9 सितंंबर: जब 78 मैच के बाद सचिन के बल्ले से निकला था पहला वनडे शतक

ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर ने 9 सितंबर 1994 को कोलंबो में खेले जा रहे सिंगर कप में लगाया था पहला शतक.

9 सितंंबर: जब 78 मैच के बाद सचिन के बल्ले से निकला था पहला वनडे शतक
अपना पहला वनडे शतक पूरा करने के बाद सचिन तेंदुलकर. (फोटो- Twitter/@ankitmahla25)

नई दिल्ली: मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर (Sachin Tendulkar) ने अपने करियर में रन के वे पहाड़ खड़े किए हैं, जिन्हें देखकर हर किसी को हैरानी होती है. ठीक ऐसे ही क्रिकेट के भगवान के खाते में दर्ज 100 इंटरनेशनल शतकों का रिकॉर्ड तोड़ना भी असंभव सी ही बात साबित होगी. लेकिन क्या आप मानेंगे कि अपने करियर के दौरान टेस्ट मैच में महज 1 साल के भीतर शतक ठोक देने वाले सचिन को वनडे क्रिकेट में ऐसा करने के लिए 1-2 नहीं बल्कि पूरे 5 साल का वक्त लग गया था. इतना ही नहीं सचिन को ऐसा करने के लिए पूरे 78 मैच का इंतजार करना पड़ा था. इतने लंबे इंतजार के बाद सचिन का पहला वनडे इंटरनेशनल शतक 1994 में 9 सितंबर को ही रिकॉर्ड बुक में दर्ज हो पाया था.

ओपनिंग में उतरने के बाद ही मिलने लगी थी आहट
सचिन तेंदुलकर ने अपने करियर के पहले 69 मैच चौथे से छठे नंबर के बीच बल्लेबाजी करते हुए बचाए थे. इन सभी मैचों में या तो ऊपर के बल्लेबाजों के जल्द आउट होने के कारण सचिन पर बेहद दबाव रहता था और वे अपना नैसर्गिक खेल नहीं दिखा पाते थे या फिर सचिन के पिच पर उतरने के समय तक इतने ओवर खत्म हो जाते थे कि उनके लिए फटाफट गेंद को हिट करने के अलावा कोई चारा नहीं रहता था. 

इसकी वजह से वो मिडिल ऑर्डर में ज्यादा बड़ी पारियां नहीं खेल सके थे. इस दौरान उनका सर्वाधिक स्कोर 84 रन का था, जो सचिन ने 1992 वर्ल्ड कप के दौरान न्यूजीलैंड के खिलाफ ड्यूनेडिन के मैदान पर खेले गए मुकाबले में बनाया था. लेकिन अपने 70वें मैच में सचिन को पहली बार न्यूजीलैंड में ही ऑकलैंड की पिच पर ओपनिंग करने का मौका मिला और सारा नजारा ही बदल गया. सचिन इस पारी में तो महज 49 गेंद में धुआंधार 82 रन बनाकर आउट हो गए, लेकिन इसके बाद उन्होंने अगली 8 पारियों में 3 अर्धशतक ठोक दिए, ये पारियां उनका पहला शतक जल्द ही आने की आहट दे रही थीं.

फिर आया ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ श्रीलंका में मुकाबला
78 मैच बाद आखिरकार श्रीलंका में चल रहे सिंगर कप के दौरान 9 सितंबर, 1994 को सचिन तेंदुलकर अपनी सबसे पसंदीदी टीम ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ ओपनिंग में उतरे. पहले बल्लेबाजी करने उतरी टीम इंडिया के लिए सचिन तेंदुलकर और मनोज प्रभाकर (Manoj Prabhakar) ने ओपनिंग विकेट के लिए 87 रन की शानदार साझेदारी की. इन 87 रन में मनोज प्रभाकर के महज 20  रन थे. 

मनोज के आउट होने से सचिन पर दबाव बन गया, लेकिन वे जुटे रहे. दूसरे छोर पर विकट गिरते रहे और सचिन एकतरफ खड़े होकर ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजी की बखिया उधेड़ते रहे. आखिरकार वो पल आ गया, जब सचिन ने अपने करियर का पहला वनडे शतक पूरा कर लिया. 119 गेंद में 8 चौकों और 2 छक्कों के साथ सचिन ने अपना शतक पूरा किया था. इसके बाद वो 130 गेंद में 110 रन बनाकर आउट हो गए. भारत ने 50 ओवर में 8 विकेट पर 246 रन बनाए और ऑस्ट्रेलिया को 47.4 ओवर में 215 रन पर लुढ़काकर 31 रन से मुकाबला अपने नाम कर लिया.

इसके बाद बनाया हर 7वीं पारी में शतक
अपने पहले वनडे शतक की बाधा से पार आने के बाद सचिन के बल्ले से शतकों की बौछार ऐसी लगी कि टेस्ट हो या वनडे, उनके खाते में हर दिन नए शतक जुड़ रहे थे. उन्होंने इसके बाद वनडे में औसतन हर 7वीं पारी में शतक बनाया. सचिन के नाम पर वनडे में कुल 49 शतक मौजूद हैं, जिनमें इंटरनेशनल वनडे क्रिकेट इतिहास का पहला दोहरा शतक भी शामिल है, जो उन्होंने ग्वालियर में 24 फरवरी, 2010 को दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ नॉटआउट 200 रन की पारी के साथ बनाया था.

पहले शतक के बाद बनाई शून्य की हैट्रिक
इसे संयोग कहिए या कुछ और लेकिन अपना पहला वनडे शतक बनाने के बाद सचिन तेंदुलकर को अगले तीनों मैच में शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा था. इसका कारण था, सचिन का अगली तीनों पारियों में शून्य पर आउट हो जाना. जीरो की इस हैट्रिक से सचिन बेहद हताश हो गए थे और इसका जश्न उन्होंने एक पारी बाद ही एक और शतक ठोककर मनाया था.

ऑस्ट्रेलिया ही रही सबसे फेवरेट टीम
शतक बनाने के लिहाज से सचिन की फेवरेट टीम हमेशा ऑस्ट्रेलिया ही रही. उनके 49 वनडे शतकों में से सबसे ज्यादा 9 शतक ऑस्ट्रेलिया के ही खिलाफ आए थे, जिनमें शारजाह के मैदान पर दो लगातार शतक भी शामिल थे. इन दोनों शतकों के बाद ऑस्ट्रेलियाई विशेषज्ञों ने सचिन का नाम 'डेजर्ट स्ट्रॉम' रख दिया था. 

ऑस्ट्रेलिया के बाद उन्होंने श्रीलंका के खिलाफ 8 और न्यूजीलैंड, पाकिस्तान, दक्षिण अफ्रीका व जिंबाब्वे के खिलाफ 5-5 शतक अपने खाते में दर्ज किए थे. अपने करियर के दौरान सचिन तेंदुलकर ने 200 टेस्ट मैच में 51 शतक के साथ 15,921 रन बनाए तो 463 वनडे मैच में 49 शतक के साथ 18426 रन उनके खाते में आए. वे अपने करियर में महज 1 टी20 इंटरनेशनल मुकाबला खेले, जिसमें उन्होंने 10 रन बनाए थे.