 फरवरी, 1998 को ढाका में बांग्लादेश के क्रिकेट क्लब अबाहानी क्रइरा चाकरा के लिए खेल रहे थे. क्लब का मैच मोहम्माडन स्पोर्टिग के खिलाफ था. वहीं फील्डिंग के दौरान गेंद उनके सिर में लगी और तीन दिन बाद उनका निधन हो गया. 

यह खास रिकॉर्ड है लांबा के नाम जो अब भी नहीं टूटा
लांबा को उनकी आक्रामक बल्लेबाजी के लिए जाना जाता था. उन्होंने भारत के पूर्व कप्तान कृष्णमचारी श्रीकांत के साथ सलामी बल्लेबाजी की जिम्मेदारी संभाली थी. लांबा ने अपने करियर के पहले इंटरनेशनल मैच से ही सबका ध्यान अपनी तरफ खींच लिया था. लांबा के नाम दलीप ट्रॉफी में सर्वोच्च व्यक्तिगत स्कोर का रिकॉर्ड भी दर्ज है. उन्होंने 21 अक्टूबर, 1987 को पश्चिम क्षेत्र के खिलाफ उत्तरी क्षेत्र की ओर से 320 रनों की पारी खेली थी. इस रिकॉर्ड को अब भी कोई नहीं तोड़ पाया है. उन्हें 400 रन न बना पाने का इतना अफसोस हुआ कि उन्होंने गुस्से में ड्रेसिंग रूम की खिड़की के शीशे को तोड़ दिया. भारत में क्रिकेट के बाद लांबा ने बांग्लादेश और आयरलैंड में क्लब क्रिकेट भी खेली.

छोटे करियर ने भी किया प्रभावित
लांबा ने अपने टेस्ट करियर में केवल चार मैच खेले जिनमें उन्होंने 20.40 की औसत से 102 रन बनाए. वहीं वनडे करियर में खेले 32 मैचों में उन्होंने 27.00 की औसत से 783 रन बनाए 20 की औसत से 1 विकेट झटका. पहले वनडे सीरीज में ही उन्होंने दो मैच विनिंग पारी खेलते हुए मैन ऑफ द टूर्नामेंट रहे जिसमें 6 वनडे में उन्होंने 55.60 के औसत से शानदार 278 रन बनाए, जिसमें एक शानदार शतक भी शामिल थी. वहीं 121 फर्स्ट क्लास मैचों में 53.86 की औसत से 8776 रन और 70.50 की औसत से 6 विकेट दर्ज हैं.

एक विवाद यह भी रहा चर्चा में
 क्रिकेट इतिहास का एक विवाद उस समय पैदा हुआ जब 1990-91 के दिलीप ट्रॉफी के फाइनल में रमन लांबा और राशिद पटेल का झगड़ा हो गया. दोनों पहले तो लगातार एक-दूसरे को घूरते रहे, लेकिन दोपहर तक यह विवाद काफी बढ़ गया. लांबा ने पहली पारी में 180 रन बनाए थे, वह लगातार पटेल को चिढ़ाते रहे. तब पटेल ने लांबा के सामने एक बीमर फेंकी जो उनके सिर पर लगी, इसके बाद वह स्टंप लेकर लांबा को मारने के लिए दौड़े. लांबा ने बैट से अपना बचाव किया. इसके बाद लांबा और पटेल को क्र्मशः 10 और 13 महीने के लिए निलंबित कर दिया गया. 

एक रोचक किस्सा यह भी
1986 के इंग्लैंड दौरे पर लीड्स में रमन लांबा श्रीकांत की जगह फील्डिंग करने मैदान पर उतरे. बाद में बिना रमन लांबा को जानकारी दिए कृष्णामाचारी श्रीकांत मैदान पर लौट आए. परिणामस्वरूप 12 खिलाड़ी फील्डिंग करते दिखे. रवि शास्त्री के पूरे ओवर में 12 खिलाड़ी मैदान पर रहे. ओवर की समाप्ति पर अंपायर को इसका पता चला और रमन लांबा पवेलियन लौटे.